Featured Post

Recommended

क्या शवासन आपको आंतरिक ऊर्जा ,मानसिक शांति और शारीरिक कष्ट से छुटकारा देता है ?

अष्टांग योग में वर्णित शवासन दिमाग को ताजगी एवं शरीर तनावरहित करने के लिए एक उत्तम योगासन है। इस आसन को करते समय, शरीर रचना किसी म...

Comedy Couple Zee-5 Hindi Full Movie Download Online Leaked By TamilRockers New Link 2020

Comedy Couple Zee-5 Hindi Full Movie Download Online Leaked By TamilRockers New Link 2020

 Comedy Couple Zee-5 Hindi Full Movie Download: Directed by Nachiket Samant with Saqib Saleem and Shweta Basu Prasad.


"Comedy Couple Zee-5" एक Romantic Hindi Movie है, जिसे  हिंदुस्तान में 21 अक्टूबर 2020 को रिलीज किया गया . पर  हमेशा  की  तरह  इस  बार  भी  TamilRockers New Link 2020  ने  अपनी  नवीनतम  वेबसाइट  पर  "Romantic Movie Commedy Couple " को  अपलोड  कर  दिया।  जिससे  लोग  फ्री  में  Online Commedy Couple Hindi Full Movie Download  कर  के  देख  रहे  है.


ZEE-5 Comedy Couple Movie 720P Hindi Romantic Movie HD Online

ZEE-5 Comedy Couple Movie 720P Hindi Romantic Movie HD Online


आपकी जानकारी के लिए बता दे ,की Tamilrockers एक Pirecy Website हैं ,जो Movies को चुराकर उनकी Download Link अपने नवीनतम Domain के साथ पब्लिश कर देती है ,जिसके कारण लोग फ्री में Movie Download करके देखते है ,जिससे फिल्मों के बजट में काफी गिरावट देखने को मिलती है।  इससे पहले भी Tamilrockers ने अपने New Domain के साथ "Jawani Jaaneman ","Tanhaji The Unsung Warrior " "Street Dancer 3D ","Malang" जैसी कई फिल्मो को Leaked किया है , आपसे अनुरोध है ,की Tamilrockers Movie Downloading वेबसाइट का विरोध करे.




"ZEE-5 Comedy Couple Movie" Best Hindi Romantic Movie  है ,इसे अपने पार्टनर के जरूर देखे .
ऐसे कीजिए आनंद बालासन का अभ्यास | बच्चे की तरह सुखी जीवन जियेंगे

ऐसे कीजिए आनंद बालासन का अभ्यास | बच्चे की तरह सुखी जीवन जियेंगे

योग में वर्णित "आनंद बालासन " का अभ्यास स्वास्थ पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। आनंद बालासन का अर्थ आनंद = आनंदी ,बाल = बच्चा ,आसन= मुद्रा होता है।
 इस आसन को "डेड बग पोज़ " के नाम से भी जाना जाता है। पर क्योंकि एक आनंदित बच्चा अधिक सकारात्मक लगता है ,और इस आसन का अभ्यास शरीर पर सकारात्मक प्रभाव दिखाता है। इसीलिए इसका आनंद बालासन नाम ही प्रचलन में आता है। अंग्रेजी में इसे "Happy Baby Pose" के नाम से जाना जाता है। आनंद बालासन को आप बालासन के जुड़वे भाई के रूप में देख सकते है। क्योंकि बालासन की तरह "Ananda Balasana" का अभ्यास भी दिमाग को शांत कर साधक को तनाव से मुक्ति देता है।



Ananda Balasana (Happy Baby Pose) | आनंद बालासन योग

Ananda Balasana (Happy Baby Pose) | आनंद बालासन योग



  1. जमीन पर चटाई बिछाकर पीठ के बल लेट जाए। 
  2. दोनों हाथों से दोनों पैरों के अंगूठे को पकड़े और छाती के पास लाये। जिसतरह कोई बच्चा पैरों को ऊपर उठाकर खुश होता है, ठीक उसीतरह इस क्रिया को करना है।
  3. धीरे धीरे अपने कूल्हों को खोलने की कोशिश करे। अपने सिर को फर्श से टिकाकर रखे ,और अपनी ठोड़ी को छाती से स्पर्श करे।
  4.  जितना पैरों को पास ला सकते है लाने का प्रयास करे। और गर्दन के पीछे और कंधों में दबाव बनाये रखिए।
  5. श्वास को सामान्य रूप से लेते रहे ,और मुद्रा में स्थिर बने रहे। 
  6. आप चाहे तो इस आसन का अभ्यास करते समय आप अपने कमर के निचे के अंगों को हिला सकते है। या चाहे तो किसी बालक की तरह पैरों के अंगूठों से खेल सकते है ।
  7. कुछ देर आसन में रुकने के बाद श्वास छोड़ते हुए पैरों को छोड़े और सामान्य अवस्था में आ जाए। 
  8. अभ्यास हो जानेपर १० मिनट तक विश्राम करे और शरीर एवं दिमाग को रिलैक्स करे।
  9. इस आसन का अभ्यास करते समय ख़ुशी और शांति का अनुभव करना चाहिए।





