Posts

ऐसे करे अर्ध मत्स्येन्द्रासन , नहीं होंगी शुगर और किडनी से जुडी बीमारियां और भी है लाभ

Image
" अर्ध मत्स्येन्द्रासन " हठ योग में किए जाने वाले १२ प्रमुख आसनों में से एक है।  इस आसन का नाम एक महान योगी मच्छिंद्रनाथ के नाम पर रखा गया है। संस्कृत शब्द अर्ध्य मत्स्येन्द्रासन  का निर्माण ४ नामों से मिलकर बना है। जो इस प्रकार है - अर्ध -मत्स्य - इंद्र - आसन , अर्ध यानी आधा ,मस्त्य मतलब मछली ,इंद्र यानी राजा और आसन यानी मुद्रा। अर्ध मत्स्येन्द्रासन का अभ्यास करते समय, शरीर को कमर से मोड़ा जाता है। इसलिए इसे वक्रासन के नाम से भी जाना जाता है।


Ardha Matsyendrasana - अर्ध मत्स्येंद्रासन योग




अर्ध मत्स्येन्द्रासन का अभ्यास किसी शांत और हवादार स्थान पर करे।निचे बैठ जाए और दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर पास लाये।अपने मेरुदंड को सीधा रखे , बाएं पैर के पंजे को अपने दाएं हिप्स (नितंब) के निचे रखे।अब अपने दाहिने पैर को बाएं पैर के ऊपर से ले जाकर ,बाएं पैर के घुटने के पास रख दे।इस स्थिति में कमर ,गर्दन,और कंधे को अपनी दाहिने और मोडे। इस बात का ध्यान रखे की आपकी रीढ़ की हड्डी सीधी हो।जब आप दाहिने और मुड़ते है, तो संतुलन बनाने के लिए अपने पीछे दाहिना हाथ और अपने बाएं हाथ को अपने दाहिने घुटने…

पेट को स्वस्थ रखना चाहते है ,तो जरूर करें अर्ध हलासन योग ,और भी है फायदे

Image
योग में वर्णित अर्ध हलासन का अभ्यास पेट की समस्याओं में रामबाण की तरह काम करता है। जो व्यक्ति हलासन का पूर्ण अभ्यास नहीं कर पाते ,उन्हें अर्ध हलासन का अभ्यास करना चाहिए। हलासन का अभ्यास करते समय पैरों को पीछे ले जाया जाता है। जो हर कोई आसानी से नहीं कर सकता ,विशेषतः मोटापे से ग्रसित लोगों को हलासन का अभ्यास एक कष्टकर कार्य लगता है। ये आसन हलासन की आधी क्रिया को पूर्ण करता है।







Ardha Halasana In Hindi | अर्ध हलासन योग



अर्ध हलासन का अभ्यास किसी शांत और स्वच्छ जगह पर करना चाहिए। इस आसन के अभ्यास हेतु जमीन पर चटाई बिछाकर सीधे शवासन की मुद्रा में लेट जाए।दोनों पैरों को एकसाथ जोड़ दे ,और दोनों हथेलियों को अपनी जाँघों पर रख दे।एक लंबी श्वास ले ,और  घुटनों को ना मोड़ते हुए ,दोनों पैरों को सामान रूप से ऊपर उठाये।पैरों को 90 डिग्री के कोण में स्थिर रखे और जितनी देर आप इस अवस्था में रुक सकते है ,रुकने का प्रयत्न करे। इस समय श्वास को अपनी शक्ति अनुसार भीतर ही रोक कर रखे।कुछ देर बाद श्वास को छोड़ते हुए पैरों को निचे सामान्य अवस्था में लाये।इस आसन को ३ से ५ बार दोहराये। यह आसन करते समय आप अपना ध्यान नाभ…

ऐसे करेंगे कर्णपीड़ासन का अभ्यास तो नहीं होंगी कान से जुडी समस्याएं , और भी है लाभ

Image
संस्कृत शब्द : कर्णपीड़ासन  का अर्थ कर्ण - कान ,पीड़ा - दुःख ,आसन - मुद्रा  होता है। इस आसन का अभ्यास करने से कान से जुडी सभी समस्याएं खत्म हो जाती है। 

योग में वर्णित कर्णपीड़ासन  एक उन्नत योगासन है। पहली बार इसका अभ्यास करते समय पीड़ा का अनुभव होता है। इसलिए इस आसन का अभ्यास करने से पहले यह आवश्यक है की आप हलासन और सर्वांगासन में पूरी तरह पारंगत हो जाए। जब आप इन दोनों आसनों में महारथ हासिल करते है ,तो आपके लिए कर्णपीड़ासन का अभ्यास करना सरल बन जाता है। इस आसन को " राजा हलासन" के रूप में भी जाना जाता है ,क्योंकि हलासन का अभ्यास किये बिना इस आसन को करना शारीरिक पीड़ा देता है। यह आसन आपके मेरुदंड को विस्तारित कर उसे बेहतरीन खिंचाव देता है ,और अनगिनत शारीरिक तथा मानसिक लाभ प्रदान करता है।



