शरीर को लचीला बनाना है ,तो रोज करे उर्ध्व धनुरासन का अभ्यास | Urdhva Dhanurasana

शरीर को लचीला बनाना है ,तो रोज करे उर्ध्व धनुरासन का अभ्यास | Urdhva Dhanurasana

योगशास्त्र में वर्णित Ek Pad Urdhva Dhanurasana एक उन्नत योगमुद्रा है। इसका अभ्यास साधक के लिए तभी फलदायी रहता है ,जब वो धनुरासन में पूर्ण संतुलन प्राप्त कर ले। इस आसन का अभ्यास सरल हो जाता है ,जब आप इसे आसनों का अभ्यास या व्यायाम आदि करने के बाद करे। योग आसनों के या व्यायामों के अंत में शरीर गर्म और खुला हुआ रहता है ,जिससे आप आसानी से उर्ध्व धनुरासन  का अभ्यास कर सकते है। 

"एक पाद उर्ध्व धनुरासन"  शब्द संस्कृत भाषा से आया है ,जो एक+पाद+उर्ध्व+धनु+आसन इन पांच शब्दों से मिलकर बना है। इसका सटीक और सरल अर्थ एक =एक ,पाद= पैर,उर्ध्व= ऊपर की और ,धनु = धनुष्य ,आसन= स्थिति ,दोनों पैरों में से एक पैर को ऊपर करके धनुष्य की स्थिति बनाना निकलता है।



Urdhva Dhanurasana In Hindi - उर्ध्व धनुरासन योग

Urdhva Dhanurasana In Hindi - उर्ध्व धनुरासन योग





  1. इस आसन का अभ्यास किसी शांत और स्वच्छ जगह पर करे।
  2. सर्वप्रथम जमीन पर चटाई डालकर पीठ के बल लेट जाए।
  3. श्वास को सामान्य स्थिति में लेते रहे।
  4. अपने दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर अपने नितंब  (हिप्स) तक ले आये ,और दोनों हाथों को कंधे के ऊपर ले जाकर फर्श पर टिका दे।
  5. हाथों को फर्श पर टिकाते समय यह ध्यान दे की दोनों हाथों की उंगलिया पैरों की दिशा में होनी चाहिए।
  6. अपने दोनों हाथ एवं दोनों पैरों पर शरीर का वजन डालकर ,शरीर को ऊपर उठाये। 
  7. अब शरीर को अंदर की और इसप्रकार से मोड़ने का प्रयास करे ,जिसप्रकार धनुष्य को बनाते समय लकड़ी को मोड़ा जाता है।
  8. इस स्थिति में श्वास को सामान्य रूप से  लेते रहे। इस अवस्था को योग में चक्रासन के नाम से जाना जाता है। { जाने - चक्रासन और उसके लाभ }
  9. जब आप इस अवस्था में अपने आप को संतुलित और स्थिर पाए ,तो उन्नत अवस्था को प्राप्त करने के लिए ,अपने दोनों हाथ एवं अपने बाएं पैर पर शरीर को संतुलित करे। 
  10.  दायां पैर ऊपर उठाने का प्रयत्न करे। शुरुवाती समय में पैर को ऊपर उठाते समय घुटने से मुड़ा हुआ रहता है। परंतु जब आप इसका अभ्यास करे ,तो धीरे धीरे पैर को सीधा करने का प्रयास करे।
  11. एक यही स्थिति होती है ,जो आपके धैर्य और आत्मशक्ति  की परीक्षा लेती है। परंतु संयम के साथ टिके रहने से ये अवस्था सिद्ध हो जायेगी।
  12. यही अवस्था Ek Pad Urdhva Dhanurasana की स्थिति कहलाती है। इसी क्रिया को अपने दूसरे पैर के साथ भी करे।
  13. जब आप इस अवस्था को साध लेते है ,तो इस आसन को और उन्नत बनाने के लिए आप विरुद्ध हाथ को भी ऊपर उठाकर संतुलन बनाने का प्रयत्न करे।
  14. जैसे अगर आपका दायां पैर ऊपर है तो आप अपने बाएं हाथ को ऊपर करके ,केवल अपने दाहिने हाथ और बाए पैर पर शरीर को संतुलित करने का अभ्यास  कर सकते है।
  15. अभ्यास करते समय आप अपना ध्यान अपने मेरुदंड ,नाभि पर ,या जो पैर जमीन पर है ,उस पैर के खिचाव पर केंद्रित कर सकते है।