Health Benefit Of Happy Baby Pose | आनंद बालासन के स्वास्थ लाभ




  1. इस आसन का अभ्यास मेरुदंड को लचीला बनाता है तथा जाँघों और कूल्हे के भीतरी हिस्सों को फैलाने में मदद करता है। 
  2. यह पैरों और बाहु की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है। 
  3. क्योंकि इसका नाम ही आनंद बालासन है ,इसलिए ये साधक को शारीरिक एवं मानसिक रूप से तनावमुक्त करने में सक्षम है। 
  4. इस आसन का अभ्यास दिमाग की मांसपेशियों को गहन शांति का अनुभव कराता है। 
  5. एकाग्रता क्षमता तथा धारणा शक्ति को बलवान बनाता है।
  6. यह अनिद्रा ,उदासीनता ,अवसाद, तनाव ,हायपर टेंशन ,अतिनिद्रा को दूर करने में सहायक है। 
  7. इसके नियमित अभ्यास से फेफड़ों की कार्यक्षमता में बढ़ोतरी होती है।
  8. इसका अभ्यास छाती को चौड़ा कर शुद्ध प्राणवायु को शरीर में प्रवाहित करता है।
  9. नियमित रूप से इस आसन का अभ्यास पेट की आतंरिक मांसपेशियों की मालिश कर उन्हें मजबूत बनाता है। 
  10. कब्ज ,पेट फूलना ,भूख न लगना ,मल निष्कासन में परेशानी इत्यादि पाचन संबधी समस्याएं दूर करता है। 
  11. कमर के पीछे की त्रिकोणी हड्डी को आराम देने के लिए ये बेहतरीन आसन है।
  12. यह आसन शरीर में रक्तसंचार को नियमित कर त्वचा पर निखार लाने में सहायक है। 
  13. इस आसन का अभ्यास आपके अंदर छिपे छोटे बच्चे को ढूंढ निकालेगा।  इसके अभ्यास से मन में समर्पण की पवित्र भावना जागृत होती है। 




Precautions For Happy Baby Pose | आनंद बालासन में सावधानी





  • आनंद बालासन एक सरल आसन है जिसका अभ्यास  कर आप जीवन में ख़ुशी ढूंढ सकते है। 
  • पर जिन्हे उच्च रक्तचाप या घुटने की चोट है, उन्हें इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए। 
  • इसके अलावा मासिक धर्म होनेपर या गर्भवती महिलाओं को भी इस आसन से बचना चाहिए।


Few Things You Need To Know About Happy Baby Pose | ध्यान रखने योग्य बाते


  • योगासनों का अभ्यास करने से पहले आपका पेट खाली होना आवश्यक है। 
  • सुबह सवेरे "आनंद बालासन" का अभ्यास करना आपको सकारात्मक परिणाम दिलाता है। क्योंकि यही समय है जिस समय आप सभी चिंताओं तथा तान तनावों से मुक्त रहते है ,ऐसी अवस्था में अगर ऐसे आनंददायी आसन का अभ्यास किया जाए तो बात ही कुछ और होगी।
  • पर अगर आप ,काम के कारण सुबह अभ्यास नहीं कर पाते, तो शाम के समय भी आप इस आसन का अनुभव ले सकते है। बस आपको भोजन और अभ्यास के बिच कम से कम ५ घंटे का समय रखना आवश्यक है ,जिससे आपका भोजन पच जाए और आप नई ऊर्जा के साथ आसन के लिए तैयार हो पाए। 
  • इस आसन से पहले आप बालासन या वीरासन का अभ्यास कर सकते है।








 इस लेख में मैंने आपको "Ananda Balasana" के बारे में बताया। आज से ही अपने दैनिक योगसत्र में इस आसन को शामिल करे। इस आसन का अभ्यास करते समय अपने आप को बालक के रूप में देखना अच्छा अनुभव देता है। अगर आपको यह लेख उपयुक्त लगता है, तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे। आप अपनी राय कमेंट बॉक्स में दे सकते है। 
स्टैमिना बढ़ाने के लिए, ऐसे करे चतुरंग दंडासन | नहीं होगी कमजोरी की शिकायत

स्टैमिना बढ़ाने के लिए, ऐसे करे चतुरंग दंडासन | नहीं होगी कमजोरी की शिकायत

योग में वर्णित "चतुरंग दंडासन " एक योगासन है। इस आसन का अभ्यास शरीर के चार अंगों को मुख्य  रूप से प्रभावित करता है। इसका अभ्यास करते समय मेरुदंड , दोनों हाथ एवं पैर एक सीधी रेखा में संरेखित होते है। मेरुदंड को शक्तिशाली और शरीर के मुख्य अंगों को ऊर्जावान बनाता है। इसके अलावा इसे "Four-Limbed Staff Pose"  या "Low Plank" भी कहा जाता है। 



Chaturanga Dandasana | चतुरंग दंडासन

Chaturanga Dandasana | चतुरंग दंडासन




  1. इस आसन का अभ्यास करने के लिए निचे दरी या चटाई बिछाकर घुटनों के बल खड़े हो जाए।
  2. हाथों को सामने फर्श पर टिका दे।
  3. हाथों को सामने फर्श पर रखे ।
  4. पैरों को पीछे ले जाए और एड़ियों को ऊपर उठाये। इस अवस्था में शरीर की आकृति टेबल की तरह दिखाई देगी। 
  5. अपने मेरुदंड को सीधा रखे। ध्यान रखे की आपके दोनों हाथ एवं पैर एक दूसरे से समांतर दुरी बना रहे हो।
  6. अपनी उँगलियों को फैलाये। एड़ियों को ऊपर करे जिससे आपका वजन केवल आपके दोनों हाथ एवं पैरों के टखनों पर रहे।
  7. एक लंबी गहरी श्वास भरे,और पैरों के पंजों से लेकर मस्तक तक शरीर में खिंचाव पैदा करे। 
  8. श्वास को बाहर छोड़ते हुए हाथों को कोहनियों से मोड़े और आगे बढे। शरीर को जमीन से कुछ दुरी पर रोके जिससे आपकी ऊपरी भुजाये फर्श से समांतर रहे।
  9. इस अवस्था में अपनी पीठ बिल्कुल  सीधी रखे।
  10. आपकी कोहनिया ९० डिग्री के कोण में होनी चाहिए। कुछ देर इसी अवस्था में बने रहे और पुनः सामान्य स्थिति में आ जाये।








