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रोज करें वृश्चिकासन योग मिलते है ये अद्भुत फायदे | Vrischikasana Yoga

 संस्कृत : वृश्चिकासन ,वृश्चिक - बिच्छु ,आसन - मुद्रा योग में वर्णित वृश्चिकासन एक उन्नत योगासन है। अंग्रेजी में इसे Scorpion Pose भी कहा ...

रोज करें वृश्चिकासन योग मिलते है ये अद्भुत फायदे | Vrischikasana Yoga

रोज करें वृश्चिकासन योग मिलते है ये अद्भुत फायदे | Vrischikasana Yoga

 संस्कृत : वृश्चिकासन ,वृश्चिक - बिच्छु ,आसन - मुद्रा

योग में वर्णित वृश्चिकासन एक उन्नत योगासन है। अंग्रेजी में इसे Scorpion Pose भी कहा जाता है। इस आसन का अभ्यास करने के लिए ,गहन संतुलन शक्ति और दृढ़ता की आवश्यकता पड़ती है। अगर कोई इस आसन को सही ढंग और एकाग्रता के साथ करता है। तो उसकी शरीर रचना बिच्छु की तरह दिखाई देने लगती है। इसके अभ्यास के लिए कंधो का स्वस्थ और मजबूत होना अत्यंत आवश्यक है।





Vrischikasana Yoga | वृश्चिकासन योग

Vrischikasana Yoga | वृश्चिकासन योग


  1. आसन का अभ्यास करने के लिए जमीन पर चटाई बिछाकर घुटनों के बल खड़े रहे।
  2. हाथों को सामने लाये और कोहनियों तक फर्श पर रखे।
  3. मस्तक को फर्श पर रखे और शीर्षासन की मुद्रा में आ जाए (दोनों हाथ एवं सर के सहारे पैरों को ऊपर ले जाए ) . रीढ़ की हड्डी एवं पैरों को सीधा करे।
  4. जब संतुलन पकड़ में आ जाए तो पैरों को घुटनों से मोड़ कर ९० डिग्री के कोण में लाये।
  5. घुटनों से लेकर तलवों तक का भाग सीधा रखे।
  6. दोनों पैरों की उँगलियों को सामने की और इंगित करे।
  7. अब संतुलन बनाते हुए सिर को ऊपर उठाये और सामने की तरफ देखने का प्रयत्न करे।
  8. जितने समय तक आप इस अवस्था में आरामदायक पाते है ,उतनी देर इस मुद्रा में बने रहे।
  9. श्वास छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में आ जाए।
  10. इस आसन को करते समय ध्यान को नासिका के अग्रभाग पर या भृकुटि पर लगाना चाहिए।












Vrischikasana Benefits | वृश्चिकासन के लाभ

Vrischikasana Benefits | वृश्चिकासन के लाभ


  1. यह चर्बी घटाने के लिए एक अच्छा आसन है।
  2. इसके अभ्यास से अतिरिक्त वसा दूर होकर शरीर हल्का महसूस होने लगता है।
  3. नियमित अभ्यास से पीठ और कंधों की मासपेशियो को मजबूती प्रदान करता है।
  4. यह हिप्स को खोलने एवं छाती और कंधों को विस्तारित करने में मदद करता है।
  5. इसके अभ्यास से रक्तपरिसंचरण तेज होता है। 
  6. ह्रदय की गति को बढ़ाकर खून को शुद्ध करने में सहायक है। 
  7. मस्तिक्ष को विकसित कर एकाग्रता क्षमता में सुधार करता है।
  8. धारणा शक्ति को बलवान बनाता है। 
  9. मेरुदंड को मजबूत एवं लचीला बनाता है।
  10. फेफड़ों की कार्यक्षमता में बढ़ोतरी करता है।
  11. त्वचा को चमकदार और तेजस्वी बनाता है।
  12. आँखों को तेज करता है।
  13. बालों का असमय सफ़ेद हो जाना ,बालों का झड़ना इत्यादि समस्याओं को ठीक करता है।
  14. इसका नियमित अभ्यास व्यक्ति में सहनशीलता का विकास करता है।










Beginner Tips | शुरुवात के लिए टिप्स


  • शुरुवाती लोगों को इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  • पहली बार इसका अभ्यास करते समय दीवार का सहारा लेना सबसे अच्छा निर्णय है।
  • इस आसन का अभ्यास तभी किया जा सकता है ,जब आप अपने शरीर को संतुलित करने में सक्षम हो। इसलिए वृश्चिकासन का अभ्यास शुरू करने से पहले शीर्षासन में महारथ हासिल कर लेनी चाहिए।
  • यह आसन उन लोगों को कठिनाई दे सकता है ,जो मोटापे से ग्रसित है। इसमें पारंगत होने के लिए रीढ़ की हड्डी लचीली और मजबूत होना आवश्यक है।
  • पहली बार इसका अभ्यास करने के लिए ४ से ५ हफ़्तों तक ,केवल दीवार के सहारे शरीर को ऊपर उठाने कोशिश करे।
  • अभ्यास करते समय चोट से बचने के लिए, आप अपने निचे किसी मुलायम कंबल को रख सकते है।










Vrischikasana Precautions | वृश्चिकासन में सावधानी



  •  इस आसन का अभ्यास गंभीर हृदयरोग से पीड़ित होनेपर ना करे।
  • माहवारी के समय या गर्भावस्था में इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  • कंधे ,जांघ ,नितंब ,कमर ,मेरुदंड (रीढ़ की हड्डी) की चोट या गंभीर समस्या से पीड़ित होनेपर भी वृश्चिकासन ना करे।
  • गंभीर उच्च रक्तचाप की समस्या से पीड़ित लोगों को इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  • अगर आप पहली बार इसका अभ्यास करते है तो किसी योग्य गुरु या विशेषज्ञ की देखरेख में करे। जो आपको बता सके की आप शारीरिक एवं मानसिक रूप से इस आसन के लिए तैयार है या नहीं।










