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शीर्षासन क्यों है आसनों का राजा , जाने इसकी विधि

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शीर्षासन को आसनों का राजा माना गया है। शीर्षासन एक संस्कृत शब्द है ,संस्कृत में सिर को शीर्ष कहा जाता है ,इस मुद्रा में शरीर को उल्टा कर ,शरीर का पूर्ण भार सिर पर संतुलित करना पड़ता है ,इसलिए इस आसन को "शीर्षासन "के नाम से जाना जाता है।
शुरुवात में नए साधकों के लिए इसका अभ्यास थोड़ा मुश्किल हो सकता है ,परंतु असंभव नहीं। नियमित अभ्यास द्वारा जब शरीर का संतुलन बन जाता है ,तो आसानी और सरलता के साथ आप इसका अभ्यास कर सकते है। ये आसन दिखने में तो साधारण सा प्रतीत होता है ,परंतु स्वस्थ शरीर और आत्मशक्ति बढ़ाने के लिए ये आसन अत्यंत लाभकारी है।


 Sirsasana In Hindi - शीर्षासन योग



शीर्षासन का अभ्यास किसी शांत एवं स्वच्छ स्थान पर करे।सबसे पहले निचे फर्श पर चटाई बिछाकर ,घुटनों के बल बैठ जाए।अपने दोनों हाथों को एक दूसरे के साथ फसा ले।इसी अवस्था में अपने दोनों हाथों की कोहनियों तक का भाग जमीन पर टिकाये।अब थोड़ा आगे की और झुककर ,अपने सर को जमीन पर टिकाते हुए , दोनों हाथों की फसी हुई अंजुली में सटा के रखे।श्वास की स्थिति सामान्य बनाये रखे। अब अपने शरीर को ऊपर उठाने का प्रयास करे।शरीर को ऊपर उठाते …

शीतली प्राणायाम विधि ,लाभ और सावधानिया

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गर्मियों के दिनों  में तेज धुप के कारण हमें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है , लेकिन अगर आपको इस जलती धुप और गर्मी से बचना है, तो आपको अपने डेली रूटीन में "शीतली प्राणायाम " को अवश्य स्थान देना चाहिए।  योग के चौथे अंग प्राणायामों में से एक है "शीतली प्राणायाम" , जो आपको गर्मी और उससे होनेवाली परेशानियों दूर रखता है।  इस प्राणायाम को करने से बड़े अद्भुत लाभ होते है।



Shitali Pranayama In Hindi - शीतली प्राणायाम योग






शीतली प्राणायाम  करने के लिए किसी स्वच्छ और हवादार स्थान का चुनाव करे जहा आपको शांति महसूस हो। उस जगह सुखासन में या जैसे आप रोज बैठते है ,वैसे बैठ जाए। सबसे पहले ३ से ४ बार जोर से साँस ले और जोर से छोड़े।अपनी जीभ को बाहर निकाले और उसे पाइप के समान बिच में से मोडे ,अगर ऐसी न मुड़े तो अपने हाथ से इसे मोडे।अपनी मुड़ी हुई जीभ के माध्यम से तब तक हवा को अंदर ले जबतक की आपका पेट पूरी तरह हवा से ना भर जाए।अब धीरे से अपनी जीभ को अंदर की और ले ले और मुँह को बंद कर दे। इसी अवस्था में अपनी गर्दन आगे झुकाकर अपनी ठोड़ी को अपनी छाती से लगाने का प्रयास करे। थोड़ी देर इस अवस्था…

कपालभाति प्राणायाम कैसे करे ? इसकी खोज किसने की ?

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भारतीय संस्कृति में योग का विशेष रूप से स्थान है।  योग में यम , नियम ,आसन,  प्राणायाम , प्रत्याहार , ध्यान , धारणा और समाधी इन आठ अंगो का समावेश देखने को मिलता है।  जिसे अष्टांग योग  के नाम से जाना जाता है। योग के चौथे अंग "प्राणायाम" में विभिन्न प्रकार की प्राण क्रियाओं को कर प्राणों को वश में किया जाता है ,जिससे साधक अपने मन को साधने में सक्षम बनता है।  "कपालभाति प्राणायाम " भी एक उत्कृष्ट और सरल प्राणायाम है। इस प्राणायाम के अभ्यास में" रेचक क्रिया" करके ,तेज गति से श्वास को बाहर धकेला जाता है।

पहले योग की इन क्रियाओ को गुप्त रखा जाता था , इसकी व्याप्ति जंगलो में स्थित गुफाओं तक ही सीमित थी।  पर धीरे धीरे इसका प्रसार होने लगा और लोग इसका प्रयोग मन के साथ साथ शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भी करने लगे।



कपालभाति प्राणायाम की खोज कैसे हुयी ?