Chaturanga Dandasana Benefits | चतुरंग दंडासन के लाभ





  1. चतुरंग दंडासन का सीधा प्रभाव आपके मेरुदंड (रीढ़ की हड्डी ) पर पड़ता है।
  2. यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला और मजबूत बनाता है।
  3. इसके अभ्यास से पीठ ,कंधे ,एवं भुजाओं की आतंरिक मांसपेशिया सशक्त और बलवान बनती है।
  4. इसकी मदद से आप अपनी कलाई को शक्तिशाली बना सकते है।
  5. शरीर को टोन करने के लिए और शारीरिक मुद्रा को बेहतर बनाने के लिए ये एक अच्छे आसन के रूप में सामने आता है।
  6. नियमित अभ्यास से संतुलन शक्ति में वृद्धि होती है।
  7. ये दृढ़ इच्छाशक्ति का विकास करता है।
  8. चतुरंग दंडासन का नियमित अभ्यास कमजोरी दूर कर स्टैमिना को बढ़ाता है। 
  9. इसका नियमित अभ्यास व्यक्ति में समत्व की भावना को उजागर करता है।









Beginners Tips | शुरुवात के लिए टिप्स





  • शुरुवाती समय में जमीन पर अपने शरीर को अचल रख पाना कठिन लग सकता है।
  • इसे सरल बनाने के लिए आप आसन करते समय, घुटनों को जमीन पर रख सकते है।
  • जब आप पारंगत हो जाए तो घुटनों को ऊपर उठाकर इसका अभ्यास करे।








Chaturanga Dandasana Precautions | चतुरंग दंडासन में सावधानी





  • अगर आपके पास पीठ की निचले हिस्से की चोट या कंधों की समस्याएं है ,तो इस आसन का अभ्यास ना करे। 
  • गर्भवती महिलाओं को इस आसन का अभ्यास नहीं करने की सलाह दी जाती है।







Few Things You Need To Know | ध्यान रखने योग्य बाते





  • सुबह-सवेरे योगाभ्यास करना सबसे अच्छा माना जाता है।
  • इस आसन का अभ्यास करते समय आपका पेट खाली होना आवश्यक है।
  • इसलिए अगर आप शाम के समय आसनों का अभ्यास करते है, तो भोजन और अभ्यास के बिच कम से कम ६ घंटे का समय अवश्य रखे।




अभी आप "Chaturanga Dandasana" के बारे में जान चुके है। फिर भी अगर कोई सवाल हो तो आप कमेंट कर के पूछ सकते है। इसे अपने आसनों की सूचि में जरूर जोड़े इसका अभ्यास आपको गहन आत्मविश्वास की अनुभूति कराता है।
जानु शीर्षासन श्वास रोगों में हैं फायदेमंद , जरूर करें Head To Knee Pose और भी है फायदे

जानु शीर्षासन श्वास रोगों में हैं फायदेमंद , जरूर करें Head To Knee Pose और भी है फायदे

संस्कृत शब्द : जानुशीर्षासन ,जानु - घुटना ,शीर्ष - मस्तक ,आसन - मुद्रा। जानुशीर्षासन का अभ्यास हमें अनगिनत लाभ देता है। 
अष्टांग योग में वर्णित जानू शीर्षासन योग की प्राथमिक श्रृंखला का प्रमुख हिस्सा है। इस योगासन का अभ्यास करते समय सिर को घुटने से स्पर्श किया जाता है। हालांकि पहली बार इस आसन का नाम सुनकर ये शीर्षासन के समान लगता हो ,पर वास्तविकता में दोनों एक दूसरे से भिन्न है। अंग्रेजी में इसे Head To Knee Pose कहा जाता है। नियमित रूप से अगर इस आसन को किया जाए तो ये हमें अद्वितीय लाभ देता है।







Head To Knee Pose| जानुशीर्षासन योग

Head To Knee Pose| जानुशीर्षासन योग

  1. जमीन पर चटाई बिछाकर बैठ जाए। कमर को सीधा रखे। दोनों पैरों को सामने फैलाये। दाहिने पैर को सीधा रखते हुए बाए पैर को घुटने से मोडे।
  2. बाएं पैर के तलवे को दाहिने पैर की जांघ से सटा कर रखे। ध्यान रखे की बाया पैर ,दाहिनी जांघ की आतंरिक भागों से जुड़ा होना चाहिए।
  3. जब आप ऐसा  करते है ,तो आपका बायां पैर, आपकी नाभि और छाती से एक सीधी रेखा बनाता हो।
  4. एक लंबी श्वास ले और अपने धड़ को कमर से ऊपर की और बढाए। जैसे ही आप श्वास बाहर निकालेंगे आपके शरीर की ऊर्जा ,आपके बाए पैर से बहना शुरू हो जायेगी।
  5. फिर एक श्वास ले और आगे बढ़ते हुए हाथों को दाहिने पैर की उँगलियों तक ले जाए।
  6. उँगलियों को अपने दोनों हाथों से पकड़ ले और अपने मस्तक को घुटने पर रखने का प्रयत्न करे।
  7. अगर आप पहली बार इसे कर रहे है ,तो इसे करने में आपको कठिनाई आ सकती है। इस क्रिया को अधिक आसान बनाने के लिए श्वास लेते समय धड़ को आगे बढ़ाते जाए। 
  8. फिर भी अगर आप कठिनाई महसूस करते है ,तो ज्यादा दबाव ना डाले। नियमित अभ्यास से आप अपने मस्तक से घुटने को छू  सकते है।
  9. घुटने पर सिर रखकर इसी मुद्रा में बने रहे। लंबी और गहरी श्वास लेते रहे। वापस लौटने के लिए श्वास भरे और दाहिने घुटने को अलग करे। धड़ को ऊपर उठाकर सामान्य अवस्था में आ जाए।
  10. ५ मिनट तक विश्राम करे और पुनः इसे अपने दूसरे पैर के साथ दोहराये।
  11. इस आसन को करते समय अपना ध्यान नाभिचक्र पर स्थिर करे।








