Tuesday, January 28, 2020

सेतु बंधासन क्यों है विशेष ,जानिए इसकी विधि एवं लाभ

योग में वर्णित सेतु बंधासन  को "Bridge Pose"  के नाम से भी जाना जाता है । इसका अभ्यास करते समय शरीर किसी पुल की तरह दिखाई देता है। हठयोग में वर्णित सेतु बंध योगासन  एक साधारण योगमुद्रा है। संस्कृत शब्द "सेतु बंधासन" तीन शब्दों से मिलकर बना है ,सेतु + बंध + आसन। सेतु का अर्थ होता है पुल ,बंध का अर्थ बांधना या ताला लगाना ,तथा बने रहने की स्थिति आसन कहलाती है। इस मुद्रा में व्यक्ति की शारीरिक संरचना एक पुल की भांति दिखाई देती है ,इसलिए इस आसन को सेतु बंधासन के नाम से जाना जाता है। यह योगासन आपकी पीठ ,गर्दन एवं छाती को प्रसारित करता है एवं संपूर्ण शरीर को आराम देता है। यह मेरुदंड और कमर को मजबूत बनाने के लिए अत्यंत लाभकारी आसन है।


Setu Bandhasana In Hindi - सेतु बंधासन योग

Setu Bandhasana In Hindi - सेतु बंधासन योग





  1. सेतु बंधासन किसी शांत और स्वच्छ जगह पर करे।
  2. सबसे पहले जमीन पर चटाई बिछाकर पीठ के बल सीधे लेट जाए। 
  3. अब अपने पैरों को घुटनों से मोड़कर तलवों को फर्श पर टिकाये। जब आप पैरों को फर्श पर टिकाते है तो ध्यान रखे की दोनों पैर, नितंबों से उचित दुरी बनाते हो तथा आपकी कमर एवं घुटने एक सीधी रेखा में हो।
  4. अपने दोनों हाथों को अपने बगल में रखे और अपनी हथेलियों को निचे की तरफ झुकाये। अब श्वास भरते हुए दोनों पैरों पर दबाव डालते हुए ,अपने शरीर के निचला ,मध्य और ऊपरी भाग को ऊपर उठाये ,तथा छाती को ठोड़ी से छूने दे।
  5. यहाँपर इस बात का ध्यान रखे की जब आप शरीर को ऊपर उठाते है तो ,आपकी ठोड़ी अपने आप ही छाती से छू जाती है ,इसके लिए आपको स्वयं कुछ करने की आवश्यकता नहीं होती।
  6. अपने दोनों हथेलियों को पीठ के निचे आपस में मिलाकर रखे ,अब आपको ऊपर उठे हुए शरीर के भार को अपने दोनों पैर और हथेलियों से संतुलित करके रखना है।
  7. जब आप ऐसा करे तो ध्यान दे की ,आपके पैर और जाँघे स्थिर और समांतर हो।
  8. इस अवस्था में श्वास को सामान्य गति से लेते रहे और इसी स्थिति  में कम से कम १ मिनट तक रुकने का प्रयत्न करे।
  9. अब श्वास को बाहर निकालते हुए सामान्य अवस्था में आ जाए।
  10. जब आप सेतु बंधासन में पारंगत हो जाते है तो इसे उन्नत अवस्था में ले जाने के लिए अपने एक पैर को ऊपर की और उठाकर रखे ,आपका पैर सीधा एवं उंगलियां ऊपर की दिशा में इंगित होनी चाहिए।
  11. उपरोक्त क्रिया हो जानेपर इसी क्रिया को आप पैर बदलकर ,दूसरे पैर से करे।
  12. इस आसन का अभ्यास करते समय  अपने नाभि चक्र पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।











