शीतली प्राणायाम विधि ,लाभ और सावधानिया

गर्मियों के दिनों  में तेज धुप के कारण हमें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है , लेकिन अगर आपको इस जलती धुप और गर्मी से बचना है, तो आपको अपने डेली रूटीन में "शीतली प्राणायाम " को अवश्य स्थान देना चाहिए।  योग के चौथे अंग प्राणायामों में से एक है "शीतली प्राणायाम" , जो आपको गर्मी और उससे होनेवाली परेशानियों दूर रखता है।  इस प्राणायाम को करने से बड़े अद्भुत लाभ होते है।



Shitali Pranayama In Hindi - शीतली प्राणायाम योग

Shitali Pranayama In Hindi - शीतली प्राणायाम योग







  1. शीतली प्राणायाम  करने के लिए किसी स्वच्छ और हवादार स्थान का चुनाव करे जहा आपको शांति महसूस हो। 
  2. उस जगह सुखासन में या जैसे आप रोज बैठते है ,वैसे बैठ जाए। 
  3. सबसे पहले ३ से ४ बार जोर से साँस ले और जोर से छोड़े।
  4. अपनी जीभ को बाहर निकाले और उसे पाइप के समान बिच में से मोडे ,अगर ऐसी न मुड़े तो अपने हाथ से इसे मोडे।
  5. अपनी मुड़ी हुई जीभ के माध्यम से तब तक हवा को अंदर ले जबतक की आपका पेट पूरी तरह हवा से ना भर जाए।
  6. अब धीरे से अपनी जीभ को अंदर की और ले ले और मुँह को बंद कर दे। 
  7. इसी अवस्था में अपनी गर्दन आगे झुकाकर अपनी ठोड़ी को अपनी छाती से लगाने का प्रयास करे। 
  8. थोड़ी देर इस अवस्था में बने रहे ,इस अवस्था को जालंधर बंध कहते है। 
  9. अब जालंधर बंध  निकालकर गर्दन सीधी कर ले। 
  10. अपनी नासिका (नाक) से अंदर भरी हुई श्वास को निकाले।
  11. यहा पर ध्यान दे की जितना समय आपको श्वास अंदर लेने में लगा ,उससे ज्यादा समय आप श्वास को बाहर  निकालने में लगायें।
  12. ये शीतली प्राणायाम की एक आवृत्ति पूर्ण  हुई। 
  13.  इस प्रक्रिया को आप अपनी क्षमता अनुसार 1 से 48 बार कर सकते है।










Health Benefits Of Shitali Pranayama - शीतली प्राणायाम से होनेवाले लाभ










  1.  शीतली प्राणायाम का सबसे पहला लाभ है की इसका अभ्यास करने से शरीर में शीतलता आती है।
  2. आप गर्मियों के मौसम में भी इस प्राणायाम का अभ्यास करके ठंडक महसूस कर सकते है।
  3. अगर किसी को नींद ना आने की समस्या है, या अनिद्रा से परेशान है तो आपको इस प्राणायाम का अभ्यास जरूर करना चाहिए। इसके अभ्यास  से आपको अच्छी नींद आएगी।
  4. अगर आप जरा जरा सी बात पर उत्तेजित हो जाते है ,या आवेश में आकर अपना आपा खो बैठते है , तो  इस  प्राणायाम को जरूर अपनाये।
  5. नियमित इस प्राणायाम का अभ्यास करने वाला व्यक्ति अपनी भूक और प्यास पर विजय प्राप्त कर लेता है,
  6. रोजाना इसका अभ्यास करने से आपको बार बार प्यास नहीं लगेगी।
  7. इस प्राणायाम को करने से गर्मी अपने आप ठंडी में बदल जाती है इसलिए अगर किसीको उच्च रक्तचाप की समस्या है, तो इसका अभ्यास जरूर करना चाहिए।
  8. अगर आप एसिडिटी और अल्सर से पीड़ित है तो यह आपके लिए किसी संजीवनी से कम नहीं।
  9. पाचन तंत्र और पेट की समस्याओ के लिए भी शीतली  प्राणायाम का प्रयोग अत्यंत गुणकारी है।







Precautions For Shitali Pranayama Yoga - शीतली प्राणायाम करते समय सावधानी





  • जो व्यक्ति दमा या अस्थमा से पीड़ित है  उसे इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  • इसीप्रकार अगर किसी को सालभर जुकाम , नजला या कफ की शिकायत रहती है ,तो उसे भी शीतली  प्राणायाम न करने की सलाह दी जाती है।
  • शीतली प्राणायाम करने से व्यक्ति के शरीर में शीतलता आ जाती है , यहातक अगर ज्यादा देर तक इसे करते रहे तो आपको ठंड लग सकती है, इसलिए इसे केवल गर्मियों के दिनों में ही करे , सर्दियों में नहीं।
  • शीतली  प्राणायाम करते समय किसी भी प्रकार की अति ना करे।
  • केवल ८ से ९ बार ही इसका अभ्यास करना आपके निरोगी जीवन के लिए पर्याप्त है।
  • अभ्यास करने के लिए सुबह सूर्योदय का समय सबसे अच्छा है। आप इसे अपने दैनिक व्यायामों के बाद ,या अन्य प्राणायामों के साथ भी कर सकते है।
  • किसी गंभीर समस्या से पीड़ित होनेपर डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है।









अब आप "शीतली  प्राणायाम विधि ,लाभ और सावधानिया" के बारे में जान चुके है। निसंकोच होकर अपने व्यायामों की सूचि में शीतली प्राणायाम को स्थान दे। 

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