Janu Sirsasana Benefits  | जानुशीर्षासन के लाभ

Janu Sirsasana Benefits  | जानुशीर्षासन के लाभ

  1. ये योगासन मधुमेह और श्वास रोगों में फायदेमंद है 
  2. इस आसन का अभ्यास रान की नाड़ी ,जाँघों की मासपेशियां और कंधों के आतंरिक पेशियों को अच्छा खिंचाव देता है। 
  3. यह यकृत और गुर्दों को स्वस्थ और सक्रिय बनाये रखता है।
  4.  पेट की आतंरिक अंगों की मालिश कर पाचनतंत्र को मजबूत करता है।
  5. कब्ज ,अम्लता ,गैस ,मोटापा ,मलावरोध इत्यादि समस्याओं में लाभकारी है।
  6. यह आसन मस्तिक्ष को शांत बनाये रखता है।
  7. एकाग्रता क्षमता को बढ़ाकर स्मरणशक्ति में सुधार लाता है।
  8. यह प्रजनन प्रणाली को प्रभावित कर उसे स्वस्थ बनाता है।
  9. इस आसन का अभ्यास अनैश्चिक वीर्यपात को रोकता है।
  10. स्वप्नदोष तथा वीर्यविकारों को ठीक करता है।
  11. मासिक धर्म तथा रजोनिवृत्ति के लक्षणों को कम करने में सहायक है।
  12. सिरदर्द ,थकान ,तनाव,अवसाद,अनिद्रा ,उच्च रक्तचाप को कम करने में सहायक है।
  13. इसका अभ्यास व्यक्ति में नयी ऊर्जा और चैतन्य का जागरण करता है।









Beginners Tips | शुरुवात के लिए टिप्स



  • पहली बार इस आसन का अभ्यास करना कठिन हो सकता है। इसे सरल बनाने के लिए इस आसन से पहले पश्चिमोत्तानासन ,हस्तपादासन या हलासन का अभ्यास करे।
  • निचे झुकते समय शरीर पर अत्याधिक दबाव ना डाले। नियमित अभ्यास के साथ ये आसन सरल बन जाता है।










Janu Sirsasana Precautions | जानुशीर्षासन में सावधानी


  • इस आसन का अभ्यास घुटने की समस्या या चोट होनेपर ना करे।
  •  दस्त या अस्थमा से गंभीर पीड़ित होनेपर इसे ना करने की सलाह दी जाती है ।
  •  गंभीर पेट दर्द या बिमारी से पीड़ित है तो इस आसन से बचे। इसके अलावा हर्निया से ग्रस्त लोगों को भी  इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए।







Things You Need To Know | ध्यान रखने योग्य बाते





  • सुबह इस आसन का अभ्यास अधिक उपयुक्त रहता है। क्योंकि यही वो समय है जब आपका पेट खाली और मस्तिक्ष शांत रहता है।
  • आप चाहे तो शाम के समय भी इस आसन का अभ्यास कर सकते है ,बस अपने भोजन और अभ्यास के बिच कम से कम ५ घंटे का अंतर् रखना ना भूले।





 जानुशीर्षासन का अभ्यास मस्तिक्ष को पूर्ण तनावरहित करने में सक्षम है। इसे अपने दैनिक योगासनों में शामिल करना स्वास्थ की दृष्टी से अच्छा निर्णय साबित होगा। इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना भूले। आप अपनी राय या सवाल कमेंट कर के पूछ सकते है।
क्या शवासन आपको आंतरिक ऊर्जा ,मानसिक शांति और शारीरिक कष्ट से छुटकारा देता है ?

क्या शवासन आपको आंतरिक ऊर्जा ,मानसिक शांति और शारीरिक कष्ट से छुटकारा देता है ?

अष्टांग योग में वर्णित शवासन दिमाग को ताजगी एवं शरीर तनावरहित करने के लिए एक उत्तम योगासन है। इस आसन को करते समय, शरीर रचना किसी मृत व्यक्ति की तरह दिखाई देती है ,इसीलिए इसे शवासन के नाम से जाना जाता है। दूर से ये आसन, भले ही आपको सरल दिखाई दे परंतु वास्तविक रूप से अगर देखा जाए तो इस आसन को करते समय शरीर की समस्त मांसपेशियों को आंतरिक रूप से आराम देना पड़ता है। जो की शुरुवात में थोड़ा कठिन लगने लगता है। इस आसन का प्रयोग ज्यादातर लोग योगासन या व्यायामों के समाप्ति में करना पसंद करते है। पर इसके अलावा आप शवासन को एक प्राकृतिक चिकित्सा के स्थान पर भी कर सकते है। जब आप थकावट महसूस करने लगे और शरीर को आराम की सख्त आवश्यकता हो, तो केवल १० मिनट का अभ्यास ही, आपके शरीर और दिमाग को आराम पहुंचाने के लिए पर्याप्त है।   