Karnapidasana Yoga | कर्णपीड़ासन योग



इस आसन के अभ्यास के लिए निचे दरि बिछाकर पीठ के बल लेट जाए।हाथों को बगल में रखे और पैरों को सीधा रखे। श्वास भरे और हाथों मजबूती से फर्श पर रखे। पैरों को एकसाथ ऊपर हवा में उठाये, श्वास छोड़ते हुए दोनों पैरों को सिर के ऊपर हलासन की स्थिति में ले जाए।इस अवस्था में दोन…

संतुलित रहने के लिए जरूर करे बकासन

Image
बकासन या "काकासन" एक शक्तिशाली योगमुद्रा है। बकासन को इंग्लिश भाषा में Crow Pose भी कहा जाता है। संस्कृत में बगुले को वक्र भी कहते है। इसीलिए बकासन को "वक्रासन" के नाम से भी जाना जाता है।  बकासन का अभ्यास करते समय शरीर रचना एक बगुले की तरह दिखाई देती है।

 इस आसन का अभ्यास शरीर संतुलन को बढ़ाने के साथ साथ अनेक लाभ देता है। यह बात सच है की शुरुवात में बकासन का अभ्यास करते समय संतुलन बनाने में कठिनाई होती है। पर थोड़े ही समय में इसके अभ्यास से आप संतुलन बनाने में महारथ हासिल कर लेते है। 


Bakasana In Hindi - बकासन योग विधि 



  बकासन का अभ्यास करने के लिए किसी शांत ,स्वच्छ और हवादार स्थान का चयन करे ,जिससे आपका मन एकाग्र होने में मदत मिल सके।सबसे पहले जमीन पर चटाई बिछाकर अपने घुटनों के बल बैठ जाए।अपने दोनों पैरों के पंजो को मिलाकर जमीन पर टिकाते हुए दोनों घुटनो को अलग अलग कर दे।अपने दोनों हाथो को फर्श पर टिकाते हुए ,अपने घुटनो को आगे की और ले जाकर ,अपने दोनों हाथो की कोहनियों के ऊपर के भाग पर घुटनो को सटाकर रखे।एक लम्बी गहरी साँस लेकर ,अपने शरीर का पूरा  वजन अपने दोनों हाथो प…

वीरभद्रासन २ के स्वास्थ लाभ और विधि जानकर , चौक जायेंगे आप

Image
योग में वर्णित इस आसन का नाम ' भगवान् शिव'  द्वारा निर्मित 'वीरभद्र' नामक गण के ऊपर रखा गया है। संस्कृत भाषा में इसका अर्थ वीर = योद्धा, भद्र = अच्छा दोस्त और आसन = मुद्रा होता है। यह योग में वर्णित सबसे लोकप्रिय और सुंदर मुद्राओं में से एक है। अंग्रेजी में इसे  ' Warrior-2 ' या " वीरभद्रासन-२ " के नाम से भी जाना जाता है।




Virabhadrasana in Hindi | वीरभद्रासन योग




जमीन पर चटाई बिछाकर सीधे खड़े हो जाए। पैरों में ३ से ४ फिट का अंतर् रखे।अपने दाहिने पैर को ९० डिग्री के, और बाए पैर को १५ डिग्री के कोण में बाहर करे। ध्यान दे की आपके दाहिने पैर की एड़ी,  आपके बाए पैर के समांतर रेखा में रखी गयी हो।अपने हाथों को कंधों की सीध में ऊपर उठाये ,तथा दोनों हथेलियों को जमीन से समांतर रखे।पैरों को स्थिर रखते हुए लंबी श्वास भरे और अपने दाहिने पैर को घुटने से मोड़े। जब आप घुटने को मोड़ते है ,तो आपके दाहिने पैर का तलवा फर्श से सटा होना चाहिए।अपनी गर्दन को दाहिने तरफ मोड़े और देखे। इस अवस्था में बने रहे और आरामदायक स्थिति का अनुभव करे। ऐसा करते समय अपने गुदा प्रदेश को अंदर खींचे…

पक्षी आसन के सरल अभ्यास से , मिलते है विशेष लाभ

Image
Bird Pose Yoga  संस्कृत : पक्षी आसन ,पक्षी - पंछी , आसन -मुद्रा
योग में वर्णित "पक्षी आसन " एक प्रमुख योगासन है। योग में यह आसन पक्षियों की प्रेरणा से लिया गया है। इसीकारण यह पक्षी आसन के नाम से जाना जाता है। अंग्रेजी में इसे "Bird Pose" भी कहा जाता है। इसके नियमित अभ्यास से ही ,योगी अपने प्राणवायु को वश में कर ,अपनी साधना को सिद्ध करने में सक्षम होते है । 