Things You Need To Know | ध्यान देने योग्य बाते





  • सुबह ब्रम्हमुहर्त का समय कसरत या योगासनों के लिए अच्छा माना जाता है।
  • इस आसन का अभ्यास खाली पेट करना चाहिए।
  • अगर आप शाम के समय इसका अभ्यास करना चाहते है ,तो भोजन और अभ्यास के बिच १० घंटे का समय रखना अनिवार्य है




इस लेख में मैंने आपको  "Vrischikasana Yoga" की पर्याप्त जानकारी दी।  नियमित अभ्यास के द्वारा ही इस आसन को साधा जा सकता है। देखा जाए, तो ये आसन व्यक्ति की दृढ़ता ,मजबूती ,धैर्य ,और संतुलन की परख करता है। आप आपने विचार या सवाल कमेंट बॉक्स में लिख सकते है। इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना भूले।
त्राटक क्रिया से होगा संमोहन शक्ति का जागरण | Tratak Kriya

त्राटक क्रिया से होगा संमोहन शक्ति का जागरण | Tratak Kriya

Tratak Kriya योगसाधना के प्रमुख आठ अंग है ,यम,नियम,आसन,प्राणायाम,प्रत्याहार ,ध्यान ,धारणा और समाधी। "त्राटक क्रिया"  ध्यान अभ्यास की क्रिया है ,षट्कर्म यानि हठयोग क्रियाओं में हमें "Tratak Kriya "का उल्लेख देखने को मिलता है।

इस क्रिया में किसी एक वस्तु की तरफ एकटक देखकर ,उस वस्तुपर अपना ध्यान केंद्रित करना होता है। इस क्रिया को करने से ,व्यक्ति में एकाग्रता क्षमता विकसित होकर संमोहन शक्ति का जागरण होता है। इसका अभ्यास किसी भी ध्यानात्मक आसन में बैठकर किया जा सकता है ,जैसे पद्मासन ,वज्रासन ,सुखासन इत्यादि। योगशास्त्र के अनुसार किसी सूक्ष्म वस्तु की तरफ, बिना अपनी आँखों को झपके ,आँखों से पानी निकलने तक देखते रहना ही "त्राटक विधि" कहलाती है। त्राटक विधि के निरंतर अभ्यास से कुंडलिनी जागरण में भी मदत मिलती है ,तथा इसका अभ्यास किसी शांत और मनभावन वातावरण में करना ही अधिक लाभकारी होता है।



  • ऐसा जरुरी नहीं की इस क्रिया को केवल दीपक की ज्योति पर ही किया जाए ,अपितु आप इसका अभ्यास किसी वस्तु या बिंदु के साथ और कहींपर भी कर सकते है। जब आपकी 'त्राटक साधना' सिद्ध हो जाए तो आप इसका अभ्यास उगते हुए सूरज या रात्रि की चांदनी पर ध्यान केंद्रित करके भी कर सकते है।





Tratak Kriya Steps - त्राटक अभ्यास की विधि

Tratak Kriya Steps - त्राटक अभ्यास की विधि




  1.  त्राटक क्रिया का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले किसी ध्यानात्मक आसन में बैठ जाए।
  2.  अपने से ४ हाथ दुरी पर ,उस वस्तु को रखे जिस पर आप ध्यान केंद्रित करना चाहते है।
  3. अगर आप दीपक या मोमबत्ती का प्रयोग करना चाहते है तो दीपक में शुद्ध घी का इस्तेमाल करे। 
  4. आप अगर किसी बिंदु पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहते है,तो छोटे १ रूपया का सिक्का लेकर ,उसके आकार जितना ही हरे या काले रंग का बिंदु बना ले और इसे ठीक अपने सामने दीवार पर चिपका दे।
  5. पद्मासन में बैठकर उस बिंदु की और बिना पलक  झपकाए देखें , अगर आपके सामने दीपक या मोमबत्ती है तो उसके ज्योति पर अपनी आखें टिकाये।
  6. जबतक आपकी आँखों से पानी ना आये तबतक आपको उस ज्योति पर ध्यान को केंद्रित करके रखना है।
  7.  जब आपको ऐसा लगे की पानी आनेवाला है, तो तुरंत अपनी आखों को बंद करके ,अपने दोनों हाथो के पंजो को रगड़कर , दोनों हाथों से, आँखों को धीरे धीरे सहलाये।
  8. शुरुवात में जब आप इसका अभ्यास करेंगे तो आपका मन आपको भटकाने की कोशिश करेगा ,आपको ज्योति के आसपास प्रकाश या अलग अलग ज्योतियाँ दिखाई देगी।
  9. परंतु आपको अपना ध्यान केवल उसी ज्योति पर बनाये रखना है ,जिसपर आप पहले से ध्यान केंद्रित कर रहे है।
  10. इसका निरंतर अभ्यास करने के बाद जब आपको केवल एक ही ज्योति या बिंदु दिखाई देने लगे, तो समझ लीजिये की आपका त्राटक सिद्ध हो चूका है।








Health Benefits Of Tratak - त्राटक क्रिया के लाभ


  1. शांभवी मुद्रा जिसे भगवान शिव की मुद्रा माना जाता है ,वो त्राटक क्रिया का अभ्यास करने से स्वयं सिद्ध हो जाती है।
  2. आँखों से संबंधित समस्त विकार त्राटक का नियमित अभ्यास करने से दूर हो जाते है।
  3. इस क्रिया को करने से धारणा शक्ति का विकास होकर एकाग्रता क्षमता बढ़ती है।
  4. आँखों की रोशनी बढ़ाने के लिए त्राटक रामबाण की तरह काम करता है।
  5. त्राटक क्रिया पूर्ण सिद्ध होने के बाद संमोहन शक्ति का जागरण होता है।
  6. जिससे साधक समय पड़ने पर किसी भी जिव को वशीभूत कर ,अपने आधीन कर लेता हैं।







Precautions For Tratak Technique - त्राटक में सावधानी 

  • त्राटक का अभ्यास करने के लिए कभी भी केरोसिन का उपयोग या लाइट का उपयोग ना करे।
  • इसे केवल दीपक ,मोमबत्ती ,बिंदु या अपने इष्ट देवता के चित्र पर ही करे।
  • इसके अभ्यास के लिए ब्रम्हमुहूर्त या मध्यरात्रि का समय अधिक फलदायी रहता है।