Shavasana In Hindi - शवासन योग

Shavasana In Hindi - शवासन योग

  1. शवासन का अभ्यास करने के लिए जमीन पर चटाई बिछाकर पीठ के बल लेट जाए।
  2. अपने शरीर को आरामदायक स्थिति में रखे।
  3.  लेटने के लिए किसी भी गद्दे या तकिये का इस्तेमाल ना करे।
  4. आप केवल चटाई पर ही इस आसन की अनुभूति ले सकते है।
  5. अपने दिमाग से सभी विचारों को छोड़कर धीरे से अपनी आँखे बंद करे।
  6. अपने पैरों को एक दूसरे से अलग रखे कुछ इसप्रकार से जिससे पैरों के किनारे जमीन पर आराम करे।
  7. हथेलियों को भी अपनी बगल से थोड़ा दूर करे और हातों को आराम करने दे।
  8. इस अवस्था में हथेलियों के तलवे ऊपर की दिशा में रहते है।
  9. आपको कुछ इस तरह अपनी मुद्रा बनानी है ,जिससे आपका जीवित शरीर मरा हुआ दिखने लगे।
  10. यही पर आपके स्थिरता का परीक्षण शुरू होता है। शरीर को स्थिर रखते हुए ,अपने विचारों ,को खुला छोड़ दे और लंबी श्वास लेते रहे।
  11. इस आसन में यह ध्यान रखे की अभ्यास करते समय नींद नहीं लेनी है।
  12. पूर्ण शरीर को तनावरहित कर दे ,और मन ही मन शरीर का अवलोकन करते जाए।
  13. जिस जगह या अंग पर तनाव महसूस हो उसे तनावरहित करने का प्रयत्न करे।
  14. एक जरुरी बात इस क्रिया को करते समय अपनी एकाग्रता को भंग न होने दे।
  15. दीर्घ श्वास लेते रहे ,और मस्तिक्ष में शांति बनाये रखे। जैसे जैसे आप श्वास लेते है ,वैसे वैसे  आपके मस्तिक्ष की नाड़ियां सक्रीय होने लगती है। जिससे आपके मन में कई विचार एकसाथ आ सकते है।
  16. पर शांत रहकर केवल अपने शरीर के अवलोकन पर ध्यान बनाये रखे।
  17. लगभग १० मिनट बाद जब आप अपने आप को तरोताजा और शांत अवस्था में पाए। तो आँखे बंद रखते हुए अपने दाहिने  तरफ शरीर का भार देकर सुखासन में बैठ जाए।
  18. लंबा और गहन श्वास लेकर, अपने आस पास फैली प्राकृतिक संपदा ,असीम शांति का अनुभव करे।
  19.  कुछ देर इसी अवस्था में बैठे रहे ,और मन को शून्यता की और उजागर होने दे। अपनी आँखे खोले और सामान्य अवस्था में आ जाए।
  20.  इस आसन को दिन में एकबार करना ही पर्याप्त है। आप योगासनों और प्राणायाम का अभ्यास होने के बाद शवासन का अभ्यास कर सकते है।








 Benefits Of Shavasana Pose - शवासन के लाभ

Benefits Of Shavasana Pose - शवासन के लाभ


  1. शवासन हमारे शरीर के लिए एक आरामदायक मुद्रा है। इसके नियमित अभ्यास से शरीर और दिमाग ताजगी और शांति का अनुभव करता है।
  2. ये आपको ध्यान की और अग्रेसर करता है ,जिससे आप बाहरी दुनियाँ से हटकर अंतर्मन से जुड़ने लगते है।
  3. शवासन आपके शरीर में स्थित मृत कोशिकाओं को सक्रीय करता है और शरीर को आराम देता है।
  4. अगर आप इसे एकाग्रता के साथ करते है ,तो योगासनों और प्राणायाम के बाद  ये आपके शरीर को एक गहन शांति की स्थिति में पहुंचाता है।
  5.  उच्च रक्तचाप ,अवसाद ,तनाव ,डिप्रेशन को कम करता है।
  6.  इस आसन का अभ्यास करने से ह्रदय सुचारु ढंग से कार्य करने लगता है। कई तरह के गंभीर ह्रदय रोगों से आप नियमित शवासन का अभ्यास कर के बच सकते है ।
  7.  इसके अभ्यास से मस्तिक्ष तिष्ण और कुशाग्र बनता है। ये स्मरणशक्ति को विकसित कर एकाग्रता क्षमता को बढ़ाता है।
  8. शारीरिक कमजोरी तथा थकावट को दूर करने में शवासन अत्यंत लाभदायी है। ये शरीर की ऊर्जा को बढ़ाता है जिससे शरीर में स्फूर्ति और उत्साह बना रहता है।
  9. मासिक धर्म संबंधित समस्याओं को दूर कर उत्तेजना को दूर करने में सहायक है।
  10. अनिद्रा जैसी समस्याओं में शवासन रामबाण है।






Precautions For Shavasana - शवासन में सावधानी



  • शवासन पूर्ण रूप से सुरक्षित आसन है ,जिसका अभ्यास हर कोई कर सकता है।
  •  अभ्यास करने के लिए मानसिक एकाग्रता का होना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • जब आप इस आसन का अभ्यास करते है तो आपको नींद आने लगती है।
  • बस यही बात आपको ध्यान में रखनी है, की अभ्यास करते समय आप नींद ना ले और पूरी तरह सजग हो।
  • ऐसा करने के लिए नियमित रूप से लंबा श्वास लेते रहे और श्वासों पर ध्यान बनाये रखे।




शरीर और दिमाग को तरोताजा और फ्रेश रखने के लिए, शवासन  एक उपयुक्त आसन है। इसे अपने दैनिक योगासनों जरूर शमिल करे।इसका अभ्यास करना आपको अवश्य ही गहन शून्यता का अनुभव कराएगा।
जानकारी पसंद आनेपर अपने दोस्तों के साथ शेयर करें , ताकि वो भी इस आसन कें बारे में जान सके ।
ऐसे करे अर्ध मत्स्येन्द्रासन , नहीं होंगी शुगर और किडनी से जुडी बीमारियां और भी है लाभ

ऐसे करे अर्ध मत्स्येन्द्रासन , नहीं होंगी शुगर और किडनी से जुडी बीमारियां और भी है लाभ

