सुप्त वज्रासन क्यों है फ़ायदेमंद , जाने इसके लाभ एवं विधि

योगशास्त्र में वर्णित सुप्त वज्रासन फायदेमंद आसनों में से एक है। इस आसन को वज्रासन का ही विस्तारित स्वरुप माना जाता है। इसका अभ्यास आगे की ओर झुकने वाले आसनों के बाद करना स्वास्थ के लिए लाभदायी होता है।  इन  दोनों आसनों की तुलना की जाए तो वज्रासन का अभ्यास बैठकर एक ही स्थान पर किया जाता है। परंतु सुप्त वज्रासन पीछे की और लेटकर किया जाता है।  वज्रासन का अभ्यास आप  खाली पेट या खाना खाने के बाद भी कर सकते है। परंतु सुप्त वज्रासन का अभ्यास केवल खाली पेट ही करना चाहिए। भोजन के तुरंत बाद सुप्त वज्रासन का अभ्यास लाभ की जगह पर हानि पहुंचाता है।


Supta Vajrasana  - सुप्त वज्रासन योग 

Supta Vajrasana  - सुप्त वज्रासन योग






  1. इस आसन का अभ्यास किसी शांत और साफ़ स्थान पर करे। 
  2. सबसे पहले निचे आसन या चटाई बिछाकर बैठ जाए। 
  3. अपने दाए पैर को अपने दाएं नितंब (हिप्स) के निचे रखे। एवं अपने बाए पैर को बाएं नितंब  (हिप्स) के निचे रखे। 
  4. दोनों पैरों को आपस में जोड़कर रखे। ध्यान रहे की पैरों की उंगलिया पीछे की तरफ रहे, और पैरों का ऊपरी भाग जमीन से स्पर्श करता रहे ।
  5.  दोनों पैरों पर शांति से एकसमान भार देकर बैठ जाए। 
  6. इसे ही वज्रासन की स्थिति कहा जाता है। 
  7. इसी अवस्था से सुप्त वज्रासन की शुरुवात होती है। 
  8.  दोनों हाथों की कोहनियों का सहारा लेकर पीठ के बल लेट जाए। 
  9.  अपने सर को अंदर की और ले जाने का प्रयास करे। इस अवस्था में आपका पेट और छाती ऊपर की और तन जाएंगे एवं शरीर की आकृति किसी धनुष्य की भाती दिखने लगेगी। 
  10. दोनों हाथों को आगे की और ले जाकर अपनी जाँघों पर रख दे। 
  11. इस अवस्था में ज्यादा से ज्यादा ५ मिनट तक बने रहे। 
  12. फिर सामान्य स्थिति में आ जाए इसप्रकार अपनी प्रकृति अनुसार इस आसन का अभ्यास ३ या ४ बार करे।
  13. सुप्त वज्रासन का अभ्यास करते समय अपना ध्यान नाभि चक्र या सामान्य श्वासों पर लगाना चाहिए।









 Health Benefits Of Supta Vajrasana - सुप्त वज्रासन के लाभ 




  1. इस आसन का नियमित अभ्यास करने से श्वास संबंधित सभी विकार दूर हो जाते है। 
  2. सुप्त वज्रासन का अभ्यास शरीर की मांसपेशियों को तंदुरुस्त बनाता है। 
  3. नियमित इस आसन का अभ्यास करने से घुटने ,छाती ,पैर,कमर मजबूत होते है। 
  4. बस्ती प्रणाली के सभी रोग इस आसन का नियमित अभ्यास करने से दूर हो जाते है। 
  5. सुप्त वज्रासन का अभ्यास निचे की और बहनेवाली कुंडलिनी को उजागर करता है। 
  6. इस आसन का अभ्यास करते समय फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है जिससे शरीर अधिक मात्रा में श्वास लेने के लिए सक्षम होता है।  
  7. सुप्त वज्रासन का अभ्यास शरीर को लचीला और मजबूत बनाता है। 
  8. पेट से संबंधित बड़ी आंत सुप्त वज्रासन का अभ्यास करने से साफ़ हो जाती है ,जिससे बद्ध कोष्ठता और पेट संबंधित सभी विकार दूर हो जाते है।
  9. प्रतिदिन इस आसन के अभ्यास से गले से जुडी परेशानियाँ दूर होती है ,थॉयरॉइड ,टॉन्सिल्स जैसी समस्याएं दूर हो जाती है। साथ ही सर्वाइकल ,टी. बी. ,दमा  जैसी घातक बीमारियां ज्यादा देर टिक नहीं पाती। 
  10. जिन्हे बवासीर की समस्या है उनके लिए सुप्त वज्रासन बहुत ही उपयोगी सिद्ध होता है। 
  11. इसके अभ्यास के कारण रक्तसंचार सर की तरफ होना शुरू हो जाता है, जिससे आँखों से जुडी समस्याएं दूर होकर ,आखों की रौशनी को बढ़ता है। 
  12. असमय बाल सफ़ेद होना या बाल झड़ने की समस्या को ठीक करता है। 
  13. महिलाओं के मासिक धर्म ,श्वेत पदर जैसी समस्याएं दूर करता है। 
  14. सुप्त वज्रासन का नियमित रूप से अभ्यास करने वाला साधक हमेशा जवान बना रहता है ,इसका अभ्यास शरीर को सुंदर ,कमर को पतली और आकर्षक बनाता है। 
  15. मोटापे को दूर करने के लिए सुप्त वज्रासन का नियमित अभ्यास करना चाहिए।
  16. सुप्त वज्रासन से पहले आप बालासन ,भुजंगासन ,गोमुखासन या वीरासन का अभ्यास कर सकते है।  सुप्त वज्रासन के बाद आप बकासन या पद्मासन का अभ्यास कर सकते है। 







Precautions For Supta Vajrasana  - सुप्त वज्रासन में सावधानी 



  • सुप्त वज्रासन एक उन्नत अवस्था का आसन है। इसीलिए  सुप्त वज्रासन का अभ्यास करने से पहले वज्रासन का अभ्यास करना चाहिए। 
  • ये अच्छी बात होगी की आप सुप्त वज्रासन का अभ्यास सुबह सूर्योदय के समय करे।
  • सुप्त वज्रासन का अभ्यास करने से पहले आपका पेट पूरी तरह खाली होना आवश्यक है। इसलिए अगर आप शाम के समय इस आसन का अभ्यास करना चाहते है ,तो ध्यान रखे की आपके भोजन और अभ्यास के बिच कम से कम ५ से ६ घंटे का अंतर अवश्य हो।  
  • पैर में चोट होनेपर या मोच आनेपर इस आसन का अभ्यास न करे। 
  • अगर आप पेट संबंधित किसी गंभीर समस्या से पीड़ित है , तो डॉक्टर की सलाह लेकर ही इस आसन का अभ्यास करे।
  • जिन्हे कमर से संबंधित कोई समस्या है ,या कमर में गैप है ,उन्हें सुप्त वज्रासन नहीं करना चाहिए। 




आप इस लेख में "सुप्त वज्रासन" के बारे में जान गए है। आप जल्द ही नियमित अभ्यास से इस आसन में महारथ हासिल कर पाएंगे। आपकी प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।   

Comments

  1. मुझे एड़ी पर रखकर ही नितंब रखकर सुप्त बजरासन हो पाता है! क्या यह सही है!

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