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शलभासन योग हैं गंभीर बीमारियों का काल रोजाना करे अभ्यास | Shalabhasana Yoga

Shalabhasana Yoga संस्कृत : शलभासन , शलभ - टिड्डी ,आसन - मुद्रा योग में वर्णित शलभासन एक सरल योगासन है। शलभ या टिड्डी एक कीड़ा है ,जो मुख्यत...

शलभासन योग हैं गंभीर बीमारियों का काल रोजाना करे अभ्यास | Shalabhasana Yoga

शलभासन योग हैं गंभीर बीमारियों का काल रोजाना करे अभ्यास | Shalabhasana Yoga

Shalabhasana Yoga संस्कृत : शलभासन , शलभ - टिड्डी ,आसन - मुद्रा

योग में वर्णित शलभासन एक सरल योगासन है। शलभ या टिड्डी एक कीड़ा है ,जो मुख्यतः घास पर पाया जाता है। इस आसन का अभ्यास करते समय व्यक्ति  की रचना  ' टिड्डी किटक ' के समान दिखाई देती है ,इसीलिए यह शलभासन के नाम से जाना जाता है।  इसका अभ्यास मेरुदंड में एक अच्छा खिंचाव पैदा कर मांसपेशियों को मजबुत बनाता है। 


Shalabhasana Yoga  | शलभासन योग

Shalabhasana Yoga  | शलभासन योग




  1. इस आसन का अभ्यास किसी शांत और स्वच्छ जगह पर करे।
  2. जमीन पर चटाई बिछाकर पेट के बल लेट जाए।
  3. दोनों हाथों को जाँघों के निचे फर्श से सटाकर रखे।
  4. एक लंबी गहरी श्वास लेते हुए, दोनों पैरों  को घुटनों से बिना मोड एकसाथ हवा में ऊपर उठाये।
  5. इस स्थिति में शरीर का पूरा वजन आपकी निचले हिस्से की पसलियों तथा पेट पर पड़ता है।
  6. कम से कम १ मिनट तक इस मुद्रा में रुकने का प्रयत्न करे।
  7. कुछ देर रुकने के बाद श्वास छोड़ते हुए पैरों को निचे लाये, और शरीर को आराम दे।
  8. कुछ देर विश्राम के बाद पुनः इस क्रिया को दोहाराये। दिनभर में आप इस आसन का अभ्यास ४ से ५ बार कर सकते है।






Shalabhasana Benefits | शलभासन के लाभ





  1. नियमित रूप से इस आसन का अभ्यास संपूर्ण शरीर को सक्रिय और तरोताजा करता है।
  2. इसका अभ्यास शरीर में  रक्त संचालन को बढ़ाता है।
  3. खून को परिशुद्ध कर रोगप्रतिकारक क्षमता का विकास करता है।
  4. इसका अभ्यास हाथ ,कंधे ,जांघ ,एवं कूल्हों की मांसपेशियों को मजबूती  प्रदान करता है।
  5. शरीर के आंतरिक अंगों की मालिश कर उन्हें सक्रीय करता है।
  6. यह आपकी शारीरिक रचना में सुधार लाने के लिए बेहतरीन आसनों में से एक है।
  7. यह छाती को चौड़ा एवं फेफड़ों को मजबूत बनाता है।
  8. पीठदर्द से होनेवाली परेशानियों से राहत दिलाता है।
  9. इसके नित्य अभ्यास से चयापचय संस्था नियंत्रित और स्वस्थ बनी रहती है।
  10. हार्मोन्स संबंधित समस्याओं को दूर कर उन्हें नियंत्रित रखने में मदद करता है।
  11. इसका नियमित अभ्यास थॉयरॉइड को दूर रखने में सहायक है ।
  12. ह्रदय को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाता है।
  13. शारीरिक तथा मानसिक संतुलन में वृद्धि करता है।
  14. यह दिमाग को तनावरहित एवं शांत बनाये रहता है।
  15. अवसाद ,डिप्रेशन ,चिंता को दूर कर स्मरणशक्ति  में बढ़ोतरी करता है।
  16. त्वचा को चमकदार बनाता है।
  17. अत्यधिक चर्बी को दूर कर वजन घटाने में सहायक है। 
  18. बालों की समस्याएं ,असमय बालों का सफ़ेद होना रोकता है।
  19. गले के अधिकतर रोग ख़त्म करता है।
  20. थकान ,अनिद्रा ,भय ,इत्यादि मानसिक विकारों का शमन करता है।
  21. यह उत्साह ,निर्भयता ,कठोरता ,सहनशीलता जैसे भावों को जगाता है।









Shalabhasana Precautions | सावधानी 


  • गर्दन या मेरुदंड पर गंभीर चोट या अन्य समस्या होनेपर इस आसन को ना करे।
  • यह आसन गर्भवती स्त्रियों के लिए नहीं है।
  • गंभीर सिरदर्द या माइग्रेन से पीड़ित होनेपर इसका अभ्यास ना करे।













Beginner Tips | शुरू करने के लिए टिप्स



  • पहली बार इस आसन का अभ्यास किसी मुलायम चटाई या कंबल पर करना चाहिए।
  • शुरुवाती समय में संतुलन बनने तक अपने किसी साथी या गुरु के सानिध्य में इसका अभ्यास करे।









Some Points You Need To Know | ध्यान रखने योग्य बाते


  • इस आसन का अभ्यास खाली पेट करे।
  • सुबह सूर्योदय के समय इसका अभ्यास करने के लिए उपयुक्त माना जाता है।
  • आप शाम के समय भी इस आसन का अभ्यास कर सकते है। बस आपको भोजन और अभ्यास के बिच कम से कम ५ घंटे का समय छोड़ना आवश्यक है।





अब आप " Shalabhasana Yoga" के बारे में जान चुके हैं ,नियमित रूप से किया गया शलभासन का अभ्यास आपके जीवन में स्वास्थ रूपी अनमोल खजाना लाने में सक्षम हैं। इसलिए आज से ही अपने दैनिक योगक्रम में शलभासन को स्थान दे। 
जानकारी पसंद आनेपर इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना भूले। 
कुर्मासन योग से पाए कई बीमारियों से छुटकारा , दिमाग रहेगा शांत | Kurmasana Yoga

कुर्मासन योग से पाए कई बीमारियों से छुटकारा , दिमाग रहेगा शांत | Kurmasana Yoga

 कुर्मासन  एक उन्नत योगासन है। संस्कृत नाम : कुर्मासन ,कुर्मा - कछुआ ,आसन - मुद्रा होता है। इसका अभ्यास व्यक्ति को मानसिक शांति प्रदान करता है। 