" अर्ध मत्स्येन्द्रासन " हठ योग में किए जाने वाले १२ प्रमुख आसनों में से एक है।  इस आसन का नाम एक महान योगी मच्छिंद्रनाथ के नाम पर रखा गया है। संस्कृत शब्द अर्ध्य मत्स्येन्द्रासन  का निर्माण ४ नामों से मिलकर बना है। जो इस प्रकार है - अर्ध -मत्स्य - इंद्र - आसन , अर्ध यानी आधा ,मस्त्य मतलब मछली ,इंद्र यानी राजा और आसन यानी मुद्रा। अर्ध मत्स्येन्द्रासन का अभ्यास करते समय, शरीर को कमर से मोड़ा जाता है। इसलिए इसे वक्रासन के नाम से भी जाना जाता है।



Ardha Matsyendrasana - अर्ध मत्स्येंद्रासन योग

Ardha Matsyendrasana - अर्ध मत्स्येंद्रासन योग





  1. अर्ध मत्स्येन्द्रासन का अभ्यास किसी शांत और हवादार स्थान पर करे।
  2. निचे बैठ जाए और दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर पास लाये।
  3. अपने मेरुदंड को सीधा रखे , बाएं पैर के पंजे को अपने दाएं हिप्स (नितंब) के निचे रखे।
  4. अब अपने दाहिने पैर को बाएं पैर के ऊपर से ले जाकर ,बाएं पैर के घुटने के पास रख दे।
  5. इस स्थिति में कमर ,गर्दन,और कंधे को अपनी दाहिने और मोडे। इस बात का ध्यान रखे की आपकी रीढ़ की हड्डी सीधी हो।
  6. जब आप दाहिने और मुड़ते है, तो संतुलन बनाने के लिए अपने पीछे दाहिना हाथ और अपने बाएं हाथ को अपने दाहिने घुटने पर रख सकते है।
  7. अभ्यास के दौरान श्वास को सामान्य गति से लेते रहे।
  8. लगभग २ से ३ मिनट तक मुद्रा में बने रहे ,श्वास को बाहर निकालते हुए दाहिने हाथ को छोड़े और वापस सामान्य स्थिति में आ जाए।
  9. इस क्रिया को पैरों में बदलाव लाकर करे।
  10. इस आसन को करते समय आप अपने ध्यान को मेरुदंड या विशुद्ध चक्र पर लगा सकते है।






 Health Benefits Of Ardha Matsyendrasana Pose - अर्ध मत्स्येन्द्रासन के लाभ

Health Benefits Of Ardha Matsyendrasana Pose - अर्ध मत्स्येन्द्रासन के लाभ




  1. इस आसन के नियमित अभ्यास से मेरुदंड अधिक शक्तिशाली और लचीला होता है।
  2. इसका अभ्यास पेनक्रिया की मालिश कर उन्हें उत्तेजित करता है ,जिससे मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों को काफी हद तक सहायता मिल जाती है।
  3. नियमित अभ्यास से शरीर एड्रेनाइल और पित्त स्रावों को नियंत्रित करने में सक्षम बनता है।
  4.  स्लिप डिस्क संबंधित बीमारियों को ठीक करने सहायक है।
  5. इसके अभ्यास से पेट पर विशिष्ट दबाव पड़ता है तथा पेट के आंतरिक अंगों की मालिश करता है।
  6. जिसके कारण पाचनतंत्र मजबूत बना रहता है साथ ही पाचक रस को बढ़ाने में भी लाभकारी है।
  7. इसका अभ्यास व्यक्ति को तनाव एवं चिंता से मुक्त कर देता है।
  8. यह छाती को चौड़ा कर ,आंतरिक कोशिकाओं को खोलता है,जिससे अधिक से अधिक शुद्ध प्राणवायु साधक ग्रहण कर पाता है। 
  9. खून को स्वच्छ बनाकर रोगप्रतिकारक शक्ति को बढ़ाता है।
  10. प्रजनन तंत्र के साथ ही मूत्र प्रणाली को भी निरोगी बनाये रखने में ये अपनी अहम् भूमिका निभाता  है। 
  11. स्त्रियों के मासिक धर्म संबंधित समस्याएं तथा गुप्तरोग एवं वीर्यविकारों में लाभकारी है।
  12. नाभि चक्र को मजबूत कर कुंडलिनी जागरण में सहायक है।








Keep Precautions While Practicing This Asana - सावधानी



  •  इस आसन को करते समय पेट के विशिष्ट अंगों पर दबाव पड़ता है। इसलिए मासिक धर्म तथा गर्भावस्था के दौरान इस आसन को ना करे।
  • जो लोग गंभीर स्लिप डिस्क या मेरुदंड की समस्या से पीड़ित है ,उन्हें इस आसन से बचना चाहिए।
  • हर्निया या अल्सर से पीड़ित व्यक्ति अपने डॉक्टर की सहमति के साथ और प्रमाणित योग शिक्षक की देखरेख में ही इस आसन का अभ्यास करे।
  • दिल ,दिमाग और पेट की सर्जरी होनेपर भी इस आसन को ना करे।










Few Things You Need To Know Before Doing Above Pose - ध्यांन रखने योग्य बातें




  •   ये जरुरी है की इस आसन का अभ्यास करते समय आपका पेट खाली हो।
  • इसलिए ये अच्छा होगा की आप इसका अभ्यास सुबह करे।
  • अन्य समय इसका अभ्यास करने के लिए भोजन और अभ्यास में ४ से ५ घंटे का समय अवश्य रखे।






