वीरभद्रासन २ के स्वास्थ लाभ और विधि जानकर , चौक जायेंगे आप


योग में वर्णित इस आसन का नाम ' भगवान् शिव'  द्वारा निर्मित 'वीरभद्र' नामक गण के ऊपर रखा गया है। संस्कृत भाषा में इसका अर्थ वीर = योद्धा, भद्र = अच्छा दोस्त और आसन = मुद्रा होता है। यह योग में वर्णित सबसे लोकप्रिय और सुंदर मुद्राओं में से एक है। अंग्रेजी में इसे  ' Warrior-2 ' या " वीरभद्रासन-२ " के नाम से भी जाना जाता है।




Virabhadrasana in Hindi | वीरभद्रासन योग

Virabhadrasana in Hindi | वीरभद्रासन योग





  1. जमीन पर चटाई बिछाकर सीधे खड़े हो जाए। पैरों में ३ से ४ फिट का अंतर् रखे।
  2. अपने दाहिने पैर को ९० डिग्री के, और बाए पैर को १५ डिग्री के कोण में बाहर करे। 
  3. ध्यान दे की आपके दाहिने पैर की एड़ी,  आपके बाए पैर के समांतर रेखा में रखी गयी हो।
  4. अपने हाथों को कंधों की सीध में ऊपर उठाये ,तथा दोनों हथेलियों को जमीन से समांतर रखे।
  5. पैरों को स्थिर रखते हुए लंबी श्वास भरे और अपने दाहिने पैर को घुटने से मोड़े। 
  6. जब आप घुटने को मोड़ते है ,तो आपके दाहिने पैर का तलवा फर्श से सटा होना चाहिए।
  7. अपनी गर्दन को दाहिने तरफ मोड़े और देखे। 
  8. इस अवस्था में बने रहे और आरामदायक स्थिति का अनुभव करे। 
  9. ऐसा करते समय अपने गुदा प्रदेश को अंदर खींचे या धक्का दे।
  10.  इसी अवस्था में बने रहे और साहसी भावना को अपने मन में फैलने दे ,जैसे आप कोई युद्ध कर रहे है।
  11. अभ्यास करते समय श्वास गति को सामान्य रखे। 
  12. कुछ देर रुकने के बाद श्वास छोड़ते हुए मुद्रा से बाहर आये। 
  13. अब इसी क्रिया को अपने बाए पैर के साथ भी दोहराये। 

       


      Health Benefits Of Virabhadrasana | वीरभद्रासन २ के फायदे 

      Health Benefits Of Virabhadrasana | वीरभद्रासन २ के फायदे







      1. यह आसन संपूर्ण शरीर मजबूत बनाने में सहायक है।
      2. यह पैर,जाँघे ,कूल्हे तथा एड़ियों को आंतरिक पोषण प्रदान करता है।
      3. छाती का विस्तार कर फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाता है।
      4. यह कंधों को बलवान बनाता है।
      5. गले के रोगों में चिकित्स्कीय पढतीसे कार्य करता है।
      6. इस आसन का अभ्यास जठराग्नि को प्रज्वलित कर पाचन तंत्र को सुधारता है।
      7. भूख न लगना ,अम्लता ,कब्ज ,वायु विकार ,मल निष्कासन जैसे समस्याओं में लाभदायी है।
      8. पीठ में होनेवाले असहनीय दर्द से छुटकारा दिलाता है।
      9. वीरभद्रासन २ का नियमित अभ्यास भय को दूर करता है। और साहस एवं सहनशीलता जैसे भावों को विकसित करता है।
      10. इस आसन के नियमित अभ्यास से आप हमेशा शांति और ताजगी का अनुभव करेंगे।












      Virbhadrasana Precautions | वीरभद्रासन २ में सावधानी

      • अगर आप निचे दी गयी समस्याओं से पीड़ित है ,तो वीरभद्रासन २  का अभ्यास करने से बचिए।

      1. रीढ़ की हड्डी या मेरुदंड की किसी चोट या समस्या से पीड़ित होनेपर इस आसन का अभ्यास ना करे।
      2. उच्च रक्तचाप की गंभीर समाया से ग्रसित होनेपर भी इस आसन को करने से बचे।
      3. ह्रदय रोग के मरीजों को इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए
      4. घुटने की चोट या दर्द होनेपर वीरभद्रासन २ का अभ्यास ना करे।
      5. दस्त से पीड़ित होनेपर भी इस आसन को ना करे।
      6. अगर आप गर्दन के दर्द से पीड़ित है ,तो अभ्यास करते समय गर्दन को दाहिनी या बाएं और ना मोड़े उसे केवल सीधा रखे। 






      वीरभद्रासन का अभ्यास करने से पहले इन बातों का ध्यान रखे


      • इस आसन का अभ्यास तभी करे जब आपका पेट खाली हो। सुबह सूर्योदय का समय इस आसन के अभ्यास हेतु उपयुक्त है।
      • अगर आप शाम के समय योगाभ्यास करते है तो भोजन और अभ्यास में ५ से ६ घंटे का समय अवश्य रखे ,जिससे आपको वीरभद्रासन के सकारत्मक परिणाम मिल पाए।












      इस लेख में मैंने आपको धैर्य एवं साहस को उजागर करने वाले " वीरभद्रासन - २ "  के बारे में जानकारी दी। वीरभद्रासन २ का अभ्यास कर आप साहस के सर्वोच्च शिखर तक पहुंच सकते है। अगर आपको ये लेख पसंद आये तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करे। आप कमेंट कर के अपनी राय दे सकते है।



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