आशा करता हूँ की आप "Tratak Kriya "  के सकारात्मक फायदों के बारे में जान चुके हैं।  त्राटक एक रसायन हैं जिसका कोई तोड़ नहीं ,खासकर अगर आप एक विद्यार्थी हैं ,तो इसका अभ्यास आपकी बौद्दिक क्षमता को उच्चतम शिखर पर पहुंचाने में सक्षम हैं। इस जानकारी को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें।
गुप्तरोगों से बचना चाहते है ,तो रोज करें उर्ध्व पद्मासन का अभ्यास | Urdhava Padmasana

गुप्तरोगों से बचना चाहते है ,तो रोज करें उर्ध्व पद्मासन का अभ्यास | Urdhava Padmasana

संस्कृत : उर्ध्व पद्मासन ,उर्ध्व - ऊपर की ओर ,पद्म -कमल ,आसन - मुद्रा

योग में वर्णित 'उर्ध्व पद्मासन' एक उन्नत योगासन है। इसका अभ्यास करते समय शरीर को पूर्ण रूप से कंधो के सहारे संतुलित कर पद्मासन का अभ्यास करना पड़ता है। शुरुवात में योगी हलासन और सर्वांगासन में महारथ पाने के बाद ही इस आसन का अभ्यास करता है। सर्वांगासन या हलासन के अभ्यास से पूर्व अगर इस आसन का अभ्यास किया जाता है ,तो यह साधक के लिए कठिनाईया उत्पन्न कर देता है।  




Urdhva Padmasana | उर्ध्व पद्मासन

Urdhva Padmasana | उर्ध्व पद्मासन




  1. उर्ध्व पद्मासन का अभ्यास किसी शांत और खुली जगह करना चाहिए। जमीन पर चटाई बिछाकर पीठ के बल लेट जाए।
  2. श्वास लेते हुए दोनों पैरों को ऊपर उठाये और उँगलियों को सर के ऊपर टिकाये।
  3. इस अवस्था में घुटनों को सीधा रखे, आप सहारे के लिए हाथों को पीठ के पीछे ले जा सकते है। योग में यह आसन हलासन के नाम से जाना जाता है। कुछ देर बाद पुनः सामान्य अवस्था में आ जाए।
  4. दोनों पैरों को ऊपर उठाये, संतुलन बनाने के लिए हाथों का सहारा ले।
  5. शरीर का वजन अपने दोनों कंधों और हाथों पर विभाजित कर दे। जब आप अपने आप को इस अवस्था में संतुलित पाए ,तो दोनों पैरों से पद्मासन लगाए।
  6. आप चाहे तो हाथों को पीठ के अलावा दोनों घुटनों पर रख सकते है।
  7. इस स्थिति में जितनी देर रुकना संभव हो उतनी देर बने रहे। अभ्यासानुसार समय अवधि को १ मिनट तक ले जाए।
  8. आसन का अभ्यास करते समय श्वास गति सामान्य बनाये रखे ।
  9. इस आसन का अभ्यास करते समय अपना ध्यान नाक के अग्र भाग या विशुद्ध चक्र पर केंद्रित करना चाहिए।














Urdhva Padmasana Benefit | उर्ध्व पद्मासन के लाभ

Urdhva Padmasana Benefit | उर्ध्व पद्मासन के लाभ




  1. उर्ध्व पद्मासन के नियमित अभ्यास से रक्त संचार मस्तिक्ष की ओर होने लगता है। 
  2. यह संपूर्ण शरीर को लचीला ,शक्तिशाली एवं संतुलित रखता है।
  3. जठराग्नि को प्रदीप्त कर पाचन शक्ति को बढ़ाता है।
  4. वात ,पित्त एवं कफ को नियंत्रित रखता है।
  5. कमर और कंधो को मजबूती प्रदान करता है।
  6. रोजाना इस आसन का अभ्यास शरीर और आत्मा के प्रति सजगता को बढ़ाता है।
  7. ध्यान साधक एवं जो ध्यान का अभ्यास करना चाहते है ,उनके लिए यह लाभदायी आसन है।
  8. मानसिक उत्तेजना को शांत कर स्मरणशक्ति और एकाग्रता क्षमता को बढ़ाता है।
  9. रुसी ,असमय बालों का सफ़ेद होना इत्यादि रोगों से बचाता है।
  10. पीनियल एवं पिट्यूटरी ग्रंथि को प्रभावित कर थॉयरॉइड को नियंत्रित करता है।
  11. तनाव ,अवसाद ,माइग्रेन  को दूर करने में सहायक है।
  12. शारीरिक रचना में सुधार कर मोटापा घटाने में सहायक है।
  13. यह आसन प्राणों को उर्ध्व बनाता है। नवयुवक एवं विद्यार्थियों को इस आसन का लाभ अवश्य लेना चाहिए।
  14. ये ब्रम्हचर्य को बनाये रखता है।
  15.  स्वप्नदोष ,रक्तदोष एवं वीर्यविकारों से मुक्ति दिलाता है।
  16. मस्तिक्ष को मेधावी एवं ओजस्वी बनाता है।











Beginner Tips | शुरुवात के लिए टिप्स



  • शुरुवात में इसका अभ्यास करते समय आप कंधों के निचे किसी मुलायम गद्दे या कंबल का प्रयोग करे।
  • संतुलन बनाने में कठिनाई महसूस होनेपर १-२ हफ़्तों तक दीवार के सहारे सर्वांगासन का अभ्यास करे।
  • पैरों को ऊपर ले जाने के बाद पद्मासन लगाने में मुश्किल होनेपर ,पद्मासन की जगह सुखासन  का अभ्यास करे।









Some Things You Need To Know | ध्यान रखने योग्य बाते



  • इस  आसन का अभ्यास खाली पेट करना आवश्यक है। बेहतर होगा अगर आप इसे सुबह सूर्योदय के समय करे। सुबह के समय दिमाग शांत और पेट खाली रहता है ।
  •  आप चाहे तो इसे शाम के समय भी कर सकते है ,बस अपने भोजन और अभ्यास के बिच ५ से ६ घंटे का अंतर् छोड़ना याद रखे।