इस आसन का अभ्यास आपको विशिष्ट अनुभूति कराता है।  एक बार जब आप इसका अभ्यास करेंगे तो निश्चित  ही ये आपको अद्वितीय लाभों से परिचित कराएगा। अगर आपको ये लेख पसंद आता है तो आप कमेंट कर के अपनी राय दे सकते है। अपने दोस्तों के साथ इसे शेयर करना ना भूले
पेट को स्वस्थ रखना चाहते है ,तो जरूर करें अर्ध हलासन योग ,और भी है फायदे

पेट को स्वस्थ रखना चाहते है ,तो जरूर करें अर्ध हलासन योग ,और भी है फायदे

योग में वर्णित अर्ध हलासन का अभ्यास पेट की समस्याओं में रामबाण की तरह काम करता है। जो व्यक्ति हलासन का पूर्ण अभ्यास नहीं कर पाते ,उन्हें अर्ध हलासन का अभ्यास करना चाहिए। हलासन का अभ्यास करते समय पैरों को पीछे ले जाया जाता है। जो हर कोई आसानी से नहीं कर सकता ,विशेषतः मोटापे से ग्रसित लोगों को हलासन का अभ्यास एक कष्टकर कार्य लगता है। ये आसन हलासन की आधी क्रिया को पूर्ण करता है।








Ardha Halasana In Hindi | अर्ध हलासन योग

Ardha Halasana In Hindi | अर्ध हलासन योग




  1. अर्ध हलासन का अभ्यास किसी शांत और स्वच्छ जगह पर करना चाहिए। इस आसन के अभ्यास हेतु जमीन पर चटाई बिछाकर सीधे शवासन की मुद्रा में लेट जाए।
  2. दोनों पैरों को एकसाथ जोड़ दे ,और दोनों हथेलियों को अपनी जाँघों पर रख दे।
  3. एक लंबी श्वास ले ,और  घुटनों को ना मोड़ते हुए ,दोनों पैरों को सामान रूप से ऊपर उठाये।
  4. पैरों को 90 डिग्री के कोण में स्थिर रखे और जितनी देर आप इस अवस्था में रुक सकते है ,रुकने का प्रयत्न करे। इस समय श्वास को अपनी शक्ति अनुसार भीतर ही रोक कर रखे।
  5. कुछ देर बाद श्वास को छोड़ते हुए पैरों को निचे सामान्य अवस्था में लाये।
  6. इस आसन को ३ से ५ बार दोहराये। 
  7. यह आसन करते समय आप अपना ध्यान नाभि ,भृकुटि या पैरों के खिंचाव पर केंद्रित कर सकते है।









Health Benefits Of Ardha Halasana | अर्ध हलासन के स्वास्थ्य लाभ


  1. इस आसन का नियमित अभ्यास पेट को विशेष रूप से प्रभावित करता है।
  2. यह पाचनतंत्र को मजबूत बनाता है। मंदाग्नि ,भूक न लगना ,अन्न न पचना ,कमजोरी को दूर करता है।
  3. रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर भूक में सुधार लाता है।
  4. इसके अभ्यास से रक्तप्रवाह निचे से ऊपर की और होने लगता है ,जिससे शरीर के प्रत्येक अंगों को शुद्ध प्राणवायु मिलती है।
  5. संतुलन शक्ति को बढ़ाने के साथ साथ पैरों और जाँघों की मांसपेशियों को मजबूत और शक्तिशाली बनाता है।
  6. मोटापे से पीड़ित व्यक्तियों को इस आसन का अभ्यास नियमित रूप से करना चाहिए।
  7. यह शरीर की अतिरिक्त चर्बी एवं वसा को कम करता हैं और शरीर में नयी ऊर्जा को उत्पन्न करता है।
  8. ये आसन वजन कम करने में अत्यंत उपयुक्त है।
  9. असंतुलित हार्मोन्स को संतुलित बनाये रखता है।
  10. मल निष्कासन में मदद करता है,और पुराने से पुराने वायुविकारों से मुक्त करता है।
  11. दिमाग को शांत बनाये रखता है ,अत्यधिक तनाव से बचाता है।
  12. एकाग्रता क्षमता को बढ़ाकर धारणा को बल देता है।



Precautions For Half Plough Pose | अर्ध हलासन में सावधानी





  • इस आसन का अभ्यास उन लोगों के लिए नहीं है ,जो ह्रदय की समस्याओं से पीड़ित है।
  • इसके अलावा पीठदर्द और उच्च रक्तचाप की समस्याओं से पीड़ित व्यक्तियों को भी इस आसन से बचना चाहिए।




ध्यान रखने योग्य बाते


  • इस आसन का अभ्यास भी बाकी योगासनों की तरह खाली पेट करना चाहिए।
  • सुबह सूर्योदय का समय  किसी भी योगासन का अभ्यास करने के लिए उपयुक्त समय होता है।
  •  फिर भी अगर आप शाम के समय योग करते है ,तो भोजन और अभ्यास के बिच कुछ समय का अंतर जरूर रखे।






अब देर ना करे ,आज से ही अपने योगसत्र में अर्ध हलासन को शामिल करे। अगर आपको ये पोस्ट Helpful लगती है ,तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर Share करे। आप अपनी राय Comment Box में दे सकते है।

ऐसे करेंगे कर्णपीड़ासन का अभ्यास तो नहीं होंगी कान से जुडी समस्याएं , और भी है लाभ

ऐसे करेंगे कर्णपीड़ासन का अभ्यास तो नहीं होंगी कान से जुडी समस्याएं , और भी है लाभ

संस्कृत शब्द : कर्णपीड़ासन  का अर्थ कर्ण - कान ,पीड़ा - दुःख ,आसन - मुद्रा  होता है। इस आसन का अभ्यास करने से कान से जुडी सभी समस्याएं खत्म हो जाती है। 

