ऐसे करेंगे कर्णपीड़ासन का अभ्यास तो नहीं होंगी कान से जुडी समस्याएं , और भी है लाभ

ऐसे करेंगे कर्णपीड़ासन का अभ्यास तो नहीं होंगी कान से जुडी समस्याएं , और भी है लाभ

संस्कृत शब्द : कर्णपीड़ासन  का अर्थ कर्ण - कान ,पीड़ा - दुःख ,आसन - मुद्रा  होता है। इस आसन का अभ्यास करने से कान से जुडी सभी समस्याएं खत्म हो जाती है। 

योग में वर्णित कर्णपीड़ासन  एक उन्नत योगासन है। पहली बार इसका अभ्यास करते समय पीड़ा का अनुभव होता है। इसलिए इस आसन का अभ्यास करने से पहले यह आवश्यक है की आप हलासन और सर्वांगासन में पूरी तरह पारंगत हो जाए। जब आप इन दोनों आसनों में महारथ हासिल करते है ,तो आपके लिए कर्णपीड़ासन का अभ्यास करना सरल बन जाता है। इस आसन को " राजा हलासन" के रूप में भी जाना जाता है ,क्योंकि हलासन का अभ्यास किये बिना इस आसन को करना शारीरिक पीड़ा देता है। यह आसन आपके मेरुदंड को विस्तारित कर उसे बेहतरीन खिंचाव देता है ,और अनगिनत शारीरिक तथा मानसिक लाभ प्रदान करता है।



Karnapidasana Yoga | कर्णपीड़ासन योग

Karnapidasana Yoga | कर्णपीड़ासन योग




  1. इस आसन के अभ्यास के लिए निचे दरि बिछाकर पीठ के बल लेट जाए।
  2. हाथों को बगल में रखे और पैरों को सीधा रखे। श्वास भरे और हाथों मजबूती से फर्श पर रखे। 
  3. पैरों को एकसाथ ऊपर हवा में उठाये, श्वास छोड़ते हुए दोनों पैरों को सिर के ऊपर हलासन की स्थिति में ले जाए।
  4. इस अवस्था में दोनों हाथों को, कंधों के समांतर नीचे फर्श पर एक दूसरे के साथ फसाकर रखे। इससे आप ऊपर उठे हुए शरीर को सहारा दे सकते है।
  5. इसी स्थिति में बने रहे और दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर कंधों के करीब लाये,और कानों से चिपका दे।
  6. इस अभ्यास के दौरान अपनी पीठ को ज्यादा ढीला ना छोड़े ,और सामान्य गति से श्वास लेते रहे। कुछ देर इसी अवस्था में रुके।
  7. वापस आने के लिए पैरों को सीधा करे और श्वास छोड़ते हुए पैरों को निचे लाये। कुछ देर विश्राम करे और फिर इसी क्रिया को कम से कम ४ से ५ बार करे।
  8. इस आसन का अभ्यास करते समय आप अपना ध्यान मूलाधार स्थान या श्वासों पर केंद्रित कर सकते है।










Karnapidasana Benefits | कर्णपीड़ासन के फायदे



  1. इस आसन का नियमित अभ्यास आपकी रीढ़ की हड्डी को विस्तारित करने में मदद करता है।
  2. इसका सीधा प्रभाव नाभिचक्र पर पड़ता है। ये जठराग्नि को प्रदीप्त कर पाचनक्षमता को बढ़ाता है।
  3. नियमित रूप से कर्णपीड़ासन का अभ्यास पीनियल ग्रंथि को उत्तेजित करता है ,जो थायरॉइड जैसी समस्याओं के लिए लाभकारी है।
  4. छाती को चौड़ा कर फेफड़ो में शुद्ध प्राणवायु का संचरण करता है।
  5. यह फेफड़ों को मजबूत बनाकर अस्थमा जैसे श्वासनविकारों को दूर रखता है।
  6. कंधों और बाजुओं को फ़ैलाने में मदद करता है।
  7. उच्च रक्तचाप को नियंत्रित रखता है।
  8. मासिक धर्म तथा रजोनिवृत्ति की समस्याओं को दूर करता है।
  9. इससे रक्तसंचार मस्तिक्ष की तरफ होने लगता है ,ये तनाव को दूर कर मस्तिक्ष को शांत बनाये रखता है।
  10. यह थकान ,अनिद्रा ,अतिनिद्रा ,बांझपन ,डिप्रेशन ,चिंता ,सिनोसिटिस जैसे रोगों को दूर करे में सहायक है।
  11. यह कूल्हों ,कमर ,जाँघे और कंधों को टोन करने में मदद करता है।
  12. ये कान की आतंरिक कोशिकाओं को ऊर्जा और आराम पहुंचाता है।
  13. आँखों की रौशनी बढ़ाने में सहायक है।
  14. असमय बालों का सफ़ेद होना तथा बालों का गिरना रोकता है।
  15. बुद्धि को कुशाग्र बनाकर एकाग्रता क्षमता को विकसित करता है।
  16. इसका अभ्यास व्यक्ति में सहनशीलता ,शांति और धैर्य की प्रवृति को बढ़ाता है।







Karnapidasana Precautions | कर्णपीड़ासन में सावधानी





  • इस आसन का अभ्यास उच्च रक्तचाप ,दस्त ,माहवारी ,गर्दन में गंभीर चोट होनेपर नहीं करना चाहिए।
  • इस आसन में महारथ हासिल करने के आपको हलासन में पारंगत होना आवश्यक है।
  • इसलिए पहली बार इस आसन का अभ्यास सावधानीपूर्वक करे।






Things You Need To Know |  ध्यान रखने योग्य बाते





  • बाकी योगासनों की तरह इस आसन का अभ्यास भी आपको खाली पेट करना है।
  • सुबह सूर्योदय का समय योगासन या कसरत के लिए अच्छा होता है। पर अगर शाम को आप योगाभ्यास करते है ,तो आपको भोजन और अभ्यास के बिच कुछ अंतर् छोड़ना होगा।





इस लेख में मैंने आपको कर्णपीड़ासन योग  के बारे में जानकारी दी। कर्णपीड़ासन का अभ्यास हमें अनगिनत शारीरिक और मानसिक स्वास्थ लाभ प्रदान करता है। बस इसे धैर्य और समझदारी के साथ करना आवश्यक है। इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे। आप अपनी राय कमेंट बॉक्स में छोड़ सकते है।