Urdhva Padmasana Precautions | उर्ध्व पद्मासन में सावधानी



  • इस आसन का अभ्यास करने से पहले सर्वांगासन एवं हलासन में पारंगत होना आवश्यक है। इन आसनों के बिना किया गया अभ्यास कठिनाई दे सकता है।
  • मेरुदंड से जुडी कोई समस्या होनेपर इसका अभ्यास करने से बचे।
  • इसके अलावा तीव्र सिरदर्द ,कमर में परेशानी या उच्च रक्तचाप से पीड़ित व्यक्तियों को इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  • ह्रदय संबंधित परेशानी होनेपर अपने चिकित्स्क (डॉक्टर) की सलाह लेकर ही आसन का अभ्यास करे।
  • ४५ की उम्र के बाद इस आसन को नहीं करना चाहिए।
  • पहली बार इसका अभ्यास किसी प्रमाणित योग प्रशिक्षक या किसी साथी के सानिध्य में करे।







ऊपर आपने "Urdhva Padmasana" के बारे में पढ़ा। क्या यह जानकारी आपको उपयुक्त लगती है ? अपनी प्रतिक्रिया कमेंट बॉक्स में जरूर दे। साथ ही इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ शेयर करना ना भूले। उर्ध्व पद्मासन का अभ्यास मुश्किल प्रतीत होता है। पर नियमित अभ्यास से इसे साधा जा सकता है। इसे अपने दैनिक योगसत्र में शामिल करना एक अच्छा निर्णय साबित हो सकता है। क्योंकि मनुष्य जीवन का अधिकांश भाग ,उसके स्वयं के किये गए अच्छे या बुरे निर्णयों पर ही निर्भर करता है।
गरुड़ासन योग से बढ़ेगी आँखों की रोशनी और भी है फायदे | Garudasana Yoga

गरुड़ासन योग से बढ़ेगी आँखों की रोशनी और भी है फायदे | Garudasana Yoga

योग विज्ञानं में सबसे ज्यादा जोर शरीर को लचीला बनाने में दिया गया है।  शरीर लचीला होने से , अनेक स्वास्थ लाभ प्राप्त होते है।  जैसे जैसे शरीर लचीला बनता जाएगा, वैसे वैसे आपके शरीर में रक्तसंचार नियमित रूप से होने लगता है , जिससे आप अपने शरीर को बिमारियों से बचा सकते है. योग में किसी एक ही अवस्था में  निरंतर रहने की स्थिति को आसन कहा गया है। इस संसार में जितने भी पशु ,पक्षी ,पेड़ ,पौधे है ,उन सबसे प्रेरणा लेकर हमारे महर्षियों ने अलग अलग प्रकार के आसन बनाये। जिससे हम रोगमुक्त और अच्छा जीवन व्यतीत कर सके।  जैसे धनुष्य से बना धनुरासन , बिल्ली से मार्जरासन ,मस्तक से शीर्षासन , ठीक उसी प्रकार गरुड़ से गरुड़ासन बनाया गया।  जैसे गरुड़ सबसे तेज उड़ान भरता है ,वैसे ही इस आसन को करनेवाला कभी पीछे नहीं रहता , इसका अभ्यास कोई भी किसी भी उम्र का व्यक्ति कर सकता है।  बच्चो से लेकर बूढ़ों तक सबके लिए ये आसन फयदेमंद है।  





Garudasana Yoga | गरुड़ासन योग

Garudasana Yoga | गरुड़ासन योग


  1. इस आसन को करने के लिए किसी स्वच्छ और हवादार स्थान का चुनाव करना चाहिए।  इसे बंद कमरे में ना ही करे तो अच्छा है , अगर आप इसे किसी नदी या तालाब के किनारे करेंगे तो आपके लिए  ये बहुत ही अच्छा होगा।  
  2. सर्वप्रथम अपने स्थान पर चटाई बिछाकर खड़े हो जाए। 
  3. अब अपने दोनों पैरो के पंजो को मिलाकर सावधान हो जाए। 
  4. अपना बायाँ पैर सीधा रखते हुए ,अपने दाए पैर को उठाकर ,बाएं पैर से इस तरह लपेटे जैसे किसी वृक्ष पर साप लपेट जाता है।
  5. इसी स्थिति में बने रहे अब दोनों हाथों को अपने सामने लाकर हाथों को भी बिलकुल उसी प्रकार लपेटे जैसे पैर को लपेटा था। 
  6. अपने हाथो को थोड़ा आगे झुकाने की कोशिश करे , अब आपके हाथो का आकर बिलकुल गरुड़ के चोंच की तरह दिखने लगेगा। 
  7. इसी स्थिति में बने रहते हुए अपने बाएं पैर के घुटने को जमीन पर लगाने की कोशिश करे। और अपना दाया पैर जमीन से सटाकर रखे। 
  8. इस अवस्था में १ मिनट तक बने रहे। अब फिरसे सामान्य स्थिति में आकर इसी क्रिया को अपने दूसरे पैर से भी करे। 
  9. नियमित इस आसन को ५-५ बार करे।  
  10. रोजाना अभ्यास होने पर थोड़ा थोड़ा समय बढ़ाये। 
  11. गरुड़ासन के बाद शीर्षासन का अभ्यास लाभकारी होता है। 








Health Benefits of Garudasana Yoga | गरुड़ासन के लाभ

 

  1. गरुड़ासन करने से शरीर लचीला होकर मासपेशिया चुस्त और बलवान होती है।  
  2. गरुड़ासन के नियमित अभ्यास से मेरुदंड (रीढ़ की हड्डी ) मजबूत और लचीली बनती है। 
  3. यह आसन कमर को पतली और सुन्दर बनाता है।  
  4. नियमित इस आसन का अभ्यास बाहें और पैरो की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। 
  5. रोजाना गरुड़ासन का अभ्यास करने से आँखे गरुड़ की भाती तेज होकर , आँखों के समस्त विकार दूर होते है। 
  6. गरुड़ासन से धारणा शक्ति का विकास होकर एकाग्रता क्षमता और स्मरणशक्ति में वृद्धि होती है।  
  7. इस आसन  को करने से विशेष बल की प्राप्ति होती है और शरीर का कंपन करने जैसी समस्याओ से मुक्ति दिलाता है। 
  8. बवासीर , हर्निया , मूत्ररोग जैसी समस्याओ में गरुड़ासन रामबाण है।
  9. संतानहीनता , समस्त गुप्तरोग जैसी समस्याएं दूर होकर वीर्य को मजबूती प्रदान करता है।
  10. त्वचा संबंधी रोग दूर होकर त्वचा को चमकदार बनाता है। 