योग में वर्णित कुर्मासन का अभ्यास करते समय, व्यक्ति की मुद्रा कछुए के समान दिखाई देती है। इसका अभ्यास आपको बाहरी तनाव एवं चिंताओं को काटकर ,आतंरिक शांति की भावना प्रदान करता है। कछुए को संयम का प्रतिक माना जाता है। इस योगासन का अभ्यास आपको शारीरिक एवं मानसिक रूप से संयमित और स्थिर रखने में मदद करता है।





Kurmasana Yoga | कुर्मासन योग

Kurmasana Yoga | कुर्मासन योग



  1. जमीन पर चटाई बिछाकर पैरों को सामने फैलाकर बैठ जाए।
  2.  दोनों हाथों को कूल्हों के पास फर्श पर टिका दे।
  3. मेरुदंड को सीधा रखे और जांघों को जमीन पर दबाये।
  4. एक लंबी और गहरी श्वास ले। दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर कूल्हों के पास लाये।
  5. धड़ को आगे ले जाए और दोनों हाथों को ,पैरों के निचे ले जाए।
  6. इसी स्थिति में आगे बढ़ते जाए ,आसानी के लिए पैरों को आगे फैलाते जाए।
  7. कंधो पर खिचाव महसूस करे। आगे बढ़ते हुए धड़ को फर्श पर रख दे। अपनी भुजाओं को जितना हो सके फैलाने की कोशिश करे।
  8. मस्तक को जमीन पर रख दे और कुछ देर इसी अवस्था में बने रहे।
  9. कम से कम ४० सेकंड इस अवस्था में रुकने के बाद पुनः सामान्य स्थिति में आ जाए।









Kurmasana Benefits | कुर्मासन के लाभ

  1. इसके नियमित अभ्यास से आप प्राकृतिक और नियमित श्वास लेते है ,जिससे कई बीमारिया अनायास ही समाप्त हो जाती है।
  2. ये आपकी शारीरिक रचना में सुधार करने के लिए बेहतरीन आसन है।
  3. इससे पाचन प्रणाली तंदरुस्त बनी रहती है।
  4. यह कब्ज ,अपच ,अम्लता ,गैस ,अकड़न ,भूक न लगना ,मोटापा ,थकान ,कमजोरी ,अनिद्रा को दूर करने में सहायक है।
  5. इससे फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार होता है,ये अस्थमा जैसे शवनविकारों को दूर करता है। 
  6. इसके अभ्यास से शुद्ध खून मस्तिक्ष की और बहने लगता है।
  7. ये स्मरणशक्ति को बढ़ाता है ,और धारणा शक्ति को बलवान बनाता है।
  8. इसका नियमित अभ्यास आपके जांघ ,कूल्हे ,कंधे एवं पीठ की मांसपेशियों को फैलाता है।
  9. ये आसन मस्तिक्ष को ध्यान साधना के लिए तैयार करता है।
  10. शरीर की अरबों खरबों पेशियों को फ्रेश करता है और शरीर को तरोताजा रखता है।
  11. ये आसन त्वचा संबंधी बीमारियों में लाभकारी है।
  12.  गर्भाशय ग्रीवा से पीड़ित रोगियों के लिए अच्छा आसन है।
  13. नियमित कुर्मासन का अभ्यास व्यक्ति में उत्साह ,साहस ,कठोरता ,सहनशीलता ,एकाग्रता एवं शांति को उजागर करता है।









Beginner Tips |  टिप्स



  • कुर्मासन उन्नत अवस्था का योगासन है। इसमें महारथ हासिल करने के लिए धैर्य रखना आवश्यक है।
  • समय के साथ साथ आप इसमें पारंगत हो सकते है। इसके लिए आपको नियमित और सावधानीपूर्वक अभ्यास करना आवश्यक है।
  • अगर आप शुरुवात में ही इसका अभ्यास करना चाहते है, तो आपको शारीरिक पीड़ा का सामना करना पड़ सकता है।
  • पहली बार इसका अभ्यास करते समय, आप अपने पैरो के निचे कोई मुलायम कंबल या तकिया रख सकते है।  







Kurmasana Precautions | कुर्मासन में सावधानी



  • यह एक कठिन योगासनों में से एक आसन है। इसमें पारंगत होने के लिए आपको अपने शरीर को इसके लिए पूरी तरह सक्षम बनाना होगा।
  • गठिया एवं कटिस्नायुशील जैसी बीमारियों में इस आसन को ना करे।
  • इसे माहवारी और गर्भावस्था के दौरान भी नहीं करना चाहिए।
  • हाथ ,पैर ,कंधे एवं पीठदर्द से पीड़ित होनेपर इस आसन को ना करे।
  • गंभीर पीठदर्द या पेट की सर्जरी या समस्या होनेपर भी इस आसन से बचना चाहिए।










Things You Need To Know | ध्यान रखने योग्य बाते





  • इस आसन का अभ्यास सुबह ब्रम्हमुहर्त में करना शुभ परिणाम देता है।
  • आप चाहे तो इसे शाम के समय भी कर सकते है। बस आसन करते समय आपका पेट खाली होना आवश्यक है।
  • इसके लिए भोजन और अभ्यास के बिच कम से कम ६ घंटे का समय जरूर रखे।









इस लेख में मैंने आपको Kurmasana Yoga के बारे में बताया। कुर्मासन का नियमित अभ्यास आपको कई सारी परेशानियों से बचाता है ,आवश्यक है इसे योग्य गुरु के सानिध्य में करने की। किसी भी योगासन या प्राणायाम का अभ्यास शांत और निवांत स्थान पर करना उपयुक्त होता है। जहा आपको प्राकृतिक शांति का अनुभव हो।

रोजाना उत्कटासन का अभ्यास करेंगे तो दूर रहेंगी ये बीमारियां | Utkatasana Yoga

रोजाना उत्कटासन का अभ्यास करेंगे तो दूर रहेंगी ये बीमारियां | Utkatasana Yoga

संस्कृत : उत्कटासन ,उत्कट - जंगली ,आसन - मुद्रा
योग में वर्णित उत्कटासन एक प्रभावी योगासन है। इसे कुर्सी आसन या Chair Pose Yoga भी कहा जाता है। भले ही यह सरल आसन दिखाई दे ,पर इसका अभ्यास करना एक चुनौती पूर्ण कार्य है। किसी कुर्सी पर बैठना कोई कठिन कार्य नही है। पर इस आसन का अभ्यास करते समय बिना किसी कुर्सी के ,केवल काल्पनिक कुर्सी पर बैठना पड़ता है। इसीकारण यह कुर्सी आसन के नाम से विख्यात है। 



