Sunday, December 8, 2019

गर्भासन क्यों है फायदेमंद , जानिए इसकी विधि

संस्कृत: गर्भासन ,गर्भ -भ्रूण ,आसन- मुद्रा
योग में वर्णित  "गर्भासन "  एक योगासन है। इसका अभ्यास करते समय व्यक्ति का शरीर भ्रूण (गर्भ में पलनेवाले  शिशु) की तरह दिखाई देता है। इसीकारण इसे गर्भासन के नाम से नामित किया गया है। इस आसन में संपूर्ण शरीर का वजन कूल्हों पर संतुलित किया जाता है। यह शरीर की संतुलन शक्ति को बढ़ाता है ,साथ ही उत्तेजना को शांत कर मस्तिक्ष को शांत रखता है।  प्रस्तुत लेख गर्भासन के संपूर्ण जानकारी पर आधारित है,जिसका अभ्यास आपके लिए फायदेमंद साबित होगा।


                      Garbhasana In Hindi | गर्भासन योग


Garbhasana In Hindi | गर्भासन योग




  1. इस आसन का अभ्यास किसी शांत और हवादार जगह पर करे। जमीन पर चटाई बिछाकर पद्मासन में बैठ जाए। 
  2. मेरुदंड (रीढ़  की हड्डी ) को सीधा रखे।
  3. अपने दोनों हाथों को  जाँघों और बछड़ों के बिच डाले। 
  4. दोनों हाथों की कोहनियों को ,बछड़ों की मांसपेशियों में चारों तरफ घुमाये। जिससे आपके हाथों को आसानी  से मोड़ा जा सके। 
  5. शरीर को अपने कूल्हों पर संतुलित करने के लिए , श्वास छोड़ते हुए दोनों हाथों के साथ पैरों को ऊपर उठाये। 
  6. अपने दाहिने हाथ से अपना बाय कान पकडे।
  7. इसीतरह बाए हाथ से अपना दाहिना कान पकडे। 
  8. इस स्थिति में जीतनी देर संभव हो संतुलन बनाये रखे। 
  9. आसन के दौरान श्वास गति को सामान्य बनाये रखे। 
  10. सामन्य स्थिति में आने के लिए कानों को छोड़े और कम से कम ३-४ बार मुद्रा को दोहराये। 
  11. इस आसन का अभ्यास करते समय ,आप अपना ध्यान नाक के अग्रभाग या प्राकृतिक श्वास पर केंद्रित कर सकते है।



Garbhasana Benefit | गर्भासन के लाभ


  1. प्रतिदिन इस आसन का अभ्यास मस्तिक्ष की धमनियों को आराम पहुंचाता है। 
  2. यह उत्तेजना ,क्रोध ,मानसिक विकार ,अत्यधिक तनाव में फायदेमंद है। 
  3. एकाग्रता क्षमता को बढ़ाकर बुद्धि को ओजस्वी बनाता है।
  4. आध्यात्मिक मार्ग को प्रशस्त कर ,आंतरिक ऊर्जा को बढ़ाता है। 
  5. इसका अभ्यास पेट की आंतरिक मांसपेशियों को मालिश कर उन्हें स्वस्थ बनाता है। 
  6. इससे भूक खुलकर लगती है। 
  7. मोटापा दूर कर वजन कम करने में सहायक है। 
  8. यह आपकी शारीरिक मुद्रा में सुधार लाने के लिए सर्वोत्तम आसन है। 
  9. समस्त मूत्रविकार ,शुक्रक्षय ,कमजोरी ,स्वप्नदोष ,शीघ्रपतन इत्यादि समस्याओं को दूर रखता है। 
  10. यह मुद्रा आपकी शारीरक एवं मानसिक संतुलन में वृद्धि करता है।
  11. इसका नियमित अभ्यास साधक में सहनशीलता ,लचक,धैर्य एवं स्थिरता जैसे गुणों को उजागर करता  है। 


Begainner Tips | शुरुवात के लिए कुछ टिप्स


  1. पहली बार इस आसन का अभ्यास करते समय बछड़ों की मांसपेशियों में हाथों को फ़साना कष्टदायी हो सकता है। 
  2. इसे आसन बनाने के लिए पहले २ से ३ हफ़्तों तक कुक्कुटासन और तुलासन का अभ्यास करना चाहिए। 
  3. जब आपका शरीर पूरी तरह संतुलित और तैयार हो, तभी गर्भासन का अभ्यास करे। 
  4. शुरुवात में पैरों को ऊपर उठाते समय संतुलन नहीं बन पाता इसलिए संतुलन बनने तक आप दीवार के सहारे इसका अभ्यास कर सकते है। 
  5. अगर अभ्यास करते समय हाथ कानों तक ना पहुंच पाए तो दोनों हाथों से नमस्कार मुद्रा बनाकर आसन का अभ्यास करे।



Some Things You Need To Know | ध्यान देने योग्य बाते

  • यह आसन खाली पेट करना आवश्यक है। 
  • सुबह योगसत्र के बिच इसका अभ्यास करना चमत्कारी परिणाम देता है। 
  • पर अगर आप शाम के समय योगाभ्यास करते है तो अपने भोजन और अभ्यास के बिच ४ से ५ घंटे का समय छोड़ना याद रखे।




Garbhasana Precautions | गर्भासन में सावधानी

  • जिन्हे कूल्हों पर कोई घाव या तकलीफ हो उन्हें इस आसन से बचना चाहिए। 
  • जो लोग बवासीर की समस्या से ग्रस्त है ,वो इसका अभ्यास ना करे। 
  • इस आसन में पारंगत होने के लिए पद्मासन में महारथ प्राप्त करना आवश्यक है ,जो पद्मासन नहीं लगा सकते या पद्मासन के समय पीड़ा का अनुभव करते है उन्हें आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।




आशा करते है की आपको गर्भासन की विधि , लाभ एवं आवश्यक जानकारी मिल चुकी होगी। क्या यह लेख आपके लिए उपयोगी था ? आप अपनी प्रतिक्रिया कमेंट के माध्यम से दे सकते है। गर्भासन  के अभ्यास के लिए धैर्य ,सहनशीलता और नियमितता का होना आवश्यक है। इन्ही तीन सीढ़ियों पर चलकर आप सफलता के शिखर तक पहुंच सकते है। लेख पसंद आनेपर इसे अपने स्नेही और मित्रों तक जरूर बाटें।

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