गरुड़ासन का अभ्यास करने से पहले इन बातों का ध्यान रखे  | Know Everything About Garudasana 



  • गरुड़ासन का अभ्यास करने से पहले आपका पेट पूरी तरह खाली होना चाहिए। 
  • इस आसन को करने के लिए सुबह सूर्योदय का समय सबसे अच्छा है। 
  • आप शाम के समय भी इस आसन का अभ्यास कर सकते है। 
  • शाम के समय जब आप इस आसन का अभ्यास करे तो ध्यान रखे की भोजन और अभ्यास में कम से कम ६ से ७ घंटे का अंतर हो। 








Precautions Of Garudasana - सावधानी

  • शुरवाती समय में आसन करते समय जोर जबरदस्ती से ना करे। 
  •  धीरे धीरे आप इस आसन को कर सकते है।
  •  गर्भवती महिलाये इस आसन का अभ्यास ना करे। 








अब आप "Garudasana Yoga "  के बारे में जान गए है   फिर भी अगर कोई सवाल हो तो आप कमेंट कर के पूछ सकते है।
शलभासन योग हैं गंभीर बीमारियों का काल रोजाना करे अभ्यास | Shalabhasana Yoga

शलभासन योग हैं गंभीर बीमारियों का काल रोजाना करे अभ्यास | Shalabhasana Yoga

Shalabhasana Yoga संस्कृत : शलभासन , शलभ - टिड्डी ,आसन - मुद्रा

योग में वर्णित शलभासन एक सरल योगासन है। शलभ या टिड्डी एक कीड़ा है ,जो मुख्यतः घास पर पाया जाता है। इस आसन का अभ्यास करते समय व्यक्ति  की रचना  ' टिड्डी किटक ' के समान दिखाई देती है ,इसीलिए यह शलभासन के नाम से जाना जाता है।  इसका अभ्यास मेरुदंड में एक अच्छा खिंचाव पैदा कर मांसपेशियों को मजबुत बनाता है। 


Shalabhasana Yoga  | शलभासन योग

Shalabhasana Yoga  | शलभासन योग




  1. इस आसन का अभ्यास किसी शांत और स्वच्छ जगह पर करे।
  2. जमीन पर चटाई बिछाकर पेट के बल लेट जाए।
  3. दोनों हाथों को जाँघों के निचे फर्श से सटाकर रखे।
  4. एक लंबी गहरी श्वास लेते हुए, दोनों पैरों  को घुटनों से बिना मोड एकसाथ हवा में ऊपर उठाये।
  5. इस स्थिति में शरीर का पूरा वजन आपकी निचले हिस्से की पसलियों तथा पेट पर पड़ता है।
  6. कम से कम १ मिनट तक इस मुद्रा में रुकने का प्रयत्न करे।
  7. कुछ देर रुकने के बाद श्वास छोड़ते हुए पैरों को निचे लाये, और शरीर को आराम दे।
  8. कुछ देर विश्राम के बाद पुनः इस क्रिया को दोहाराये। दिनभर में आप इस आसन का अभ्यास ४ से ५ बार कर सकते है।






Shalabhasana Benefits | शलभासन के लाभ





  1. नियमित रूप से इस आसन का अभ्यास संपूर्ण शरीर को सक्रिय और तरोताजा करता है।
  2. इसका अभ्यास शरीर में  रक्त संचालन को बढ़ाता है।
  3. खून को परिशुद्ध कर रोगप्रतिकारक क्षमता का विकास करता है।
  4. इसका अभ्यास हाथ ,कंधे ,जांघ ,एवं कूल्हों की मांसपेशियों को मजबूती  प्रदान करता है।
  5. शरीर के आंतरिक अंगों की मालिश कर उन्हें सक्रीय करता है।
  6. यह आपकी शारीरिक रचना में सुधार लाने के लिए बेहतरीन आसनों में से एक है।
  7. यह छाती को चौड़ा एवं फेफड़ों को मजबूत बनाता है।
  8. पीठदर्द से होनेवाली परेशानियों से राहत दिलाता है।
  9. इसके नित्य अभ्यास से चयापचय संस्था नियंत्रित और स्वस्थ बनी रहती है।
  10. हार्मोन्स संबंधित समस्याओं को दूर कर उन्हें नियंत्रित रखने में मदद करता है।
  11. इसका नियमित अभ्यास थॉयरॉइड को दूर रखने में सहायक है ।
  12. ह्रदय को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाता है।
  13. शारीरिक तथा मानसिक संतुलन में वृद्धि करता है।
  14. यह दिमाग को तनावरहित एवं शांत बनाये रहता है।
  15. अवसाद ,डिप्रेशन ,चिंता को दूर कर स्मरणशक्ति  में बढ़ोतरी करता है।
  16. त्वचा को चमकदार बनाता है।
  17. अत्यधिक चर्बी को दूर कर वजन घटाने में सहायक है। 
  18. बालों की समस्याएं ,असमय बालों का सफ़ेद होना रोकता है।
  19. गले के अधिकतर रोग ख़त्म करता है।
  20. थकान ,अनिद्रा ,भय ,इत्यादि मानसिक विकारों का शमन करता है।
  21. यह उत्साह ,निर्भयता ,कठोरता ,सहनशीलता जैसे भावों को जगाता है।









Shalabhasana Precautions | सावधानी 


  • गर्दन या मेरुदंड पर गंभीर चोट या अन्य समस्या होनेपर इस आसन को ना करे।
  • यह आसन गर्भवती स्त्रियों के लिए नहीं है।
  • गंभीर सिरदर्द या माइग्रेन से पीड़ित होनेपर इसका अभ्यास ना करे।













