रोजाना वीरभद्रासन १ के अभ्यास से मिलते हैं ये चमत्कारी लाभ , भय से मिलेगा छुटकारा

रोजाना वीरभद्रासन १ के अभ्यास से मिलते हैं ये चमत्कारी लाभ , भय से मिलेगा छुटकारा

योग में वर्णित वीरभद्रासन  भगवान् शिव के वीरभद्र नामक योद्धा अवतार की एक सुंदर रचना है। पौराणिक मान्यता अनुसार, सती दहन के पश्चात् जब शिव क्रोधित हुए ,तो उन्होंने दक्ष प्रजापति को दंड देने हेतु वीरभद्र नामक गण की रचना की थी। "वीरभद्रासन" का नियमित अभ्यास साधक में साहस और वीरता को उजागर करता है। इंग्लिश में इसे Warrior Pose-1 भी कहा जाता है। 





Virbhadrasana 1 In Hindi - वीरभद्रासन १ योग

Virbhadrasana 1 In Hindi - वीरभद्रासन १ योग

  1. वीरभद्रासन का अभ्यास करने के लिए जमीन पर चटाई बिछाकर ताड़ासन में खड़े हो जाए।
  2. अपने दोनों पैरों के बिच ३ से ४ फिट की दुरी बनाये।
  3. इस स्थिति में ध्यान रखे की आपका दाहिना पैर ९० डिग्री और बायां पैर १५ डिग्री का कोन बनाता हो।
  4. दोनों हथेलियों को ऊपर ले जाकर नमस्कार की मुद्रा में जोड़ दे ।
  5. आपके कंधे एकदम सीधे और समांतर होने चाहिए।
  6. अपने दाहिने घुटने को थोड़ा मोड़कर अपनी जांघ के खिचाव को महसूस करे। कमर को दाहिने और स्पिन करे ,और अपनी दृष्टी को ऊपर की और करे।
  7. जब आप इस स्थिति में आ जाते है ,तो कमर के कसाव को महसूस करे ,और छाती को विस्तारित करे।
  8. इस आसन का अभ्यास करते समय मन में एक योद्धा वाली धारणा को रखे जो अपने विकारों पर जित हासिल करने हेतु युद्ध कर रहा है। और चेहरे पर हलकी सी जंग जितने वाली मुस्कान को छलकने दे।
  9. इसी अवस्था में कम से २ मिनट तक बने रहे ,अभ्यास के चलते श्वासों को सामान्य रूप से लेते रहे।
  10. अब श्वास को बाहर छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में आ जाए।
  11. वीरभद्रासन का अभ्यास करते समय आप अपना ध्यान मेरुदंड का निचला हिस्सा या भृकुटि पर केंद्रित कर सकते है।





Health Benefits Of Virbhadrasana 1 | वीरभद्रासन १ के लाभ



  1. इस आसन का अभ्यास कर आप अपने शरीर को बाहरी और अंदरूनी रूप से शक्तिशाली एवं संतुलित बना सकते है।
  2. ये आपके कंधे ,जांघ ,हाथ ,पैरों की मासपेशियां ,मेरुदंड को निरोगी और पुष्ट बनाता है।
  3. स्टैमिना को बढाकर संतुलन शक्ति में वृद्धि करता है। 
  4. जिन्हे हर समय खुर्सी पर बैठकर काम करना पड़ता है उन्हें इस आसन का अभ्यास जरूर करना चाहिए। 
  5. जिन लोगों को हमेशा अपने कंधों में जकड़न या असुविधा महसूस होती है उनके लिए वीरभद्रासन सर्वोत्तम आसन है।
  6. ये शरीर की चयापचय प्रक्रिया को नियंत्रित कर संतुलन बनाये रखता है।
  7. वीरभद्रासन का अभ्यास साधक को तनावरहित और ऊर्जावान बनाता है।
  8. अनिद्रा ,अतिनिद्रा ,थॉयरॉइड ,दृष्टिदोष ,मोटापा ,वातरोग ,धातुरोग ,कफ ,पित्तरोग ,अवसाद ,चिंता जैसी समस्याएं वीरभद्रासन के नियमित अभ्यास से दूर हो जाती है।
  9. नित्य इस आसन का अभ्यास साधक की समरणशक्ति को बढ़ाने में मदद करता है एवं साधक के मस्तिक्ष को शांत बनाये रखता है।
  10. योग में वीरभद्रासन को निर्भीकता का प्रतीक माना जाता है।
  11. ये साधक में साहस और निर्भीकता को उजागर करता है ,भय और चिंता जैसे तुच्छ विकारों पर वो जित हासिल कर लेता है, जो वीरभद्रासन का प्रमुख उद्देश्य है। 
  12. वीरभद्रासन १ के बाद ,वीरभद्रासन २ का अभ्यास करना फायदेमंद होता है।





Precautions For Warrior 1 - वीरभद्रासन १ का अभ्यास करते समय सावधानी


  • इस आसन का अभ्यास उन लोगों के लिए नहीं है जिन्हे मेरुदंड से संबंधित कोई परेशानी है। या जिनकी ये समस्या ठीक हो चुकी है।
  • हृदयरोगी और गंभीर रक्तचाप से पीड़ित लोगों को इस आसन से बचना चाहिए।
  • घुटने ,कंधे ,और पेट की कोई गंभीर बिमारी होने पर इस आसन का अभ्यास न करे।
  • गर्भवती महिलाओं के लिए यह आवश्यक है की वीरभद्रासन का अभ्यास करने से पूर्व वो अपने डॉक्टर से परामर्श कर ले। 
  • इससे अच्छा होगा अगर गर्भवती स्त्रियाँ इस आसन का अभ्यास ना करे।
  • अगर आप पहली बार इस आसन का अभ्यास कर रहे है तो अपने किसी साथी या मित्र के सानिध्य में करे।





 Know About Virbhadrasana 1 Pose - ध्यान रखने योग्य बातें

  • किसी भी योगासन को सुबह सूर्योदय के समय करना सकारात्मक परिणाम देता है । यही बात वीरभद्रासन पर भी लागू होती है ,क्योंकि यही वो समय है ,जब आपका पेट ख़ाली होता है।
  • इसे आप शाम के समय भी कर सकते है ,पर इस बात का ध्यान रखे की आपके भोजन और अभ्यास में कम से कम ६ या ७ घंटे का समय अवश्य हो।





अब आप वीरभद्रासन-१ के बारे में जान चुके हैं। इसे अपने दैनिक योगसत्र में शामिल करें।  वीरभद्रासन का नियमित रूप से किया गया अभ्यास ,आपको साहस और पराक्रम की उच्चतम स्थिति की अनुभति कराएगा। अपने दोस्तों के साथ इसे शेयर करना ना भूले।