पवनमुक्तासन है कई रोगों का काल , जाने इसकी विधि

पवनमुक्तासन है कई रोगों का काल , जाने इसकी विधि

"पवनमुक्तासन " एक सरल और लाभदायी आसनों में से एक है। योगशास्त्र  में इस आसन को विशेष स्थान प्राप्त है। पवनमुक्तासन एक संस्कृत शब्द है ,जिसका सटीक अर्थ पवन यानि हवा और मुकत यानी राहत देने वाला है। सरल शब्दों में जो आसन गैस या गैस से उत्पन्न बीमारियों में राहत देता  है ,वही पवनमुक्तासन कहलाता है।

 ये आसन अत्यंत सरल है ,जिसका अभ्यास हर कोई कर सकता है ,चाहे साधक प्राथमिक अवस्था में हो या उन्नत अवस्था में ,दोनों ही अवस्था में इस आसन को किया जा सकता है। ये आसन गैस और गैस संबंधित समस्याओं में राहत देने वाली सरल योगमुद्रा है ,जो आतों तथा पाचन वायु को मुक्त कर ,पेट जे जुडी परेशानियों में कारीगर है। शुरुवाती २ या ३ दिन में ही आप इसके परिणामों का अनुभव कर सकते है।



 Pawanmuktasana In Hindi - पवनमुक्तासन योग

Pawanmuktasana In Hindi - पवनमुक्तासन योग




  1. इस योगासन  का अभ्यास किसी शांत और स्वच्छ जगह पर करे।
  2. सबसे पहले निचे चटाई बिछाकर पीठ के बल लेट जाए।
  3. ध्यान रखे की आपके पैर सीधे हो तथा आपके हाथ आपके बगल में हो।
  4. कुछ देर तक सामान्य श्वास लेते हुए शरीर के अंगों को ढीला छोड़ दे।
  5. अब एक गहरी और लंबी श्वास भरे। और जैसे ही आप श्वास को बाहर छोड़े ,तो तुरंत अपने दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर ,एकसाथ पकड़कर अपनी छाती के पास ले आये।
  6. इसी स्थिति में रहते हुए अपनी जाँघों को पेट पर दबाये।
  7. अपने दोनों हाथों से अपने घुटनों को कुछ इस प्रकार से पकडे जैसे की आप घुटनों को गले लगा रहे हो।
  8. इसी अवस्था में बने रहे और अपनी श्वासों को सामान्य रूप से लेते रहे।
  9. अब अपने ध्यान को अपनी श्वास पर केंद्रित करे।
  10. और सजगता के साथ जब आप श्वास अंदर ले ,तो अपनी पकड़ को ढीला करे। तथा जब आप श्वास को बाहर निकाले तो पकड़ को कस ले ,और  घुटनो को छाती पर दबाएं।
  11. इस अभ्यास को  ६ से ७ बार करे ,और श्वास को बाहर निकलते हुए ,दोनों हाथों की पकड़ को छोड़ दे।  और सामान्य स्थिति में आ जाए।
  12. पवनमुक्तासन का अभ्यास करते हुए प्रत्येक श्वास के प्रति जागरूकता आपको सकारात्मक परिणाम लाने में मदद करेगी।
  13. इस आसन को उन्नत स्तर पर ले जाने के लिये अपने सर और छाती को जमीन से ऊपर उठाकर अपनी नाक को घुटने से लगाने का प्रयास करे।
  14. पवनमुक्तासन का अभ्यास करते समय अपने ध्यान को श्वासों पर केंद्रित करने का प्रयत्न करे।








 Health Benefits Of Pawanmuktasana - पवनमुक्तासन के लाभ 

Health Benefits Of Pawanmuktasana - पवनमुक्तासन के लाभ




  1. इस आसन  के अभ्यास से पेट की मासपेशियां मजबूत बनती है।
  2. इसके अभ्यास से पेट की आतंरिक मांसपेशियों की मालिश होती है ,तथा पाचन अंगों में फसी हुयी वायु  बाहर निकल जाती है। 
  3. यह आसन  पीठ और कंधे की मांसपेशियों को लचीला एवं चमकदार बनाता है। 
  4. समस्त वायुदोष "पवनमुक्तासन " का अभ्यास करने से समाप्त हो जाते है । 
  5. यह पेट को साफ़ तथा पाचन अंगों को पुष्ट बनाता है।
  6. इसका अभ्यास पेट ,जांघ तथा हिप्स की अतिरिक्त चर्बी को दूर करने में मदद करता है। 
  7. प्रजनन अंगों की समस्याएं दूर कर उनकी कार्यक्षमता को बढ़ाता है। 
  8. नितंब क्षेत्र में रक्तसंचालन ठीक तरह से करता है। 
  9. नित्य पवनमुक्तासन का अभ्यास भूक को बढ़ानेवाला और अन्न को पचानेवाला है।
  10. यह आसन पेट की सफाई करता है। और चेहरे पर निखार लाता है। 
  11. इसके अभ्यास से ह्रदय को स्वच्छ और शुद्ध ऑक्सीजन से भरा खून पहुँचता है ,जिसके कारण व्यक्ति निरोगी और आनंदी जीवन जीता है। 
  12. यह अतिरिक्त चर्बी को धीरे धीरे दूर करता है। और वजन को संयमित रखता है। 





Things To Know While Practicing Pawanmuktasana Yoga - ध्यान देने योग्य बाते





  • निश्चित ही पवनमुक्तासन का अभ्यास वायु संबंधित विकारों को दूर करता है ,फिर भी यह ध्यान रखे की अभ्यास करने से पूर्व आपका पेट और आतें खाली हो। 
  • सुबह के समय इस आसन को करना स्वास्थ की दृष्टी से अच्छा माना जाता है ,जिससे अंदर की गैस बाहर निकल जाए और आपका पाचनतंत्र सुचारु ढंग से कार्य करने लगे। 
  • जब भी आप अपने आसनों या व्यायामों की शुरुवात करते है ,तो सबसे पहले पवनमुक्तासन  का अभ्यास करे। ताकि अन्य आसनों से भी आप सकारत्मक परिणाम प्राप्त कर सके। 
  • भोजन के ४ या ५ घंटे बाद आप इसका अभ्यास कर सकते है। 
  • इस आसन को करने के लिए सुबह और शाम का समय उपयुक्त माना जाता है।










Precautions For Pawanmuktasana - पवनमुक्तासन में सावधानी 




  • जो लोग हर्निया और बवासीर संबंधित समस्याओं से पीड़ित है ,उन्हें पवनमुक्तासन का अभ्यस्त नहीं करना चाहिए।
  • पेट संबंधित कोई भी ऑपरेशन या समस्या होनेपर इस आसन का अभ्यास ना करे। 
  • हृदयरोगी ,उच्च रक्तचाप ,अधिक एसिडिटी तथा पीठ या गर्दन का दर्द होनेपर इस आसन को ना करे। 
  • गर्भवती महिलायें तथा मासिक धर्म होनेपर इस आसन का अभ्यास ना करे। 




 अब आप "पवनमुक्तासन है कई रोगों का काल , जाने इसकी विधि" के बारे में जान गए है। स्वस्थ और निरोगी रहने के लिए अपने जीवन में "पवनमुक्तासन" को जरूर शामिल करे।