Beginner Tips | शुरू करने के लिए टिप्स



  • पहली बार इस आसन का अभ्यास किसी मुलायम चटाई या कंबल पर करना चाहिए।
  • शुरुवाती समय में संतुलन बनने तक अपने किसी साथी या गुरु के सानिध्य में इसका अभ्यास करे।









Some Points You Need To Know | ध्यान रखने योग्य बाते


  • इस आसन का अभ्यास खाली पेट करे।
  • सुबह सूर्योदय के समय इसका अभ्यास करने के लिए उपयुक्त माना जाता है।
  • आप शाम के समय भी इस आसन का अभ्यास कर सकते है। बस आपको भोजन और अभ्यास के बिच कम से कम ५ घंटे का समय छोड़ना आवश्यक है।





अब आप " Shalabhasana Yoga" के बारे में जान चुके हैं ,नियमित रूप से किया गया शलभासन का अभ्यास आपके जीवन में स्वास्थ रूपी अनमोल खजाना लाने में सक्षम हैं। इसलिए आज से ही अपने दैनिक योगक्रम में शलभासन को स्थान दे। 
जानकारी पसंद आनेपर इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना भूले। 
कुर्मासन योग से पाए कई बीमारियों से छुटकारा , दिमाग रहेगा शांत | Kurmasana Yoga

कुर्मासन योग से पाए कई बीमारियों से छुटकारा , दिमाग रहेगा शांत | Kurmasana Yoga

 कुर्मासन  एक उन्नत योगासन है। संस्कृत नाम : कुर्मासन ,कुर्मा - कछुआ ,आसन - मुद्रा होता है। इसका अभ्यास व्यक्ति को मानसिक शांति प्रदान करता है। 

योग में वर्णित कुर्मासन का अभ्यास करते समय, व्यक्ति की मुद्रा कछुए के समान दिखाई देती है। इसका अभ्यास आपको बाहरी तनाव एवं चिंताओं को काटकर ,आतंरिक शांति की भावना प्रदान करता है। कछुए को संयम का प्रतिक माना जाता है। इस योगासन का अभ्यास आपको शारीरिक एवं मानसिक रूप से संयमित और स्थिर रखने में मदद करता है।





Kurmasana Yoga | कुर्मासन योग

Kurmasana Yoga | कुर्मासन योग



  1. जमीन पर चटाई बिछाकर पैरों को सामने फैलाकर बैठ जाए।
  2.  दोनों हाथों को कूल्हों के पास फर्श पर टिका दे।
  3. मेरुदंड को सीधा रखे और जांघों को जमीन पर दबाये।
  4. एक लंबी और गहरी श्वास ले। दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर कूल्हों के पास लाये।
  5. धड़ को आगे ले जाए और दोनों हाथों को ,पैरों के निचे ले जाए।
  6. इसी स्थिति में आगे बढ़ते जाए ,आसानी के लिए पैरों को आगे फैलाते जाए।
  7. कंधो पर खिचाव महसूस करे। आगे बढ़ते हुए धड़ को फर्श पर रख दे। अपनी भुजाओं को जितना हो सके फैलाने की कोशिश करे।
  8. मस्तक को जमीन पर रख दे और कुछ देर इसी अवस्था में बने रहे।
  9. कम से कम ४० सेकंड इस अवस्था में रुकने के बाद पुनः सामान्य स्थिति में आ जाए।









Kurmasana Benefits | कुर्मासन के लाभ

  1. इसके नियमित अभ्यास से आप प्राकृतिक और नियमित श्वास लेते है ,जिससे कई बीमारिया अनायास ही समाप्त हो जाती है।
  2. ये आपकी शारीरिक रचना में सुधार करने के लिए बेहतरीन आसन है।
  3. इससे पाचन प्रणाली तंदरुस्त बनी रहती है।
  4. यह कब्ज ,अपच ,अम्लता ,गैस ,अकड़न ,भूक न लगना ,मोटापा ,थकान ,कमजोरी ,अनिद्रा को दूर करने में सहायक है।
  5. इससे फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार होता है,ये अस्थमा जैसे शवनविकारों को दूर करता है। 
  6. इसके अभ्यास से शुद्ध खून मस्तिक्ष की और बहने लगता है।
  7. ये स्मरणशक्ति को बढ़ाता है ,और धारणा शक्ति को बलवान बनाता है।
  8. इसका नियमित अभ्यास आपके जांघ ,कूल्हे ,कंधे एवं पीठ की मांसपेशियों को फैलाता है।
  9. ये आसन मस्तिक्ष को ध्यान साधना के लिए तैयार करता है।
  10. शरीर की अरबों खरबों पेशियों को फ्रेश करता है और शरीर को तरोताजा रखता है।
  11. ये आसन त्वचा संबंधी बीमारियों में लाभकारी है।
  12.  गर्भाशय ग्रीवा से पीड़ित रोगियों के लिए अच्छा आसन है।
  13. नियमित कुर्मासन का अभ्यास व्यक्ति में उत्साह ,साहस ,कठोरता ,सहनशीलता ,एकाग्रता एवं शांति को उजागर करता है।









Beginner Tips |  टिप्स



  • कुर्मासन उन्नत अवस्था का योगासन है। इसमें महारथ हासिल करने के लिए धैर्य रखना आवश्यक है।
  • समय के साथ साथ आप इसमें पारंगत हो सकते है। इसके लिए आपको नियमित और सावधानीपूर्वक अभ्यास करना आवश्यक है।
  • अगर आप शुरुवात में ही इसका अभ्यास करना चाहते है, तो आपको शारीरिक पीड़ा का सामना करना पड़ सकता है।
  • पहली बार इसका अभ्यास करते समय, आप अपने पैरो के निचे कोई मुलायम कंबल या तकिया रख सकते है।  







