चक्रासन कैसे करे ,इसके क्या लाभ है ?

योगशास्त्र में चक्रासन का उल्लेख शरीर निरोगी रखने के लिए, एवं कुंडलिनी को सक्रीय तथा उर्ध्व करने के लिए किया गया है। आज हम जिस आसन के बारे में बताने  जा रहे है। उसका उपयोग हमारे शरीर के अंदर सोई हुयी कुंडलिनी शक्ति को जागृत करने के लिए खास रूप से किया जाता है। इस आसन का अभ्यास करते समय हमारे शरीर की रचना किसी चक्र की तरह दिखाई देती है ,इसीलिए यह आसन "चक्रासन" या Wheel Pose के नाम से जाना जाता है।






 Chakrasana Yoga | चक्रासन योग 

Chakrasana Yoga | चक्रासन योग






  1. चक्रासन का अभ्यास करने के लिए किसी स्वच्छ ,खुली जगह का चुनाव करे।
  2. सबसे पहले जमीन पर चटाई या आसन बिछाकर बैठ जाए।
  3. उसके बाद आराम से पीठ के बल लेटे।
  4.  पैरों में १ या डेढ़ फिट का अंतर लेकर, पैरों को घुटनो से मोड़कर ,पैर के तलवों को जमीन पर लगा कर रखे।
  5.  दोनों हाथों को अपने कंधों के पास ले जाकर ,हाथों को जमीन पर इस प्रकार से रखे की हाथों की उंगलिया आपके पैरों की दिशा में हो।
  6. एक लंबी श्वास लेकर हाथों और पैरों के सहारे अपने शरीर के बिच का हिस्सा (पेट और छाती ) को ऊपर उठाये।
  7. इस अवस्था में कम से कम १५ से २० सेकंड तक बने रहे।
  8. वापस सामान्य स्थिति में आ जाये।
  9. उपरोक्त क्रिया को ५-६ बार करे ,फिर धीरे धीरे अभ्यास नुसार समय को बढाए।
  10. चक्रासन का अभ्यास करते समय हमे अपना ध्यान अपनी नाभि या कमर के निचले हिस्से पर केंद्रित करना चाहिए।







Benefits Of Chakrasana Yoga | चक्रासन के लाभ 


  1.  चक्रासन को करने से शरीर में लचीलापन आता है। खून का संचार तेजी से होता है, जिससे शरीर के अंदर से टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते है।
  2. नियमित रूप से इस आसन का अभ्यास करने से शरीर की  रोगप्रतिकारक क्षमता बढ़ती है।
  3. मानव शरीर की सभी नाड़ियाँ मेरुदंड में मिलती है ,इसलिए इस आसन को करने से शरीर के अंदर की ७२४६० नाडियों का शुद्धिकरण होता है।
  4. इस आसन का अभ्यास करने से फेफड़े मजबूत बनते है। छाती चौड़ी होकर कमर को पतली एवं लचकदार बनाता है।जिससे कमर आकर्षक दिखती है।
  5. रोजाना चक्रासन का अभ्यास करने से टेढ़ी नाभि अपनी जगह पर आ जाती है।
  6. ये त्वचा एवं चेहरे की चमक को बढ़ाता है और वृद्धत्त्व को रोकता है।
  7. यह आसन पेट की चर्बी को दूर करके मोटापा दूर करता है ।
  8. प्लीहा ,जीर्ण ज्वर आदि विकारों को चक्रासन के नियमित अभ्यास से दूर किया जा सकता है।
  9. पेट के समस्त रोगो के लिए ये आसन किसी संजीवनी से कम नहीं । यह आसन शरीर में स्थित षट्चक्रों को प्रभावित करता है ,जिससे चक्र जागरण की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।







Precautions Of Chakrasana | चक्रासन में सावधानी 


  • महिलाये इस आसन को मासिक धर्म होने के बाद करे।
  • पहली बार चक्रासन को करते समय सावधानी एवं सजगतापूर्वक करे।
  • शरीर का भाग ऊपर उठाते समय गर्दन को एकदम ढीला न छोड़े।
  • चक्रासन की स्थिति में आ जाने पर ही गर्दन को ढीला छोड़े।
  • पहली बार इस आसन को योग्य शिक्षक की देखरेख में ही करे।
  •  चक्रासन करने से पहले आपका पेट और आतें पूरी तरह खाली होनी चाहिए।
  • इसका अभ्यास सुबह सूर्योदय के समय करना सबसे अच्छा है।
  • अगर आप शाम को इस आसन का अभ्यास करना चाहते है, तो आपके भोजन और अभ्यास के बिच में कम से कम ६ से ७ घंटे का अंतर होना आवश्यक है।





अब आप पूरी तरह चक्रासन का अभ्यास करने के लिए तैयार है। फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल या सुझाव हो तो आप कमेंट कर के पूछ सकते है।



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