Utkatasana Yoga | उत्कटासन योग

Utkatasana Yoga | उत्कटासन योग


  1. निचे चटाई बिछाकर पैरों में अंतर लेकर खड़े हो जाए।
  2. हाथों को ऊपर ले जाए और जोड़ दे।
  3. दोनों हाथों को कोहनियों से मोड़े बिना सीधा बना के रखे।
  4. पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए कूल्हों को निचे की और ले आये। जैसे आप किसी कुर्सी पर बैठे है।
  5. निचे आते  समय मेरुदंड ,छाती और गर्दन को सीधा बनाये रखे। इसी स्थिति में  कुछ देर बने रहे।
  6. श्वासों को सामान्य रूप से चलने दे।
  7. इस अवस्था में अनुभव करे की आप कुर्सी पर बैठकर कोई पुस्तक या अखबार पढ़ रहे है।
  8. कुछ देर बाद सामान्य अवस्था में आ जाए।
  9. उपरोक्त क्रिया को आप ४ से ५ बार दोहरा सकते है।







Utkatasana Benefits | उत्कटासन के लाभ

Utkatasana Benefits | उत्कटासन के लाभ




  1. यह आसन विशेषकर पैर,टखने ,घुटने एवं जाँघों की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है।
  2. इसका अभ्यास कूल्हों की पेशियों को फैलाता है, और उन्हें सशक्त बनाता है।
  3. नियमित इसके अभ्यास से अनावश्यक वसा (चर्बी ) दूर होती है। यह वजन कम करने में सहायक आसन है।
  4. नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी ,कूल्हे ,एवं घुटनों को एक बेहतरीन खिंचाव मिलता है।
  5. ये रोगप्रतिकारक शक्ति को बढ़ाकर शरीर के सभी अंगों को पुष्ट और मजबूत करता है।
  6. पीठदर्द एवं जोड़ों के दर्द से मुक्ति दिलाता है।
  7. यह संतुलन शक्ति को बढ़ाता है।
  8. दिमाग को ताजा एवं स्वस्थ बनाये रखता है।
  9. इसका नियमित अभ्यास सहनशीलता ,कठोरता ,दृढ़ता को बढ़ाता है।





Beginners Tips | शुरुवात के लिए टिप्स


  • शुरुवाती समय में इस आसन का अभ्यास कठिन लगता है ,इसे आसान बनाने के लिए पहली बार इसका अभ्यास दीवार के सहारे करे।
  • अभ्यास करने के लिए दीवार से कुछ दुरी पर खड़े रहे ,जिससे अभ्यास करते समय आप अपने मेरुदंड का निचला हिस्सा दीवार से टिका सकते है।
  • नियमित अभ्यास से जब आप इस आसन के लिए पूरी तरह तैयार हो तो दीवार के बिना इसका अभ्यास करे।









Utkatasana Precautions | उत्कटासन में सावधानी



  • घुटने की पुरानी समस्या से पीड़ित एवं हड्डियों की कमजोरी या समस्या होनेपर इस आसन का अभ्यास ना करे।
  • निम्न रक्तचाप ,अनिद्रा ,अत्याधिक थकान होनेपर भी इस आसन से बचना चाहिए।
  • गर्भावस्था एवं माहवारी होनेपर इसका अभ्यास ना करे।
  • कमर के निचे किसी भी अंग में समस्या होनेपर भी इसे नहीं करना है।








Things You Need To Know | ध्यान रखने योग्य बाते



  •  इस आसन का अभ्यास खाली पेट किया जाना चाहिए।
  • सुबह ब्रम्हमुहूर्त का समय कसरत एवं योग के लिए उपयुक्त माना जाता है। किसी कारण सुबह अभ्यास ना होनेपर ,शाम के समय इसका अभ्यास करे।
  • केवल भोजन और अभ्यास के बिच ६ घंटे का अंतर् छोड़ना याद रखे।




ऊपर मैंने आपको Utkatasana Yoga के बारे में जानकारी दी। क्या आपको यह जानकारी उपयुक्त लगी ?  आप अपनी राय कमेंट बॉक्स में दे सकते है। लेख पसंद आनेपर इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना भूले। 


  
ऐसे करे अर्ध पिंच मयूरासन योग , हड्डियां रहेंगी मजबुत |  Ardha Pincha Mayurasana

ऐसे करे अर्ध पिंच मयूरासन योग , हड्डियां रहेंगी मजबुत | Ardha Pincha Mayurasana

 योग में वर्णित अर्ध पिंच मयूरासन  एक स्थायी और स्थिर आसन है। इस नाम के अलावा, इस आसन को Dolphin Yoga Pose  भी कहा जाता है । 
अर्ध - आधा ,पिंच - पंख ,मयूर - मोर ,आसन - मुद्रा । जब आप इस आसन का अभ्यास  करते है ,तो आपकी शारीरिक मुद्रा उलटे V की तरह दिखाई देती है।   जिसतरह अधो मुख श्वानासन का अभ्यास किया जाता है। ठीक उसी तरह "Dolphin Yoga"  को भी किया जाता है। अंतर सिर्फ इतना है की इस आसन का अभ्यास करते समय  हथेलियों को कोहनी तक फर्श से सटाकर रखना पड़ता है। और सिर जमीन पर आराम करता है। 



Ardha Pincha Mayurasana In Hindi | अर्ध पिंच मयूरासन योग

Ardha Pincha Mayurasana In Hindi | अर्ध पिंच मयूरासन योग




  1. इस आसन के लिए घुटनों के बल बैठ जाए। हाथों को सामने फर्श से सटाकर रखे। हाथों से लेकर  कोहनियों तक का भाग जमीन पर सटा दे।
  2. जब आप ऐसा करते है तो सुनिश्चित करे ,की आपके कंधे और कोहनिया सीधी रेखा में हो। पैरों के तलवों को जमीन से सटाकर रखे और कूल्हों को ऊपर उठाये।
  3. ऐसा करते समय अपने हाथ एवं पैरों को स्थिर रखे। आप अपने घुटनों को थोड़ा झुका सकते है।
  4. अपने कंधों को कानों से दूर रखे ,और गर्दन को मुक्त करे। अपने मस्तक को ज़मीन पर विश्राम करने दे।
  5. इस अवस्था में ३ से ४ बार लंबी और गहरी श्वास ले।
  6. जितनी देर इस स्थिति में रुक सकते है ,उतनी देर बने रहे। कुछ देर रुकने के बाद ,मुद्रा को छोड़े और पुनः अपनी सामान्य अवस्था में आ जाए।
  7. इस आसन को करते समय मन में समर्पण की भावना रखे।








