तितली आसन कैसे करे ,जानिए इसके अद्भुत लाभ

 तितली आसन को  "Butterfly pose"  के नाम से भी जाना जाता है। योगशास्त्र में वर्णित मुख्य ८४ आसनों में से तितली आसन अपना एक विशेष स्थान रखता है। इस आसन का अभ्यास करते समय शरीर की रचना ,पंख फड़फड़ाती तितली की तरह हो जाती है।  देखा जाए तो सभी के लिए तितली आसन का अभ्यास लाभदायी है ,परंतु जो माताएं गर्भवती है ,या जिन्हे मासिक धर्म संबंधी  परेशानी होती है ,उनके लिए तितली आसन सकारात्मक परिणाम लेकर आता है।


Titali Asana (Butterfly Pose) - तितली आसन योग 

Titali Asana (Butterfly Pose) - तितली आसन योग



  1.  तितली आसन का अभ्यास करने के लिए स्वच्छ और हवादार वातावरण का  चुनाव स्वास्थ की दृष्टी से उत्तम माना जाता है।
  2. सबसे पहले निचे चटाई बिछाकर दंडासन  में (आगे की तरफ पैर फैलाकर) जमीन पर बैठ जाए। 
  3.  दोनों पैरों को घुटनो से मोडे और पैरों को अपने शरीर की दिशा में रखे। 
  4.  पैरों के पंजो को आपस में मिलाकर एड़ियों को  जितना पास ले जा सकते है ,उतना करीब ले जाए। 
  5.  दोनों हाथों को आपस में मिलाकर,पंजो से पैरों को पकड़ कर ,अपने दोनों हाथों की कोहनियों से घुटनों को दबाये। 
  6. इस स्थिति में ध्यान रहे की घुटनों को दबाते समय ज्यादा जोर जबरदस्ती ना करे। 
  7. अगर घुटने जमीन को स्पर्श कर रहे है तो अच्छी बात है ,और अगर स्पर्श ना हो तो कोई बात नहीं ,नियमित सराव से घुटने अपने आप जमीन को स्पर्श करने लगेंगे।  
  8. इस अवस्था में दोनों घुटनों को ऊपर निचे करे ,ठीक उसी प्रकार जिस तरह कोई तितली अपने पंखों को  फड़फड़ाती है। 
  9. इस अभ्यास को आप कम से कम ५ मिनट तक कर सकते है। 
  10. उपरोक्त अभ्यास को नियमित रूप से 20 से 25 बार कर सकते है।
  11. तितली आसन का अभ्यास करते समय अपने ध्यान को ,जाँघों के खिचाव पर केंद्रित करने का प्रयास करे।   



Health Benefits Of Titali Asana - तितली आसन के लाभ 



  1. लंबे समय तक  ध्यान करते हुए जब साधक के पैर  जमने लग जाते है ,तो उस अवस्था में साधक से तितली आसन का अभ्यास करवाया जाता है। 
  2. यह आसन उन लोगों के लिए भी फायदेमंद है जिन्हे निरंतर बैठकर कार्य करना पड़ता है। 
  3. इस आसन का नियमित अभ्यास करने से पैरों की मासपेशियां स्वस्थ और शक्तिशाली बनती है। 
  4. तितली आसन का नियमित अभ्यास  पैरों से संबंधित आगे के योगासनों को करने के लिए शरीर को सक्षम करता है। 
  5. जिन्हे हमेशा खड़े रहकर कार्य करना पड़ता है ,या हमेशा चलना पड़ता है ,उनके लिए भी यह आसन परम लाभकारी है। 
  6. गठिया ,जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं को तितली आसन दूर कर देता है। 
  7. अगर आप ध्यान का अभ्यास  करते समय ज्यादा देर तक बैठ नहीं पाते है ,तो तितली आसन के नियमित अभ्यास से आप अपनी बैठक के समय को बढ़ा सकते है। 
  8. तितली आसन गर्भवती स्त्रियों के लिए बहुत ही लाभकारी है । इसका नियमित अभ्यास प्रसव क्रिया को सरल बना देता है। 
  9. जिन माता और बहनों को मासिक धर्म संबंधित परेशानी रहती है ,उनके लिए भी तितली आसन फायदेमंद है।
  10. यह आसन मुत्रजन्य प्रणाली पर विशेष प्रभाव डालता है।  
  11. प्रतिदिन इसके अभ्यास से मूत्र तंत्र ठीक हो जाता है,एवं प्रजनन प्रणाली सुचारु रूप से कार्य करने लगती है।





Precautions For Titali Asana - तितली आसन में सावधानी



  • तितली आसन का अभ्यास करना बहुत ही लाभदायी क्रिया है ,परंतु  जिन्हे सायटिका ,कमर में दर्द है उन्हें इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए। 
  • इस आसन का अभ्यास आप अपने दैनिक योगासनों के साथ सुबह सूर्योदय के समय कर सकते है। 
  • गर्भवती महिलाओं को अपने डॉक्टर की सलाह लेकर ही इस आसन का अभ्यास करना चाहिए। 
  •  पैरों से संबंधित कोई समस्या या पैरों में जख्म आदि हो तो तितली आसन का अभ्यास ना करे। 
  • अभ्यास करते समय अगर घुटनो में दर्द होने लगे तो दर्द को कम करने के लिए आप कोई नरम मुलायम कपडा लेकर घुटनों के बिच रख  सकते है ,इससे दर्द नहीं होगा। 


 तितली आसन का अभ्यास कर आप आनंद का अनुभव कर सकते है। आशा करते है की आपको उपरोक्त लेख से "तितली आसन " "Butterfly pose" के बारे में आवश्यक जानकारी प्राप्त हो चुकी होगी । 



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