Kurmasana Precautions | कुर्मासन में सावधानी



  • यह एक कठिन योगासनों में से एक आसन है। इसमें पारंगत होने के लिए आपको अपने शरीर को इसके लिए पूरी तरह सक्षम बनाना होगा।
  • गठिया एवं कटिस्नायुशील जैसी बीमारियों में इस आसन को ना करे।
  • इसे माहवारी और गर्भावस्था के दौरान भी नहीं करना चाहिए।
  • हाथ ,पैर ,कंधे एवं पीठदर्द से पीड़ित होनेपर इस आसन को ना करे।
  • गंभीर पीठदर्द या पेट की सर्जरी या समस्या होनेपर भी इस आसन से बचना चाहिए।










Things You Need To Know | ध्यान रखने योग्य बाते





  • इस आसन का अभ्यास सुबह ब्रम्हमुहर्त में करना शुभ परिणाम देता है।
  • आप चाहे तो इसे शाम के समय भी कर सकते है। बस आसन करते समय आपका पेट खाली होना आवश्यक है।
  • इसके लिए भोजन और अभ्यास के बिच कम से कम ६ घंटे का समय जरूर रखे।









इस लेख में मैंने आपको Kurmasana Yoga के बारे में बताया। कुर्मासन का नियमित अभ्यास आपको कई सारी परेशानियों से बचाता है ,आवश्यक है इसे योग्य गुरु के सानिध्य में करने की। किसी भी योगासन या प्राणायाम का अभ्यास शांत और निवांत स्थान पर करना उपयुक्त होता है। जहा आपको प्राकृतिक शांति का अनुभव हो।

रोजाना उत्कटासन का अभ्यास करेंगे तो दूर रहेंगी ये बीमारियां | Utkatasana Yoga

रोजाना उत्कटासन का अभ्यास करेंगे तो दूर रहेंगी ये बीमारियां | Utkatasana Yoga

संस्कृत : उत्कटासन ,उत्कट - जंगली ,आसन - मुद्रा
योग में वर्णित उत्कटासन एक प्रभावी योगासन है। इसे कुर्सी आसन या Chair Pose Yoga भी कहा जाता है। भले ही यह सरल आसन दिखाई दे ,पर इसका अभ्यास करना एक चुनौती पूर्ण कार्य है। किसी कुर्सी पर बैठना कोई कठिन कार्य नही है। पर इस आसन का अभ्यास करते समय बिना किसी कुर्सी के ,केवल काल्पनिक कुर्सी पर बैठना पड़ता है। इसीकारण यह कुर्सी आसन के नाम से विख्यात है। 



Utkatasana Yoga | उत्कटासन योग

Utkatasana Yoga | उत्कटासन योग


  1. निचे चटाई बिछाकर पैरों में अंतर लेकर खड़े हो जाए।
  2. हाथों को ऊपर ले जाए और जोड़ दे।
  3. दोनों हाथों को कोहनियों से मोड़े बिना सीधा बना के रखे।
  4. पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए कूल्हों को निचे की और ले आये। जैसे आप किसी कुर्सी पर बैठे है।
  5. निचे आते  समय मेरुदंड ,छाती और गर्दन को सीधा बनाये रखे। इसी स्थिति में  कुछ देर बने रहे।
  6. श्वासों को सामान्य रूप से चलने दे।
  7. इस अवस्था में अनुभव करे की आप कुर्सी पर बैठकर कोई पुस्तक या अखबार पढ़ रहे है।
  8. कुछ देर बाद सामान्य अवस्था में आ जाए।
  9. उपरोक्त क्रिया को आप ४ से ५ बार दोहरा सकते है।







Utkatasana Benefits | उत्कटासन के लाभ

Utkatasana Benefits | उत्कटासन के लाभ




  1. यह आसन विशेषकर पैर,टखने ,घुटने एवं जाँघों की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है।
  2. इसका अभ्यास कूल्हों की पेशियों को फैलाता है, और उन्हें सशक्त बनाता है।
  3. नियमित इसके अभ्यास से अनावश्यक वसा (चर्बी ) दूर होती है। यह वजन कम करने में सहायक आसन है।
  4. नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी ,कूल्हे ,एवं घुटनों को एक बेहतरीन खिंचाव मिलता है।
  5. ये रोगप्रतिकारक शक्ति को बढ़ाकर शरीर के सभी अंगों को पुष्ट और मजबूत करता है।
  6. पीठदर्द एवं जोड़ों के दर्द से मुक्ति दिलाता है।
  7. यह संतुलन शक्ति को बढ़ाता है।
  8. दिमाग को ताजा एवं स्वस्थ बनाये रखता है।
  9. इसका नियमित अभ्यास सहनशीलता ,कठोरता ,दृढ़ता को बढ़ाता है।





Beginners Tips | शुरुवात के लिए टिप्स


  • शुरुवाती समय में इस आसन का अभ्यास कठिन लगता है ,इसे आसान बनाने के लिए पहली बार इसका अभ्यास दीवार के सहारे करे।
  • अभ्यास करने के लिए दीवार से कुछ दुरी पर खड़े रहे ,जिससे अभ्यास करते समय आप अपने मेरुदंड का निचला हिस्सा दीवार से टिका सकते है।
  • नियमित अभ्यास से जब आप इस आसन के लिए पूरी तरह तैयार हो तो दीवार के बिना इसका अभ्यास करे।









Utkatasana Precautions | उत्कटासन में सावधानी



  • घुटने की पुरानी समस्या से पीड़ित एवं हड्डियों की कमजोरी या समस्या होनेपर इस आसन का अभ्यास ना करे।
  • निम्न रक्तचाप ,अनिद्रा ,अत्याधिक थकान होनेपर भी इस आसन से बचना चाहिए।
  • गर्भावस्था एवं माहवारी होनेपर इसका अभ्यास ना करे।
  • कमर के निचे किसी भी अंग में समस्या होनेपर भी इसे नहीं करना है।








Things You Need To Know | ध्यान रखने योग्य बाते



  •  इस आसन का अभ्यास खाली पेट किया जाना चाहिए।
  • सुबह ब्रम्हमुहूर्त का समय कसरत एवं योग के लिए उपयुक्त माना जाता है। किसी कारण सुबह अभ्यास ना होनेपर ,शाम के समय इसका अभ्यास करे।
  • केवल भोजन और अभ्यास के बिच ६ घंटे का अंतर् छोड़ना याद रखे।