Bird Pose Yoga | पक्षी आसन




पक्षी आसन के अभ्यास के लिए ,जमीन पर चटाई बिछाकर दंडासन में (दोनों पैरों को सामने फैलाकर) बैठ जाए।अब दोनों पैरों को जितना संभव हो ,उतना फैलाये।ऐसा करते समय घुटनों को सीधा एवं जमीन से सटाकर रखे। कमर को सीधा रखे।दोनों हाथों को कंधों के बराबर ऊपर उठाकर ,हवा में सीधी रेखा बनाये।दाहिने हाथ को सर के ऊपर से ले जाकर बाएं पैर के अंगूठे को पकड़े।ऐसा करते समय कमर को बाई और झुकाये। एवं अपने बाएं हाथ को नाभि के पास आराम करने दे।श्वास की  गति को सामान्य बनाये रखे।इसीप्रकार उपरोक्त क्रिया को हाथ बदलकर अपने बाए हाथ से करे।इस तरह इसे बिना रुके 8  से 12 बार करे।आसन समाप्त करने के लिए दोनों हाथों से  दोनों पै…

शीर्षासन क्यों है आसनों का राजा , जाने इसकी विधि

Image
शीर्षासन को आसनों का राजा माना गया है। शीर्षासन एक संस्कृत शब्द है ,संस्कृत में सिर को शीर्ष कहा जाता है ,इस मुद्रा में शरीर को उल्टा कर ,शरीर का पूर्ण भार सिर पर संतुलित करना पड़ता है ,इसलिए इस आसन को "शीर्षासन "के नाम से जाना जाता है।
शुरुवात में नए साधकों के लिए इसका अभ्यास थोड़ा मुश्किल हो सकता है ,परंतु असंभव नहीं। नियमित अभ्यास द्वारा जब शरीर का संतुलन बन जाता है ,तो आसानी और सरलता के साथ आप इसका अभ्यास कर सकते है। ये आसन दिखने में तो साधारण सा प्रतीत होता है ,परंतु स्वस्थ शरीर और आत्मशक्ति बढ़ाने के लिए ये आसन अत्यंत लाभकारी है।


 Sirsasana In Hindi - शीर्षासन योग



शीर्षासन का अभ्यास किसी शांत एवं स्वच्छ स्थान पर करे।सबसे पहले निचे फर्श पर चटाई बिछाकर ,घुटनों के बल बैठ जाए।अपने दोनों हाथों को एक दूसरे के साथ फसा ले।इसी अवस्था में अपने दोनों हाथों की कोहनियों तक का भाग जमीन पर टिकाये।अब थोड़ा आगे की और झुककर ,अपने सर को जमीन पर टिकाते हुए , दोनों हाथों की फसी हुई अंजुली में सटा के रखे।श्वास की स्थिति सामान्य बनाये रखे। अब अपने शरीर को ऊपर उठाने का प्रयास करे।शरीर को ऊपर उठाते …

शीतली प्राणायाम विधि ,लाभ और सावधानिया

Image
गर्मियों के दिनों  में तेज धुप के कारण हमें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है , लेकिन अगर आपको इस जलती धुप और गर्मी से बचना है, तो आपको अपने डेली रूटीन में "शीतली प्राणायाम " को अवश्य स्थान देना चाहिए।  योग के चौथे अंग प्राणायामों में से एक है "शीतली प्राणायाम" , जो आपको गर्मी और उससे होनेवाली परेशानियों दूर रखता है।  इस प्राणायाम को करने से बड़े अद्भुत लाभ होते है।



Shitali Pranayama In Hindi - शीतली प्राणायाम योग






शीतली प्राणायाम  करने के लिए किसी स्वच्छ और हवादार स्थान का चुनाव करे जहा आपको शांति महसूस हो। उस जगह सुखासन में या जैसे आप रोज बैठते है ,वैसे बैठ जाए। सबसे पहले ३ से ४ बार जोर से साँस ले और जोर से छोड़े।अपनी जीभ को बाहर निकाले और उसे पाइप के समान बिच में से मोडे ,अगर ऐसी न मुड़े तो अपने हाथ से इसे मोडे।अपनी मुड़ी हुई जीभ के माध्यम से तब तक हवा को अंदर ले जबतक की आपका पेट पूरी तरह हवा से ना भर जाए।अब धीरे से अपनी जीभ को अंदर की और ले ले और मुँह को बंद कर दे। इसी अवस्था में अपनी गर्दन आगे झुकाकर अपनी ठोड़ी को अपनी छाती से लगाने का प्रयास करे। थोड़ी देर इस अवस्था…