क्या आपको पता है ? की कपालभाति प्राणायाम की खोज सर्वप्रथम किसने की ? अगर नहीं तो चलिए हम आपको बताते है। एक महान योगी "मच्छिंद्रनाथ" ,जो नवनाथों में से एक है। जिन्होंने मछली के पेट से अवतार धारण किया इसीकारण जिनका…

स्वस्तिकासन योग विधि ,लाभ एवं सावधानिया

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"Swastika Asana" संस्कृत : "स्वस्तिकासन" , सु - शुभ ,अस्ति - अस्तित्व ,का - बनाना ,आसन - मुद्रा
योग में वर्णित "स्वस्तिकासन " एक ध्यानात्मक योगासन है।


यह आसन अत्यंत कल्याणकारी और शुभता का प्रतिक है। इसका अभ्यास सरल और लाभदायी है। लंबे समय तक ध्यानावस्था में बैठने के लिए ये एक अच्छा आसन है। जो साधक सिद्धासन या पद्मासन का अभ्यास करने में कठिनाई महसूस करते है ,वो इस आसन में बैठ कर प्राणायाम ,ध्यान साधना या अन्य यौगिक क्रियाये कर सकते है। इसका अभ्यास चित्त को एकाग्र कर ,व्यक्ति का आध्यात्मिक विकास करता है।




Swastika Asana | स्वस्तिकासन योग







इस आसन का अभ्यास किसी शांत जगह पर करे ,जिससे धारणा शक्ति का विकास हो और चित्त को स्थिर करने में मदद मिले।निचे चटाई बिछाकर सामान्य अवस्था में बैठ जाए।पैरों को सामने फैलाये एवं कमर को सीधा रखे।अपने बाएं पैर को घुटने से मोड़कर ,तलवे को दाहिने पैर के जांघ से सटाकर रख दे।दाहिने पैर को घुटने से मोड़कर तलवे को बायीं जांघ और पिंडली के मध्य में रखे।कमर ,छाती एवं गर्दन को सीधा रखे।दोनों हाथों को घुटनों पर रखे ,और कंधों को ढीला छोड़ दे।ध्या…

अष्टांग योग क्या है , इसका आचरण कैसे करे ?

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इस दुनिया में महान तपस्वी एवं सिद्ध योगी हुए ,जिन्होंने हमें योग की शिक्षा और परिणामों से अवगत कराया। "योग" का अर्थ होता है जोड़ना , जो हमें ईश्वर से जोड़े उसे योग कहा गया है।  आत्मा और परमात्मा के बिच मिलन करानेवाली कड़ी को योग कहा जाता है।  योग जीवन जीने की शैली, और मरने की कला है , जिसे मरना आ गया उसे जीने का तरीका भी अपने आप आ ही जाता है।

जितना हमें  इस बाहरी दुनियाँ में दिख रहा है , जैसे - चंद्र, सूर्य , तारे , गृह , नक्षत्र ,ये सारा ब्रम्हांड हमारे शरीर में ही है।  इस ब्रम्हांड से जुड़ने का तरीका ही योग कहलाता है। जो एक बार इससे जुड़ जाए, उसे किसी और से जुड़ने की आवश्यकता नहीं रहती।  जैसे जैसे समय बदलता गया , वैसे ही योग की परिभाषा भी बदलती गयी , कुछ भ्राँतिया उठने लगी ,विचार बदलते गए पर पुरातन काल से योग जैसा था ,वैसा आज भी है। आजकल हर कोई अपना जीवन सुखी ,स्वस्थ और आध्यात्मिक तरीके से जीना चाहता है । योग के प्राचीन ग्रंथ जैसे "पतंजलि , हठयोग प्रदीपिका, घेरंड संहिता , चरक संहिता " , इन सबमे प्राचीन काल की योगविद्या का  विस्तृत वर्णन देखने को मिलता है।
प्रस्तुत लेख…

सूर्यनमस्कार क्यों फायदेमंद है , जाने इसकी विधि

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"Surya Namskar" योग में वर्णित "सूर्य नमस्कार" एक संपूर्ण योगमुद्रा है। जो सूर्य के प्रति समर्पित भाव को प्रगट करती है। प्राचीन समय से ही लोग सूर्य की उपासना करते  है। सूर्य से ही सभी का जीवन जुड़ा हुआ है , पेड़ ,पौधे ,मनुष्य प्राणी तथा पृथ्वी पर रहनेवाले सभी जिव जंतुओं के जीवन का स्रोत सूर्य ही है । सूर्य को बुद्धि और शक्ति की देवता के रूप में पूजा जाता है। "सूर्यनमस्कार " भारतीय संस्कृति में जन्मी ५००० साल प्राचीन योगविद्या है,जो सूर्य के प्रति समर्पण ,सन्मान तथा कृतज्ञता के  भाव को दर्शाती है।