 Health Benefits Of Setu Bandhasana Yoga - सेतु बंधासन के लाभ

Health Benefits Of Setu Bandhasana Yoga - सेतु बंधासन के लाभ



  1. प्रतिदिन इस आसन का अभ्यास  मेरुदंड से संबंधित समस्याओं को दूर करने में सहायक है।
  2. इसके अभ्यास से पीठ मजबूत होकर पीठ को अच्छा खिचाव मिलता है। यह श्वसनक्रिया को सुचारु ढंग से चलाता है तथा फेफड़ों को मजबूती प्रदान करता है।
  3. नित्य इसके अभ्यास से छाती चौड़ी होकर फैलने लगती है।
  4. नियमित सेतु बंधासन का अभ्यास दिमाग को शांत रखता है ,तथा अवसाद ,तनाव ,डिप्रेशन ,चिंता जैसे विकारों को दूर करता है।
  5. स्मरणशक्ति का विकास कर दिमाग ओजस्वी बनाने में सहायक है।
  6.  यह योगासन  पेट रोगों में विशेष लाभदायीं है ,इसके अभ्यास से जठराग्नि प्रज्वलित होकर पाचनतंत्र संबंधी समस्याओं का समाधान करता है।
  7. मोटापा ,हाइपोथॉयरॉइडिस्म ,भूक न लगना ,भोजन  न पचना ,मलावरोध ,कब्ज जैसे रोगों में यह आसन  विशेष लाभदायी है।
  8. यह शरीर को हल्का एवं लचीला बनाता है और शरीर को निरोगी बनाये रखने में सहायक है।
  9. यह मासिक धर्म से जुडी समस्याओं को खत्म करता है ,साथ ही जिन्हे उच्च रक्तचाप ,दमा ,अस्थमा,अनिद्रा ,जैसी समस्याएं है ,उन्हें भी राहत देता है।
  10. रोजाना इसके अभ्यास  से रक्तसंचार सुचारु रूप से प्रवाहित होता है। रोगप्रतिकारक शक्ति को बढ़ाने में यह आसन अत्यंत फायदेमंद है।
  11. यह आँखों की रौशनी को बढ़ाता है ,एवं बालों का असमय गिरना या सफ़ेद होना जैसी समस्याओं को दूर करता है।
  12. इसके अभ्यास से चेहरे पर चमक बनी रहती है ,ये झुर्रियों को हटाकर चेहरे को कोमल बनाता है।
  13. इसका अभ्यास से मूलाधार से लेकर विशुद्ध चक्र प्रभावित होते है ,जो शरीर की ऊर्जा के मुख्य केंद्र है।
  14. इस आसन  का नियमित अभ्यास साधक के अंदर ,सहनशीलता ,कठोरता ,तेज ,सौंदर्य ,ओज,दृढ़ता जैसे गुणों को विकसित करता है।






Things To Know While Practicing Setu Bandhasana Pose - ध्यान देने योग्य बातें





  • इसका अभ्यास करने से पूर्व ध्यान देना चाहिए की आपका पेट और आतें खाली हो।
  • सेतु बंधासन का अभ्यास सुबह ब्रम्हमुहर्त में करना स्वास्थ की दृष्टी से उत्तम माना जाता है।
  • अगर आप शाम के समय यह अभ्यास करते है ,तो भोजन और अभ्यास के बिच कम से कम ५ से ६ घंटे का समय अवश्य रखे। जिससे आपका भोजन पच जाए और आप नयी ऊर्जा के साथ योगाभ्यास कर पायें। 





Setu Bandhasana Precautions - सेतु बंधासन योग में सावधानी




  • जिन्हे गर्दन या पीठ पर चोट है। या गर्दन की किसी समस्या से पीड़ित होने पर उपरोक्त अभ्यास  करने से बचना चाहिए।
  • इसका अभ्यास किसी योग्य गुरु या विशेषज्ञ के सानिध्य में करना चाहिए।






"सेतुबंधासन" एक सरल और लाभदायी आसन है। जिसे आप सरलता के साथ कर सकते है ,अपने रोज के व्यायामों में इसे शामिल करना आपके लिए शुभ परिणाम लेकर आएगा। आशा करता हूँ की आपको  "सेतु बंधासन क्यों है विशेष ,जानिए इसकी विधि एवं लाभ"  से आपको महत्वपूर्ण जानकारी मिल चुकी होगी। आपके मन में कोई सवाल हो तो आप कमेंट करके पूछ सकते है।

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