योग में वर्णित कर्णपीड़ासन  एक उन्नत योगासन है। पहली बार इसका अभ्यास करते समय पीड़ा का अनुभव होता है। इसलिए इस आसन का अभ्यास करने से पहले यह आवश्यक है की आप हलासन और सर्वांगासन में पूरी तरह पारंगत हो जाए। जब आप इन दोनों आसनों में महारथ हासिल करते है ,तो आपके लिए कर्णपीड़ासन का अभ्यास करना सरल बन जाता है। इस आसन को " राजा हलासन" के रूप में भी जाना जाता है ,क्योंकि हलासन का अभ्यास किये बिना इस आसन को करना शारीरिक पीड़ा देता है। यह आसन आपके मेरुदंड को विस्तारित कर उसे बेहतरीन खिंचाव देता है ,और अनगिनत शारीरिक तथा मानसिक लाभ प्रदान करता है।



Karnapidasana Yoga | कर्णपीड़ासन योग

Karnapidasana Yoga | कर्णपीड़ासन योग




  1. इस आसन के अभ्यास के लिए निचे दरि बिछाकर पीठ के बल लेट जाए।
  2. हाथों को बगल में रखे और पैरों को सीधा रखे। श्वास भरे और हाथों मजबूती से फर्श पर रखे। 
  3. पैरों को एकसाथ ऊपर हवा में उठाये, श्वास छोड़ते हुए दोनों पैरों को सिर के ऊपर हलासन की स्थिति में ले जाए।
  4. इस अवस्था में दोनों हाथों को, कंधों के समांतर नीचे फर्श पर एक दूसरे के साथ फसाकर रखे। इससे आप ऊपर उठे हुए शरीर को सहारा दे सकते है।
  5. इसी स्थिति में बने रहे और दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर कंधों के करीब लाये,और कानों से चिपका दे।
  6. इस अभ्यास के दौरान अपनी पीठ को ज्यादा ढीला ना छोड़े ,और सामान्य गति से श्वास लेते रहे। कुछ देर इसी अवस्था में रुके।
  7. वापस आने के लिए पैरों को सीधा करे और श्वास छोड़ते हुए पैरों को निचे लाये। कुछ देर विश्राम करे और फिर इसी क्रिया को कम से कम ४ से ५ बार करे।
  8. इस आसन का अभ्यास करते समय आप अपना ध्यान मूलाधार स्थान या श्वासों पर केंद्रित कर सकते है।










Karnapidasana Benefits | कर्णपीड़ासन के फायदे



  1. इस आसन का नियमित अभ्यास आपकी रीढ़ की हड्डी को विस्तारित करने में मदद करता है।
  2. इसका सीधा प्रभाव नाभिचक्र पर पड़ता है। ये जठराग्नि को प्रदीप्त कर पाचनक्षमता को बढ़ाता है।
  3. नियमित रूप से कर्णपीड़ासन का अभ्यास पीनियल ग्रंथि को उत्तेजित करता है ,जो थायरॉइड जैसी समस्याओं के लिए लाभकारी है।
  4. छाती को चौड़ा कर फेफड़ो में शुद्ध प्राणवायु का संचरण करता है।
  5. यह फेफड़ों को मजबूत बनाकर अस्थमा जैसे श्वासनविकारों को दूर रखता है।
  6. कंधों और बाजुओं को फ़ैलाने में मदद करता है।
  7. उच्च रक्तचाप को नियंत्रित रखता है।
  8. मासिक धर्म तथा रजोनिवृत्ति की समस्याओं को दूर करता है।
  9. इससे रक्तसंचार मस्तिक्ष की तरफ होने लगता है ,ये तनाव को दूर कर मस्तिक्ष को शांत बनाये रखता है।
  10. यह थकान ,अनिद्रा ,अतिनिद्रा ,बांझपन ,डिप्रेशन ,चिंता ,सिनोसिटिस जैसे रोगों को दूर करे में सहायक है।
  11. यह कूल्हों ,कमर ,जाँघे और कंधों को टोन करने में मदद करता है।
  12. ये कान की आतंरिक कोशिकाओं को ऊर्जा और आराम पहुंचाता है।
  13. आँखों की रौशनी बढ़ाने में सहायक है।
  14. असमय बालों का सफ़ेद होना तथा बालों का गिरना रोकता है।
  15. बुद्धि को कुशाग्र बनाकर एकाग्रता क्षमता को विकसित करता है।
  16. इसका अभ्यास व्यक्ति में सहनशीलता ,शांति और धैर्य की प्रवृति को बढ़ाता है।







Karnapidasana Precautions | कर्णपीड़ासन में सावधानी





  • इस आसन का अभ्यास उच्च रक्तचाप ,दस्त ,माहवारी ,गर्दन में गंभीर चोट होनेपर नहीं करना चाहिए।
  • इस आसन में महारथ हासिल करने के आपको हलासन में पारंगत होना आवश्यक है।
  • इसलिए पहली बार इस आसन का अभ्यास सावधानीपूर्वक करे।






Things You Need To Know |  ध्यान रखने योग्य बाते





  • बाकी योगासनों की तरह इस आसन का अभ्यास भी आपको खाली पेट करना है।
  • सुबह सूर्योदय का समय योगासन या कसरत के लिए अच्छा होता है। पर अगर शाम को आप योगाभ्यास करते है ,तो आपको भोजन और अभ्यास के बिच कुछ अंतर् छोड़ना होगा।





इस लेख में मैंने आपको कर्णपीड़ासन योग  के बारे में जानकारी दी। कर्णपीड़ासन का अभ्यास हमें अनगिनत शारीरिक और मानसिक स्वास्थ लाभ प्रदान करता है। बस इसे धैर्य और समझदारी के साथ करना आवश्यक है। इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे। आप अपनी राय कमेंट बॉक्स में छोड़ सकते है।