Health Benefits Of Dolphin Yoga | अर्ध पिंच मयूरासन के स्वास्थ्य लाभ





  1. इस आसन का अभ्यास रान की नाड़ी ,कंधे और कूल्हों में एक अच्छा खिचाव देता है।
  2. यह पैर,हाथ ,कंधे और गर्दन को मजबूत बनाता है।
  3.  हड्डियों को मजबूत बनाकर कैल्शियम और विटामिन D की कमी को पूर्ण करता है। तथा ऑस्टियोपोरोसिस जैसे रोगों को रोकता है।
  4.  प्रजनन अंगों को उत्तेजित कर प्रजनन प्रणाली को स्वस्थ बनाये रखता है।
  5. समस्त गुप्तरोग ,वीर्यरोग ,मासिक धर्म की अनियमितता ,रजोनिवृत्ति को रोकने में मदद करता है।
  6. नियमित इस आसन का अभ्यास जठराग्नि को प्रदीप्त कर पाचनक्षमता को बढ़ाता है। इसके अभ्यास से भूक खुलकर लगती है।
  7. मंदाग्नि ,कब्ज ,वायुविकार ,अपच, अम्लता ,थकान ,अनिद्रा ,सिरदर्द को दूर करने में सहायक है।  
  8. इसके अलावा ये अस्थमा ,कटिस्नायुशीलता ,तथा रक्तचाप जैसी बीमारियों में आराम पहुंचाता है।
  9. इसके अभ्यास से दिमाग शांत एवं तनावरहित बना रहता है।
  10. मस्तिक्ष की कार्यक्षमता को बढ़ाकर एकाग्रता को विकसित करता है।
  11. यह व्यक्ति में समर्पण की भावना को जगाता है।





Ardha Pincha Mayurasana Precautions | अर्ध पिंच मयूरासन में सावधानी


  • यह आसन अत्यंत सरल योगासनों में से एक है।
  • इसे करते समय केवल एक बात का ध्यान रखना चाहिए। की आपकी गर्दन,कंधे और पैर पूर्ण रूप से स्वस्थ हो। और उन्हें किसी भी तरह से कोई चोट या परेशानी ना हो।








Few Things About Dolphin Yoga Pose | ध्यान रखने योग्य बाते


  • इस आसन का अभ्यास खाली पेट किया जाना चाहिए।
  • किसी भी योगासन का अभ्यास करने के ५ से ६ घंटे पहले आपका भोजन हो जाना चाहिए .इसलिए ये अच्छा होगा, की आप इस आसन का अभ्यास सुबह करे।
  • पर अगर आप व्यस्त रहते है या अन्य किसी कारण से सुबह अभ्यास नहीं कर पाते तो आप शाम को भी इस आसन को कर सकते है।










अब आप जान गए है की "अर्ध पिंच मयूरासन" का अभ्यास कैसे करे। Dolphin Yoga को अपने दैनिक योगसत्र में शामिल करना एक अच्छा निर्णय साबित होता है। 
ये आसन आपको अन्य कई योगासनों के लिए तैयार करता है। और आपको अद्वितीय लाभ देता है। लेख पसंद आने पर अपने दोस्तों के साथ इसे जरूर बांटे। और कमेंट बॉक्स मे अपनी राय देना ना भूले।

टिट्टिभासन योग है वातरोगों का काल ,और भी है लाभ | Tittibhasana Yoga

टिट्टिभासन योग है वातरोगों का काल ,और भी है लाभ | Tittibhasana Yoga

संस्कृत : टिट्टिभासन ,टिट्टिभा - टिट्टिभ पक्षी ,आसन - मुद्रा
योग में वर्णित टिट्टिभासन   एक जटिल योगासन है। इस आसन का निर्माण "टिट्टिभ" नाम के पक्षी की प्रेरणा से किया गया है।  इसे Firefly Pose के नाम से भी जाना जाता है।  इसका अभ्यास करने के लिए शरीर में अत्याधिक ताकद का होना आवश्यक है। नियमित और एकाग्रता के साथ अभ्यास कर ,आप इस आसन को साध सकते है। अगर आप नियमित योगाभ्यास करते है, तो कम से कम अवधि में आप इस आसन में महारथ हासिल कर पाएंगे। इसे करते समय व्यक्ति की शारीरिक मुद्रा ठीक ,उड़ते हुए टिट्टिभ पक्षी के समान दिखाई देती है । 







Tittibhasana Yoga | टिट्टिभासन योग

Tittibhasana Yoga | टिट्टिभासन योग




  1. आसन की शुरुवात करने के लिए जमीन पर चटाई बिछाकर सामान्य स्थिति में बैठ जाए। 
  2. पैरों को  सामने फैलाये और मेरुदंड को सीधा रखे।
  3. दोनों हाथों को बगल में फर्श पर विश्राम करने दे। इस अवस्था को दंडासन कहा जाता है। 
  4. धड़ को आगे बढ़ाते हुए , दाहिने पैर को घुटने से मोड़कर उसे दाहिने कंधे के पीछे ले जाए। 
  5. उठे हुए पैर को, दाहिनी भुजा के, बाहरी भाग पर रखे। और दाहिनी हथेली को फर्श पर सटा दे। 
  6. इसीतरह बाए पैर को भी घुटने से मोड़कर बायीं बायीं भुजा के ऊपर रखे। 
  7. इस अवस्था में आपकी दोनों भुजाये ,आपके दोनों जाँघों के निचे आ जाती है। 
  8. श्वास ले और दोनों हाथों को फर्श पर मजबूती से दबाये। 
  9. दोनों हाथ एवं भुजाओं के सहारे शरीर को ऊपर उठाये और संतुलन स्थापित करे। जीतनी देर इस स्थिति में आप आरामदायक महसूस करते है ,उतनी देर बने रहे। 
  10. आसन का अभ्यास करते समय श्वास गति को सामान्य बनाये रखे। 
  11. श्वास छोड़ते हुए पुनः सामान्य स्थिति में आ जाए। 
  12. इस आसन का अभ्यास करते समय साधक अपना ध्यान मूलाधार चक्र पर केंद्रित करता है।