ऊपर मैंने आपको Utkatasana Yoga के बारे में जानकारी दी। क्या आपको यह जानकारी उपयुक्त लगी ?  आप अपनी राय कमेंट बॉक्स में दे सकते है। लेख पसंद आनेपर इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना भूले। 


  
ऐसे करे अर्ध पिंच मयूरासन योग , हड्डियां रहेंगी मजबुत |  Ardha Pincha Mayurasana

ऐसे करे अर्ध पिंच मयूरासन योग , हड्डियां रहेंगी मजबुत | Ardha Pincha Mayurasana

 योग में वर्णित अर्ध पिंच मयूरासन  एक स्थायी और स्थिर आसन है। इस नाम के अलावा, इस आसन को Dolphin Yoga Pose  भी कहा जाता है । 
अर्ध - आधा ,पिंच - पंख ,मयूर - मोर ,आसन - मुद्रा । जब आप इस आसन का अभ्यास  करते है ,तो आपकी शारीरिक मुद्रा उलटे V की तरह दिखाई देती है।   जिसतरह अधो मुख श्वानासन का अभ्यास किया जाता है। ठीक उसी तरह "Dolphin Yoga"  को भी किया जाता है। अंतर सिर्फ इतना है की इस आसन का अभ्यास करते समय  हथेलियों को कोहनी तक फर्श से सटाकर रखना पड़ता है। और सिर जमीन पर आराम करता है। 



Ardha Pincha Mayurasana In Hindi | अर्ध पिंच मयूरासन योग

Ardha Pincha Mayurasana In Hindi | अर्ध पिंच मयूरासन योग




  1. इस आसन के लिए घुटनों के बल बैठ जाए। हाथों को सामने फर्श से सटाकर रखे। हाथों से लेकर  कोहनियों तक का भाग जमीन पर सटा दे।
  2. जब आप ऐसा करते है तो सुनिश्चित करे ,की आपके कंधे और कोहनिया सीधी रेखा में हो। पैरों के तलवों को जमीन से सटाकर रखे और कूल्हों को ऊपर उठाये।
  3. ऐसा करते समय अपने हाथ एवं पैरों को स्थिर रखे। आप अपने घुटनों को थोड़ा झुका सकते है।
  4. अपने कंधों को कानों से दूर रखे ,और गर्दन को मुक्त करे। अपने मस्तक को ज़मीन पर विश्राम करने दे।
  5. इस अवस्था में ३ से ४ बार लंबी और गहरी श्वास ले।
  6. जितनी देर इस स्थिति में रुक सकते है ,उतनी देर बने रहे। कुछ देर रुकने के बाद ,मुद्रा को छोड़े और पुनः अपनी सामान्य अवस्था में आ जाए।
  7. इस आसन को करते समय मन में समर्पण की भावना रखे।








Health Benefits Of Dolphin Yoga | अर्ध पिंच मयूरासन के स्वास्थ्य लाभ





  1. इस आसन का अभ्यास रान की नाड़ी ,कंधे और कूल्हों में एक अच्छा खिचाव देता है।
  2. यह पैर,हाथ ,कंधे और गर्दन को मजबूत बनाता है।
  3.  हड्डियों को मजबूत बनाकर कैल्शियम और विटामिन D की कमी को पूर्ण करता है। तथा ऑस्टियोपोरोसिस जैसे रोगों को रोकता है।
  4.  प्रजनन अंगों को उत्तेजित कर प्रजनन प्रणाली को स्वस्थ बनाये रखता है।
  5. समस्त गुप्तरोग ,वीर्यरोग ,मासिक धर्म की अनियमितता ,रजोनिवृत्ति को रोकने में मदद करता है।
  6. नियमित इस आसन का अभ्यास जठराग्नि को प्रदीप्त कर पाचनक्षमता को बढ़ाता है। इसके अभ्यास से भूक खुलकर लगती है।
  7. मंदाग्नि ,कब्ज ,वायुविकार ,अपच, अम्लता ,थकान ,अनिद्रा ,सिरदर्द को दूर करने में सहायक है।  
  8. इसके अलावा ये अस्थमा ,कटिस्नायुशीलता ,तथा रक्तचाप जैसी बीमारियों में आराम पहुंचाता है।
  9. इसके अभ्यास से दिमाग शांत एवं तनावरहित बना रहता है।
  10. मस्तिक्ष की कार्यक्षमता को बढ़ाकर एकाग्रता को विकसित करता है।
  11. यह व्यक्ति में समर्पण की भावना को जगाता है।





Ardha Pincha Mayurasana Precautions | अर्ध पिंच मयूरासन में सावधानी


  • यह आसन अत्यंत सरल योगासनों में से एक है।
  • इसे करते समय केवल एक बात का ध्यान रखना चाहिए। की आपकी गर्दन,कंधे और पैर पूर्ण रूप से स्वस्थ हो। और उन्हें किसी भी तरह से कोई चोट या परेशानी ना हो।








Few Things About Dolphin Yoga Pose | ध्यान रखने योग्य बाते


  • इस आसन का अभ्यास खाली पेट किया जाना चाहिए।
  • किसी भी योगासन का अभ्यास करने के ५ से ६ घंटे पहले आपका भोजन हो जाना चाहिए .इसलिए ये अच्छा होगा, की आप इस आसन का अभ्यास सुबह करे।
  • पर अगर आप व्यस्त रहते है या अन्य किसी कारण से सुबह अभ्यास नहीं कर पाते तो आप शाम को भी इस आसन को कर सकते है।










अब आप जान गए है की "अर्ध पिंच मयूरासन" का अभ्यास कैसे करे। Dolphin Yoga को अपने दैनिक योगसत्र में शामिल करना एक अच्छा निर्णय साबित होता है। 
ये आसन आपको अन्य कई योगासनों के लिए तैयार करता है। और आपको अद्वितीय लाभ देता है। लेख पसंद आने पर अपने दोस्तों के साथ इसे जरूर बांटे। और कमेंट बॉक्स मे अपनी राय देना ना भूले।