Sunday, January 12, 2020

उपविष्ठ कोणासन कैसे करे ,इसके क्या लाभ है ?

संस्कृत : उपविष्ठ कोणासन ,उपविष्ठ - बैठे ,कोणासन - कोण मुद्रा

योग में वर्णित उपविष्ठ कोणासन शरीर को अच्छा खिंचाव  देता है।  यह बैठे आसनों में से एक बेहतरीन आसन है। इसका अभ्यास व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से उन मुद्राओं के लिए तैयार करता है ,जिनका अभ्यास बैठकर किया जाता है। इसका अभ्यास करते समय पैरों को फैलाया जाता है। एवं  मेरुदंड को आधारस्तंभ बनाकर धड़ को फर्श पर टिकाया जाता है। निचे "उपविष्ठ कोणासन" की सरल जानकारी देने जा रहे है ,जो आपके स्वास्थ के लिए उपयुक्त साबित होगी।



Upavistha Konasana Pose | उपविष्ठ कोणासन योग

Upavistha Konasana Pose | उपविष्ठ कोणासन योग





  1. इस आसन का अभ्यास किसी शांत जगह पर करे। 
  2. जमीन पर चटाई बिछाएं ,पैरों को सामने फैलाकर ,खड़े बैठ जाए। 
  3. मेरुदंड को सीधा रखे। पैरों को कंधों के समांतर फैलाये ,जिससे वो आपकी श्रोणि से ९० डिग्री का कोण बनाये।  
  4. ऐसी अवस्था में आपकी श्रोणि आरामदायक महसूस होनी चाहिए। दोनों हाथों को कूल्हों के पीछे जमीन पर टिका दे। 
  5. लंबी श्वास के साथ कमर को आगे की तरफ कमान दे और कंधों के किनारों को प्रसारित करे। कुछ समय इसी अवस्था में बने रहे। 
  6. धीरे धीरे हाथों को सामने की और ले जाए। एवं हाथों से दोनों तलवों को पकड़ ले। 
  7. तलवों को पकड़ते समय  केवल तलवों के मध्य भाग को पकड़ना है। इसके विपरीत अगर आप पैर के ऊपरी हिस्से या अंगूठे को पकड़ते है ,तो आगे झुकते समय कठिनाई हो सकती है। 
  8. श्वास छोड़ते हुए मेरुदंड को कमान दे। आगे बढे और ठोडी को फर्श पर टिकाएं। 
  9. श्वास गति को सामान्य बनाये रखे।
  10.  कम से कम १ मिनट तक आसन में बने रहे। 
  11. कुछ समय बाद श्वास लेते हुए पुनः सामान्य अवस्था में आ जाए। इस क्रिया को ३ से ४ बार दोहराये। 
  12. इस आसन का अभ्यास करते समय आप अपना ध्यान नाक के अग्रभाग पर ,भृकुटि के मध्य या श्वासों के आवागमन पर केंद्रित कर सकते है। 



Upavistha Konasana Benefits | उपविष्ठ कोणासन के लाभ


  1. नियमित इस आसन का अभ्यास कमर के निचले हिस्सों को एक बेहतरीन खिचाव देता है। 
  2. यह आपके पैर ,कंधों की मांसपेशियां ,कोहनियों को मजबूत बनाता है।
  3.  इसका अभ्यास जठराग्नि को प्रज्वलित कर भूक को बढ़ाता है।
  4.  पेट अंगों की मालिश कर पाचनक्षमता को सुदृढ़ बनाता है।
  5.  अनावश्यक चर्बी को दूर कर वजन कम करने में सहायक है।  
  6. छाती को चौड़ा कर फेफड़ों को स्वस्थ बनाये रखता है। 
  7. कमर को लचीला और आकर्षक बनाता है। 
  8. मेरुदंड को बल देता है तथा कटिस्नायुशील को दूर रखने में मदद करता है। 
  9. हार्मोन्स को नियंत्रित रखता है एवं पुरुषत्व को बढ़ाता है। 
  10. इसके नियमित अभ्यास से दिमाग शांत रहता है।
  11.  यह गुर्दों को स्वच्छ और निरोगी बनाये रखता है। 
  12. समस्त वायुविकार इसके नियमित अभ्यास से खत्म हो जाते है। 
  13. इसका अभ्यास साधक में सहनशीलता ,धैर्य ,साहस , दयाभाव को जगाता है। 

Begainner Tips | शुरुवात के लिए टिप्स 

  • शुरुवाती साधकों को ,जो पहली बार इसका अभ्यास करना चाहते है ,उनके लिए यह काफी चुनौतीपूर्ण आसन साबित हो सकता है। 
  • यदि आप आगे झुकते समय तकलीफ महसूस करते है ,तो इससे बचने के लिए पैरों को घुटनों से थोड़ा झुकाया जा सकता है। 
  • श्रोणि को स्थिर एवं सहज रखने के लिए निचे तकिया या कंबल का प्रयोग करे।


Upavistha Konasana Precautions | उपविष्ठ कोणासन में सावधानी


  • यदि आप ऊसन्धि या रान नाड़ी की समस्या से पीड़ित है तो इस आसन का अभ्यास करने से बचे। 
  • यह आसन गर्भवती स्त्रियों के लिए नहीं है। 




Some Points You Need To Know | ध्यान रखने योग्य बातें 


  • सुबह ब्रम्हमुहूर्त में योगाभ्यास करना शरीर और आत्मा के लिए उपयुक्त माना जाता है। 
  • इस आसन का अभ्यास करने से पहले आपका पेट खाली होना आवश्यक है। 
  • किसी कारण अगर आप सुबह योगाभ्यास नहीं कर पाते , तो इसका अभ्यास आप शाम के समय भी कर सकते है। बस अपने अभ्यास और भोजन में ५ घंटे का अंतर् रखना याद रखे। 




ऊपर आपने "उपविष्ठ कोणासन" के बारे में जाना। नियमित अभ्यास के द्वारा इस आसन को साधा जा सकता है। यह आसन आपको साहस की पराकाष्ठा की अनुभूति कराएगा। क्या ये जानकारी उपयोगी थी ? आप अपनी राय कमेंट बॉक्स में दे सकते है। इसे अपने साथियों के साथ शेयर करना ना भूले।

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