 While Practicing Urdhva Dhanurasana - ध्यान देने योग्य बाते



  • योग का प्रमुख लक्ष्य अपने शरीर को स्वस्थ और निरोगी बनाकर परमात्मा के मार्ग पर अग्रेसर होना है। ना की अपने आप को पीड़ा या चोट पहुँचाना है।
  • उर्ध्व धनुरासन का अभ्यास करने के लिए शरीर का संतुलित और लचीला होना परम आवश्यक है। 
  • इसलिए  अभ्यास करने से पूर्व अपने दैनंदिन आसनों या व्यायामों पीछे झुकने वाले आसनों को स्थान दे।
  • जब आप अपने शरीर में लचीलापन और संतुलन की स्थिति का अनुभव करे ,तभी आप उपरोक्त आसन का अभ्यास करे।
  • पीछे झुकाव देने वाले आसनों में आप चक्रासन ,धनुरासन ,भुजंगासन,सर्वांगासन जैसे आसनों का समावेश कर सकते है।
  • जब आप इस आसन का अभ्यास करे तो आपका पेट खाली होना चाहिए ,तथा भोजन के १० घंटे बाद इस आसन का अभ्यास करना लाभदायी रहता है।
  • सर्वोत्तम परिणामों के लिए आसनों का अभ्यास ब्रम्हमुहर्त (सुबह) के समय करना स्वास्थ के लिए फलदायी रहता है।





 Health Benefits Of Urdhva Dhanurasana -  उर्ध्व धनुरासन के लाभ


  1. शरीर को लचीला एवं संतुलन शक्ति का विकास करने के लिए उर्ध्व धनुरासन अत्यंत फायदेमंद है।
  2. इस आसन के अभ्यास से कंधे ,पैर,तथा हाथ मजबूत एवं शक्तिशाली बनते है।
  3. मेरुदंड पर विशेष प्रभाव पड़ने के कारण ,मेरुदंड को लचीला और स्वस्थ बनाता है।
  4. इसके अभ्यास से छाती चौड़ी होकर ह्रदय की कार्यक्षमता को बढ़ता है। 
  5. शरीर में खून का संचार तेज होकर ,रक्त को शुद्ध करता है।
  6. गले के रोगों में फायदेमंद है ,तथा आँखों की समस्याओं को दूर कर आँखों को स्वस्थ एवं निरोगी बनाता है।
  7. इसके अभ्यास से रक्तसंचार मस्तिक्ष की और होने लगता है ,जिससे दिमाग तनावरहित एवं शांत रहता है।
  8. प्रजनन अंगों को प्रभावित कर ,प्रजनन क्षमता को बढ़ाता है ,तथा गुप्तरोग,श्वेत प्रदर, मासिक धर्म संबंधित समस्याएं  इत्यादि रोगों में परम उपयोगी है।
  9. ये आसन आत्मशक्ति को बढ़ाकर धैर्य ,सहनशीलता तथा संयम जैसे गुणों को उजागर करता है।






Precautions For Ek-Pad Urdhva Dhanurasana - सावधानी


  • एक पाद उर्ध्व धनुरासन  सामान्य आसन नहीं है ,ये एक उन्नत योगमुद्रा है।
  •  इसीलिए स्वयं इसका अभ्यास ना करे। चिकित्स्कीय परामर्श तथा योग्य प्रशिक्षक की देखरेख में ही इस आसन का अभ्यास करे।
  • ये आसन उन लोगों के लिए नहीं है जो रीढ़ की हड्डी की चोट (मेरुदंड) तथा उच्च रक्तचाप से पीड़ित है।
  • पहली बार किसी योग्य गुरु या साथी के सानिध्य में ही उर्ध्व धनुरासन का अभ्यास करना चाहिए।





इस लेख में आपने "एक पाद उर्ध्व धनुरासन "  के बारे में जाना। उर्ध्व धनुरासन फायदेमंद साबित हो सकता है ,अगर आप इसे अपने डेली रूटीन में स्थान दे।