Tittibhasana Benefits | टिट्टिभासन के लाभ 

  1. इस आसन के अभ्यास से पेट और जाँघों के बिच खिचाव उत्पन्न होता है।
  2.  यह  हाथ ,कंधे और पैरों को मजबूती प्रदान करता है। 
  3. पाचनतंत्र को मजबूत कर भूक को बढ़ाता है। 
  4. समस्त वातरोगों का नाशक है। 
  5. मोटापे को दूर कर वजन घटाने में सहायक है। 
  6. ये कब्ज ,अम्लता ,वायुविकार ,कमजोरी ,मंदाग्नि ,जी मचलना इत्यादि बीमारियों मे लाभदायी है। 
  7. मेरुदंड को मजबूत और लचीला बनाता है। 
  8. शरीर संतुलन में वृद्धि करता है। 
  9. मस्तिक्ष को शांत रख तनाव-रहित बनाये रखता है।








Beginner Tips | शुरुवात के लिए टिप्स



  • शुरुवाती समय में इसे सही ढंग के साथ करने में कठिनाई आ सकती है। 
  • इस आसन का अभ्यास करने के लिए रान की नाड़ी का मजबूत और लचीला होना अत्यंत आवश्यक है। इसलिए जब आप पैरों को ऊपर ले जाते है,  तो छाती और कमर के बिच के भागों का ध्यान रखना चाहिए। 
  • अभ्यास के दौरान उपरोक्त अंगों में आपको पीड़ा या दर्द महसूस होने लगे तो आसन को रोक देना चाहिए।








Tittibhasana Precautions | अभ्यास में सावधानी

  • गंभीर पीठदर्द या कंधे के दर्द से पीड़ित लोग इस आसन का अभ्यास ना करे।
  • इसके अलावा हाथ,पैर,कंधे ,कोहनी एवं जाँघों की किसी चोट से पीड़ित होनेपर भी इस आसन से बचना चाहिए।








Some Things You Need To Know | ध्यान रखने योग्य बाते




  • इस आसन का अभ्यास खाली पेट करना आवश्यक है। 
  • आप सुबह और शाम दोनों समय इसका अभ्यास कर सकते है। बस आपको भोजन और अभ्यास के बिच कुछ समय छोड़ना आवश्यक है।







इस लेख में आपको Tittibhasana Yoga के बारे में जानकारी दी। टिट्टिभासन आपको अनगिनत स्वास्थ लाभ देता है। पहली बार इसका अभ्यास अपने गुरु या साथी के सानिध्य में करना चाहिए। ये आसन जटिल जरूर है ,पर नियमित अभ्यास द्वारा इसमें महारथ हासिल की जा सकती है। आप अपनी राय कमेंट बॉक्स में दे सकते है। इस जानकारी को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे।
ऐसे करें उत्तानपादासन योग ,एब्स बनाने का आसान तरीका | Uttanpadasana Yoga

ऐसे करें उत्तानपादासन योग ,एब्स बनाने का आसान तरीका | Uttanpadasana Yoga

योग में वर्णित उत्तानपादासन का अभ्यास पेट की समस्याओं के लिए विशेष लाभकारी है। इस आसन का अभ्यास करते समय, पैरों को ऊपर उठाया जाता है ,जो पेट और पेट के आतंरिक अंगों पर प्रभाव डालता है। कुछ लोग इस आसन का अभ्यास एब्स बनाने के लिए भी करते है। अगर आप घर पर ही एक्सरसाइज करते है ,तो इस आसन के नियमित अभ्यास से आप आसानी से एब्स बना सकते है। इस आसन का अभ्यास शरीर में एक खिंचाव पैदा करता है, जो मांसपेशियों की ताकद को बढ़ाता है। 



Uttanpadasana Yoga | उत्तानपादासन योग

Uttanpadasana Yoga | उत्तानपादासन योग


  1. उत्तानपादासन का अभ्यास करने के लिए जमीन पर चटाई बिछाकर पीठ के बल सीधे लेट जाए।
  2. दोनों हाथों को अपनी बगल में फर्श से सटाकर रखे।
  3. दोनों पैरों को एक साथ जोड़ दे। धीरे धीरे श्वास लेते हुए ,दोनों पैरों को एकसाथ ऊपर की और उठाये। आसानी के लिए वजन को अपने दोनों हथेलियों में बाट दे ,और हथेलियों पर दबाव डाले।
  4. दोनों पैरों को 50 से 60 डिग्री तक ही ऊपर उठाये। अपने पेट के खिंचाव को महसूस करे ,और जीतनी देर रुक सकते है ,उतनी देर रुकने का प्रयास करे।
  5. श्वास को बाहर छोड़ते हुए पैरों को निचे लाये और पुनः अपनी सामान्य अवस्था में आ जाए। इसी क्रिया को ५ से ६ बार करे।







Health Benefits Of Uttanpadasana | उत्तानपादासन के स्वास्थ लाभ



  1. उत्तानपादासन के अभ्यास से नाभि पर एक खिचाव बनता है ,जो नाभि से जुडी धमनियों को स्वच्छ करने में सहायता करता है।
  2. ये जठराग्नि को प्रज्वलित कर अनावश्यक चर्बी को गला देता है ,जिससे वजन काम करने में सहायता मिलती है।
  3. पेट की आंतरिक मांसपेशियों की मालिश कर उन्हें मजबूत बनाता है।
  4. अम्लता ,भूक न लगना ,मंदाग्नि ,कब्ज ,वायुविकार ,गठिया ,हृदयरोगों में सहायक है।
  5. मोटापे को दूर कर पेट को टोन करता है।
  6. इस आसन के नियमित अभ्यास से पीठ ,जाँघे ,कूल्हे की मांसपेशिया मजबूत बनती है।
  7. यह मधुमेह रोगियों के लिए उपयुक्त आसन है।
  8. कूल्हों और जाँघों की मांसपेशियों को खोलने में मदद करता है।
  9.  प्रजनन प्रणाली और मूत्र प्रणाली के दोषों से आराम दिलाता है।
  10. श्वसन विकार ,दमा ,खांसी ,अस्थमा ,को दूर करता है।





Uttanpadasana Precautions | उत्तानपादासन में सावधानी



  • निम्नलिखित समस्याओं से ग्रसित होने पर इस आसन का अभ्यास ना करे।
  1. उच्च रक्तचाप  की समस्या होनेपर इस आसन का अभ्यास ना करे
  2. पेट की सर्जरी या पेट संबंधित किसी गंभीर बिमारी से पीड़ित होनेपर भी इसे ना करने की सलाह दी जाती है।
  3. स्लिप डिस्क से ग्रसित होनेपर भी इस आसन से बचना चाहिए।
  4. ये आसन गर्भवती स्त्रियों के लिए नहीं है। 
  5. स्त्रियों को मासिक धर्म (माहवारी) के समय इसका अभ्यास करने से बचना चाहिए।







