क्यों है प्रार्थनासन का महत्व ? जानिए इसकी विधि

क्यों है प्रार्थनासन का महत्व ? जानिए इसकी विधि

संस्कृत : प्रार्थनासन , प्रार्थना - याचना या दुआ करना ,आसन - मुद्रा
योग में वर्णित प्रार्थनासन एक सरल और लाभदायी योगासन है। संस्कृत भाषा में इस आसन को प्रणामासन के नाम से भी जाना जाता है।  पाश्चिमात्य संस्कृति में इसे "Pray Pose" के नाम से नामित किया गया है। प्रार्थना एक आसान तरिका है ,जिसके द्वारा एक व्यक्ति अपना संदेश या मन की बात  ईश्वर तक पहुंचा सकता है। सूर्यनमस्कार की १२ स्थितियों का अभ्यास करते समय भी इस आसन का अभ्यास किया जाता है।  आप योग की शुरुवात करते समय या योगसत्र के अंतिम चरण में भी इस आसन का अभ्यास कर सकते है।



Prarthana Asana (Pray Pose) | प्रार्थनासन योग 

Prarthana Asana (Pray Pose) | प्रार्थनासन योग




  • प्रार्थनासन का अभ्यास दो विधियों द्वारा किया जाता है। प्रस्तुत दोनों विधियों में से आप किसी भी एक विधि का अभ्यास कर सकते है।


  • पहली विधि :

  1. जमीन पर चटाई बिछाकर सीधे खड़े हो जाए। 
  2. मेरुदंड (रीढ़ की हड्डी ),छाती एवं गर्दन को सीधी रेखा में रखे। 
  3. ४ से ५ बार लंबी गहरी श्वास ले। 
  4. श्वास छोड़ते हुए दोनों हाथों को कोहनी से मोड़कर छाती के बिच लेकर आये। 
  5. दोनों हथेलियों के तलवों को एक दूसरे के साथ जोड़ दे।
  6. जितनी देर इस अवस्था में रुकना संभव हो उतनी देर बने रहे। 
  7. इस विधि का अभ्यास करते समय अपने मन में ईश्वर के प्रति समर्पण और विश्वास की भावना रखनी चाहिए। एवं आँखों को बंद कर ईश्वर से मंगल कामना करनी चाहिए।



  • दूसरी विधि :



  1. प्रार्थनासन की दूसरी विधि का अभ्यास करने के लिए निचे चटाई बिछाकर सामान्य अवस्था में बैठ जाए। 
  2. दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर  ,एड़ियों एवं पंजो को जोड़ दे। 
  3. दोनों हाथों को सामने लाकर नमस्कार की मुद्रा में जोड़े। 
  4. कोहनियों को जाँघों पर रखे और हाथों की उँगलियों को ठोड़ी से सटाकर रखे। जिससे उँगलियों का ऊपरी भाग ठोड़ी से स्पर्श करता रहे।
  5. इसी अवस्था में बने रहे।  
  6.  आसन का अभ्यास करते समय श्वास को जितना संभव हो उतना गहरा और लंबा लेना चाहिए।



Prarthana Asana (Pray Pose) Benefit | प्रार्थनासन के लाभ 

Prarthana Asana (Pray Pose) Benefit | प्रार्थनासन के लाभ








  1. नियमित रूप से प्रार्थनासन का अभ्यास मन को शांति प्रदान करता है। 
  2. यह उत्तेजना को शांत कर दिमाग को ताजा एवं चिंतामुक्त करता है। 
  3. नित्य इसका अभ्यास उच्च रक्तचाप के रोगियों को आराम दिलाता है। 
  4. यह स्मरणशक्तिवर्धक है ,इसके अभ्यास से बुद्धि कुशाग्र और तेजस्वी बनती है। 
  5. इसका अभ्यास व्यक्ति के मनोमय कोष को प्रभावित करता है ,जिसके कारण पुरानी से पुरानी बीमारिया आसानी से दूर होने लगती है। 
  6. यह आसन धारणा शक्ति को बलवान बनाता है। 
  7. एकाग्रता क्षमता को बढ़ाता है। 
  8. खून में शुद्ध प्राणवायु का संचार करता है। 
  9. खून को बढाता है। 
  10. अनीमिया जैसी बीमारियों में लाभदायी है। 
  11. इसका अभ्यास व्यक्ति में समर्पण की भावना को बढ़ाता है। 
  12. मानसिक तनाव एवं अवसाद में फायदेमंद है।


Some Things You Need To Know | ध्यान रखने योग्य बाते

  • अन्य आसनों की तरह ही इस आसन का अभ्यास खाली पेट किया जाना चाहिए। 
  • सुबह सूर्योदय के समय इसका अभ्यास आपको सकारात्मक परिणाम दिलाता है। आप चाहे तो अपने योगसत्र की शुरुवात ही आप प्रार्थनासन से कर सकते है।


Prarthana Asana Precautions | प्रार्थनासन में सावधानी



  • प्रार्थनासन का अभ्यास किसी भी उम्र का व्यक्ति सरलता से कर सकता है।

आशा है आपको प्रार्थनासन और उसके महत्व के बारे में उपयुक्त जानकारी मिल चुकी होगी।  क्या यह जानकारी आपके लिए उपयोगी थी ? अपनी प्रतिक्रिया आप कमेंट बॉक्स में दे सकते है। इसे अपने दोस्तों एवं साथियों के साथ शेयर करना ना भूले।