"सूर्यनमस्कार " करने से संपूर्ण  शरीर की कसरत हो जाती है ,सूर्यनमस्कार करते हुए सभी आसनों का अभ्यास अपने आप हो जाता है। केवल सूर्यनमस्कार करने से ही शरीर को सभी आसनों का लाभ मिल जाता है। अष्टांग योग में सूर्यनमस्कार का विशेष महत्व है।  प्रत्येक मनुष्य किसी ना किसी ग्रह से अवश्य प्रभावित रहता है। सूर्यनमस्कार का अभ्यास व्यक्ति के शरीर में स्थित "सूर्य चक्र" को मजबूत करता है ,जिससे अनायास ही साधक ,कई गंभीर बिमारियों से अपने शरीर की रक्षा कर लेता ह…

भुजंगासन सरल विधि , लाभ एवं सावधानिया

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संस्कृत नाम भुजंग का अर्थ सर्प होता है। "भुजंगासन" को इंग्लिश में "Cobra Pose" भी कहा जाता है।  भुजंगासन  या सर्पासन  का अभ्यास करते समय व्यक्ति की शरीर रचना, फ़न फैलाये हुये सर्प की तरह दिखती है। सूर्यनमस्कार की १२ स्थितियों में से भुजंगासन  का अभ्यास आठवीं स्थिति में किया जाता है।


इसका अभ्यास कमर को एक बेहतरीन खिचाव देता है। अपने रोज के व्यायामों में भुजंगासन को शामिल करना स्वास्थ की दृष्टी से अच्छा निर्णय हो सकता है। ये आपको शारीरिक लाभ के साथ साथ आत्मिक सुख भी प्रदान करता है।






Bhujangasana In Hindi - भुजंगासन योग




भुजंगासन  करने के लिए किसी स्वच्छ और हवादार स्थान का चुनाव करना आवश्यक है। बंद कमरे में किसी भी योगासन  को ना करे।सबसे पहले जमीन पर चटाई बिछाकर छाती के बल लेट जाए।अपने दोनों पैरों को आपस में मिलाकर तलवों को जमीन से सटा कर रखे। अपने दोनों हाथों को अपनी कोहनियों से मोड़कर अपनी छाती के बगल में रखे।एक लम्बी गहरी साँस लेकर अपनी गर्दन को ऊपर उठाये ,उसके बाद छाती को ,और उसके बाद नाभी तक के भाग को ऊपर उठाये।याद रखे इस आसन में केवल नाभी तक ही शरीर ऊपर उठाया जाता है…

अधो मुख श्वानासन क्यों है विशेष , जाने इसके लाभ

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अष्टांग योग में वर्णित "अधो मुख श्वानासन" एक सरल और लाभकारी आसनों में से एक है। नए अभ्यासक भी इस आसन का अभ्यास बहुत ही सरलता के साथ कर सकते है। संस्कृत में कुत्ते को श्वान कहा जाता है, और अधो मुख यानि जब कुत्ता निचे की और झुकता है ,तथा शरीर को फैलाता है। इस आसन को कुछ लोग "पर्वतासन" भी कहते है। "सूर्यनमस्कार" का अभ्यास करते समय भी  ५ वि स्थिति में अधो मुख श्वानासन का अभ्यास किया जाता है।






Adho Mukha Svanasana In Hindi - अधो मुख श्वानासन योग




सबसे पहले जमीन पर चटाई बिछाकर अपने शरीर की स्थिति किसी टेबल की तरह बनाये। जिसमे आपके दोनों हाथ और दोनों पैर जमीन पर टिके होंगे।श्वास बाहर छोड़ते हुए अपनी कमर को ऊपर की और जितना संभव हो उठाने का प्रयास करे। जिससे आपका शरीर किसी पर्वत या उलटे V की तरह दिखाई देने लगेगा।अभ्यास के दौरान इस बात का ध्यान रखे की किसी भी परिस्थिति में आपके दोनों हाथ एवं पैर ,अपनी जगह से न हिलने पाए। अपने कंधों को थोड़ा खिचाव दे और नाभि की जगह को देखने का प्रयत्न करे।इस अवस्था में जितनी देर संभव हो रुकने का प्रयत्न करे। और फिर सामान्य अवस्था में आ ज…