Things You Need To Know | ध्यान रखने योग्य बातें 



  • बाकी योगासनों की तरह ही उत्तानपादासन का अभ्यास करने से पहले आपका पेट खाली होना आवश्यक है।
  • इसलिए सुबह सूर्योदय के समय इस आसन का अभ्यास करना उपयुक्त रहता है।
  • पर अगर आप शाम के समय भी इस आसन का अभ्यास करना चाहते है ,तो अभ्यास और भोजन में कम से कम ५ से ६ घंटे का अंतर् रखे।









"Uttanpadasana Yoga"  ४ से ५ दिनों के नियमित अभ्यास से ही सरल लगने लगता है। शुरुवात में आप पैरों को ऊपर उठाते समय दीवार या अपने किसी साथी का सहारा ले सकते है। इससे जल्द ही आप उत्तानपादासन में आप महारथ हासिल कर पाएंगे। 
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शरीर को लचीला बनाना है ,तो रोज करे उर्ध्व धनुरासन का अभ्यास  | Urdhva Dhanurasana

शरीर को लचीला बनाना है ,तो रोज करे उर्ध्व धनुरासन का अभ्यास | Urdhva Dhanurasana

योगशास्त्र में वर्णित Ek Pad Urdhva Dhanurasana एक उन्नत योगमुद्रा है। इसका अभ्यास साधक के लिए तभी फलदायी रहता है ,जब वो धनुरासन में पूर्ण संतुलन प्राप्त कर ले। इस आसन का अभ्यास सरल हो जाता है ,जब आप इसे आसनों का अभ्यास या व्यायाम आदि करने के बाद करे। योग आसनों के या व्यायामों के अंत में शरीर गर्म और खुला हुआ रहता है ,जिससे आप आसानी से उर्ध्व धनुरासन  का अभ्यास कर सकते है। 

"एक पाद उर्ध्व धनुरासन"  शब्द संस्कृत भाषा से आया है ,जो एक+पाद+उर्ध्व+धनु+आसन इन पांच शब्दों से मिलकर बना है। इसका सटीक और सरल अर्थ एक =एक ,पाद= पैर,उर्ध्व= ऊपर की और ,धनु = धनुष्य ,आसन= स्थिति ,दोनों पैरों में से एक पैर को ऊपर करके धनुष्य की स्थिति बनाना निकलता है।



Urdhva Dhanurasana In Hindi - उर्ध्व धनुरासन योग

Urdhva Dhanurasana In Hindi - उर्ध्व धनुरासन योग





  1. इस आसन का अभ्यास किसी शांत और स्वच्छ जगह पर करे।
  2. सर्वप्रथम जमीन पर चटाई डालकर पीठ के बल लेट जाए।
  3. श्वास को सामान्य स्थिति में लेते रहे।
  4. अपने दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर अपने नितंब  (हिप्स) तक ले आये ,और दोनों हाथों को कंधे के ऊपर ले जाकर फर्श पर टिका दे।
  5. हाथों को फर्श पर टिकाते समय यह ध्यान दे की दोनों हाथों की उंगलिया पैरों की दिशा में होनी चाहिए।
  6. अपने दोनों हाथ एवं दोनों पैरों पर शरीर का वजन डालकर ,शरीर को ऊपर उठाये। 
  7. अब शरीर को अंदर की और इसप्रकार से मोड़ने का प्रयास करे ,जिसप्रकार धनुष्य को बनाते समय लकड़ी को मोड़ा जाता है।
  8. इस स्थिति में श्वास को सामान्य रूप से  लेते रहे। इस अवस्था को योग में चक्रासन के नाम से जाना जाता है। { जाने - चक्रासन और उसके लाभ }
  9. जब आप इस अवस्था में अपने आप को संतुलित और स्थिर पाए ,तो उन्नत अवस्था को प्राप्त करने के लिए ,अपने दोनों हाथ एवं अपने बाएं पैर पर शरीर को संतुलित करे। 
  10.  दायां पैर ऊपर उठाने का प्रयत्न करे। शुरुवाती समय में पैर को ऊपर उठाते समय घुटने से मुड़ा हुआ रहता है। परंतु जब आप इसका अभ्यास करे ,तो धीरे धीरे पैर को सीधा करने का प्रयास करे।
  11. एक यही स्थिति होती है ,जो आपके धैर्य और आत्मशक्ति  की परीक्षा लेती है। परंतु संयम के साथ टिके रहने से ये अवस्था सिद्ध हो जायेगी।
  12. यही अवस्था Ek Pad Urdhva Dhanurasana की स्थिति कहलाती है। इसी क्रिया को अपने दूसरे पैर के साथ भी करे।
  13. जब आप इस अवस्था को साध लेते है ,तो इस आसन को और उन्नत बनाने के लिए आप विरुद्ध हाथ को भी ऊपर उठाकर संतुलन बनाने का प्रयत्न करे।
  14. जैसे अगर आपका दायां पैर ऊपर है तो आप अपने बाएं हाथ को ऊपर करके ,केवल अपने दाहिने हाथ और बाए पैर पर शरीर को संतुलित करने का अभ्यास  कर सकते है।
  15. अभ्यास करते समय आप अपना ध्यान अपने मेरुदंड ,नाभि पर ,या जो पैर जमीन पर है ,उस पैर के खिचाव पर केंद्रित कर सकते है।





 While Practicing Urdhva Dhanurasana - ध्यान देने योग्य बाते



  • योग का प्रमुख लक्ष्य अपने शरीर को स्वस्थ और निरोगी बनाकर परमात्मा के मार्ग पर अग्रेसर होना है। ना की अपने आप को पीड़ा या चोट पहुँचाना है।
  • उर्ध्व धनुरासन का अभ्यास करने के लिए शरीर का संतुलित और लचीला होना परम आवश्यक है। 
  • इसलिए  अभ्यास करने से पूर्व अपने दैनंदिन आसनों या व्यायामों पीछे झुकने वाले आसनों को स्थान दे।
  • जब आप अपने शरीर में लचीलापन और संतुलन की स्थिति का अनुभव करे ,तभी आप उपरोक्त आसन का अभ्यास करे।
  • पीछे झुकाव देने वाले आसनों में आप चक्रासन ,धनुरासन ,भुजंगासन,सर्वांगासन जैसे आसनों का समावेश कर सकते है।
  • जब आप इस आसन का अभ्यास करे तो आपका पेट खाली होना चाहिए ,तथा भोजन के १० घंटे बाद इस आसन का अभ्यास करना लाभदायी रहता है।
  • सर्वोत्तम परिणामों के लिए आसनों का अभ्यास ब्रम्हमुहर्त (सुबह) के समय करना स्वास्थ के लिए फलदायी रहता है।





 Health Benefits Of Urdhva Dhanurasana -  उर्ध्व धनुरासन के लाभ


  1. शरीर को लचीला एवं संतुलन शक्ति का विकास करने के लिए उर्ध्व धनुरासन अत्यंत फायदेमंद है।
  2. इस आसन के अभ्यास से कंधे ,पैर,तथा हाथ मजबूत एवं शक्तिशाली बनते है।
  3. मेरुदंड पर विशेष प्रभाव पड़ने के कारण ,मेरुदंड को लचीला और स्वस्थ बनाता है।
  4. इसके अभ्यास से छाती चौड़ी होकर ह्रदय की कार्यक्षमता को बढ़ता है। 
  5. शरीर में खून का संचार तेज होकर ,रक्त को शुद्ध करता है।
  6. गले के रोगों में फायदेमंद है ,तथा आँखों की समस्याओं को दूर कर आँखों को स्वस्थ एवं निरोगी बनाता है।
  7. इसके अभ्यास से रक्तसंचार मस्तिक्ष की और होने लगता है ,जिससे दिमाग तनावरहित एवं शांत रहता है।
  8. प्रजनन अंगों को प्रभावित कर ,प्रजनन क्षमता को बढ़ाता है ,तथा गुप्तरोग,श्वेत प्रदर, मासिक धर्म संबंधित समस्याएं  इत्यादि रोगों में परम उपयोगी है।
  9. ये आसन आत्मशक्ति को बढ़ाकर धैर्य ,सहनशीलता तथा संयम जैसे गुणों को उजागर करता है।






Precautions For Ek-Pad Urdhva Dhanurasana - सावधानी


  • एक पाद उर्ध्व धनुरासन  सामान्य आसन नहीं है ,ये एक उन्नत योगमुद्रा है।
  •  इसीलिए स्वयं इसका अभ्यास ना करे। चिकित्स्कीय परामर्श तथा योग्य प्रशिक्षक की देखरेख में ही इस आसन का अभ्यास करे।
  • ये आसन उन लोगों के लिए नहीं है जो रीढ़ की हड्डी की चोट (मेरुदंड) तथा उच्च रक्तचाप से पीड़ित है।
  • पहली बार किसी योग्य गुरु या साथी के सानिध्य में ही उर्ध्व धनुरासन का अभ्यास करना चाहिए।





इस लेख में आपने "एक पाद उर्ध्व धनुरासन "  के बारे में जाना। उर्ध्व धनुरासन फायदेमंद साबित हो सकता है ,अगर आप इसे अपने डेली रूटीन में स्थान दे। 
हनुमान आसन हैं असीम शक्ति का स्रोत ,ऐसे दूर होंगे गुप्तरोग

हनुमान आसन हैं असीम शक्ति का स्रोत ,ऐसे दूर होंगे गुप्तरोग

योगशास्त्र में वर्णित हनुमान -आसन  एक बहुत ही प्रभावी और चमत्कारी आसन है। शुरुवाती समय में हनुमान आसन का अभ्यास करते समय थोड़ी कठिनाइयाँ हो सकती है। परंतु एकाग्रता और सूझ-बुझ के साथ किया हुआ अभ्यास इस आसन में सफलता दिलाता है। 

हनुमान एक संस्कृत शब्द है।  हिन्दू संस्कृति में पूजे जाने वाले भगवान शिव के अवतार ,हनुमानजी से इस आसन की निर्मिति हुयी। बाल ब्रम्हचारी हनुमान की रामभक्ति आचरणीय और लोकप्रिय है। दरअसल जब माता सीता को रावण लंका ले गया था ,तब समुद्र पार कर लंका जाने के लिए रामभक्त हनुमान ने छलांग लगायी थी ,और माता सीता की खोज की थी। हनुमान-आसन ,हनुमान के द्वारा लगाई गयी इसी छलांग को दर्शाती है।  इसलिए इस आसन को हनुमान आसन के नाम से जाना जाता है। 


 Hanumanasana In Hindi - हनुमान आसन योग


Hanumanasana In Hindi - हनुमान आसन योग

  1. हनुमान आसन का अभ्यास करने के लिए किसी स्वच्छ और खुले स्थान का चुनाव करे।
  2. सर्वप्रथम निचे चटाई डालकर घुटनो के बल बैठ जाए।
  3. शुरुवाती समय में चटाई के  स्थान पर कंबल या कोई नरम कपड़ा बिछाकर इस आसन को करे। 
  4. इस अवस्था में ध्यान रखे की घुटने एक दूसरे से थोड़ी दुरी बनाते हो।
  5. अपने दाहिने घुटने को आगे की और ले जाए। और दाहिने पैर की एड़ी को जमीन पर टिकाकर रखे।
  6.  श्वास को अंदर ले ,अब श्वास को बाहर निकालते हुए अपने धड़ को धीरे धीरे आगे बढ़ाये और शरीर संतुलित करने के लिए अपने दोनों हाथों की उंगलिया फर्श पर टिकाकर सहारा ले।
  7. इसी क्रिया को करते हुए अपने बाए घुटने को पीछे की और ले जाए और संतुलन बनाये रखे।
  8. इस मुद्रा के अंतिम छोर तक पहुंचने के लिए अपने दाहिने पैर को आगे की और बढ़ाते जाए। 
  9. यही स्थिति होती है जहा आपको अपनी आत्मशक्ति को जगाकर धैर्य के साथ काम लेना होता है।
  10. अभ्यास जारी रखते हुए अपने बाए पैर को पीछे की तरफ ले जाने का प्रयत्न करे। 
  11. इस अवस्था में आपके दाहिने पैर की एड़ी और घुटना जमीन से सटा होना चाहिए तथा आपके दाहिने पैर की उंगलिया ऊपर की और होनी चाहिए।
  12. यही दूसरी तरफ आपके बाए पैर के जांघ से लेकर उंगलियों तक का भाग जमीन से जुड़ा होना चाहिए।
  13. जब आपके दोनों पैर सीधे हो जाए और संतुलन की स्थिति बनने लगे।  तो इस अवस्था को अधिक आरामदायक बनाने के लिए अपने दोनों हाथों को ऊपर उठाकर नमस्कार की मुद्रा बनाये और अपने शरीर और पीछे की कमान दे।
  14. जैसे किसी धनुष्य को बनाने के लिए लकड़ी को कमान देनी होती है ,और फिर उसमे धागा भरा जाता है। ठीक उसी प्रकार आपके शरीर को कमान देनी है।
  15. अपनी श्वास को सामान्य रूप से चलते रहने दे ,तथा १ मिनट तक इस आसन में बने रहने का प्रयास करे।
  16. शुरुवाती समय में जितना आप इस आसन में आरामदायक स्थिति महसूस करते है ,उतना ही रुके।
  17. निरंतर अभ्यास के साथ आप अपनी समय अवधि को बढ़ा सकते है। जब इसका अभ्यास हो जाए तो आसन को छोड़ने के लिए अपने दोनों हाथों को जमीन पर रखे और पैरों को सामान्य स्थिति में लाते हुए वापस सामान्य स्थिति में आ जाए।
  18. इसी क्रिया को पैरों को बदलकर करे।
  19. अभ्यास करते समय हिंदू देवता हनुमान जी से शक्ति की कामना करनी चाहिए।
  20. इस आसन को सरल बनाने के लिए आप इसके पहले वीरासन या सुप्त वज्रासन का अभ्यास कर सकते है। 
  21. जब आप हनुमान आसन का अभ्यास कर लेंगे ,तो इसके बाद आप पच्शिमोत्तनासन या नटराज आसन का अभ्यास कर सकते है।





Tips  For Beginners | शुरुवात के लिए कुछ टिप्स



  • हनुमान आसन सामान्य आसन नहीं है ,इस आसन का अभ्यास दोनों पैरों में खिचाव उत्पन्न करता है ,इसलिए इसे करते समय पैरों के निचे कंबल का प्रयोग करे।
  • जब आप इस आसन का अभ्यास करते है ,तो अपने धड़ को सीधा और लंबा करने के लिए, अपने पीछे के पैर पर दबाव डाले।
  • तथा आगे के पैर को जमीन से सटाकर पैरों की उंगलिया को स्पर्श करे एवं अपने सर को दाहिने पैर के घुटने से लगाने का प्रयास करे।





 Benefits Of Hanumanasana - हनुमान आसन के लाभ


Benefits Of Hanumanasana - हनुमान आसन के लाभ


  1. हनुमान आसन के अभ्यास से पूर्ण शरीर में खिचाव उत्पन्न होता है ,तथा मांसपेशियां मजूबत बन कर सुचारु ढंग से अपना कार्य करती है।
  2. ये आसन शरीर में आध्यात्मिक शक्ति को बढ़ाता है ,साथ ही वीर्य दोषों को दूर कर वीर्य को मजबूत बनाता है। 
  3. इसका निरंतर अभ्यास जाँघे ,पैर,कमर ,हिप्स ,को लचीला बनाकर मजबूती प्रदान करता है।
  4.  जठराग्नि की तीव्रता को बढ़ाता है,और पाचनतंत्र को ठीक करता है।
  5. भूक न लगना,मंदाग्नि ,पाचन संबंधी समस्याएं तथा पेट की समस्याओं में हनुमान आसन विशेष है।
  6. ये आसन शरीर के प्रजनन अंगों पर प्रभाव डालता  है ,जिससे प्रजनन संस्था के सभी रोगों के लिए ये आसन फायदेमंद है।
  7. प्रजनन शक्ति को बढाकर व्यक्ति को ओजस्वी और तेजस्वी बनाता है।
  8. समस्त वीर्यदोष तथा गुप्तरोग इस आसन के अभ्यास से ख़त्म हो जाते है।
  9. नित्य हनुमान आसन के अभ्यास से छाती चौड़ी और मजबूत बनती है एवं पीठ को फ़ैलाने में ये आसन विशेष उपयोगी है।
  10.  तनाव ,चिंता,अवसाद जैसी समस्याओं को दूर रखता है।
  11. शरीर में मौजुद विशेष गुणों में से धैर्य ,सहनशीलता और समर्पण जैसे गुणों को उजागर करता है।
  12. इसका अभ्यास स्थिरता को बढ़ाता है और शारीरिक और मानसिक शक्तियों को विकसित करता है।
  13. मन को संयमित रखने में विशेष भूमिका निभाता है।
  14. ये आसन शरीर में स्फूर्ति को कभी कम नहीं होने देता ,बड़ी से बड़ी कमजोरी को दूर करने में सहायक है।
  15. सबसे महत्वपूर्ण बात, ये व्यक्ति के मन से डर को दूर कर ,साधक को निर्भीक बनाता है। 





While Practicing This Pose - ध्यान देने योग्य बाते



  • हनुमान आसन का अभ्यास खाली पेट ही करना चाहिए। इसलिए हनुमान आसन का अभ्यास करने से पूर्व यह निश्चित कर ले की आपके भोजन और अभ्यास के बिच ०८ से १० घंटे का अंतराल हो।
  • हनुमान आसन पेट की आतों पर अपना विशेष प्रभाव दिखता है ,इसलिए इसका अभ्यास करने से पूर्व आपकी आतें खाली होना बहुत ही आवश्यक है।
  • इसलिए इसके अभ्यास के लिए , ब्रम्हमुहर्त (सुबह) का समय सर्वोत्तम और सकारात्मक परिणाम देने वाला माना जाता है।






Precautions For Hanumanasana - हनुमान आसन में सावधानी



  • हनुमान आसन सामान्य योगासनों में नहीं आता, इसीलिए इसे चिकित्सक (डॉक्टर) की सलाह लेकर ,या  किसी योग्य गुरु या प्रशिक्षक के सानिध्य में ही करे ,नहीं तो आप खुद ही अपने लिए चोट या समस्या  उत्पन्न कर लेंगे।
  • इस आसन का अभ्यास करते समय कभी भी आपको दर्द या पीड़ा उत्पन्न हो तो आसन को तुरंत रोक दे।
  • पैरों को फैलाते समय जबरदस्ती बिल्कुल ना करे ,जितना संभव हो उतना ही पैरों को फैलाना चाहिए।
  • पहले से पैर,जाँघे ,कंधे ,हिप्स ,और कमर में किसी भी तरह की चोट या समस्या होनेपर इस आसन को ना करे। 
  • पहली बार किसी योग्य गुरु या साथी के साथ ही इस आसन का अभ्यास करे।




अब आपको "Hanumanasana " के बारे में जानकारी मिल चुकी है। आशा करता हूँ की आप सावधानीपूर्वक और गुरु के सानिध्य में हनुमान आसन में महारथ हासिल करेंगे।